1.8 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा, सीबीआई ने ITBP के सात अधिकारियों पर दर्ज की एफआईआर

सीबीआई ने आईटीबीपी के सात अधिकारियों के खिलाफ सरकारी स्टोर्स में बड़े पैमाने पर हेराफेरी और 1.8 करोड़ रुपये के घोटाले को लेकर दो एफआईआर दर्ज की हैं. आरोपियों पर टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी, घोटाले और सरकारी धन के दुरुपयोग का आरोप है. यह घोटाले 2017-18 से 2020-21 के बीच हुए.

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आईटीबीपी के सात अधिकारियों पर केस दर्ज आईटीबीपी के सात अधिकारियों पर केस दर्ज

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 30 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 10:09 AM IST

सीबीआई ने इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) के सात अधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार और सरकारी स्टोर्स में हेराफेरी के दो अलग-अलग मामले दर्ज किए हैं. इन मामलों में कुल 1.8 करोड़ रुपये के गबन का आरोप है.

पहले मामले में आईटीबीपी की शिकायत पर सीबीआई ने तत्कालीन कमांडेंट अनुप्रीत बोरकर और डिप्टी कमांडेंट दीपक गोगोई, पूरन राम, मुकेश चंद मीना, इंस्पेक्टर अनिल कुमार पांडे और ठेकेदार मदन सिंह राणा के खिलाफ मामला दर्ज किया है. इन पर साल 2019-21 के दौरान सीमा चौकियों (BOPs) तक सरकारी सामान पहुंचाने की टेंडर प्रक्रिया में हेराफेरी का आरोप है.

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आईटीबीपी के सात अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप

शिकायत के मुताबिक 2020-21 में 1,198 रुपये प्रति जोड़ी की दर से 105 जोड़ी रबर बूट खरीदे जाने थे, लेकिन अधिकारी सस्ते जूते 499 रुपये में खरीद लाए, जिससे सरकार को 73,395 रुपये का नुकसान हुआ.

इसी दौरान जून 2020 में जब गलवान घाटी में भारत-चीन सैनिक आमने-सामने थे, भूमि पेट्रोलिंग अभियान के लिए आठ कुलियों और तीन टट्टुओं की स्वीकृति दी गई थी, लेकिन केवल सात कुलियों को ही रखा गया, जिससे 2.05 लाख रुपये का नुकसान हुआ.

सीबीआई ने अधिकारियों के खिलाफ दर्ज किया केस 

सीबीआई के अनुसार, इन अधिकारियों ने अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर किया और 1.54 करोड़ रुपये का गबन किया. दूसरा मामला 2017-18 और 2018-19 के दौरान सरकारी स्टोर्स में हेराफेरी से जुड़ा है.

इस मामले में तत्कालीन कमांडेंट महेंद्र प्रताप, दीपक गोगोई, मुकेश चंद मीना और तीन ठेकेदारों मदन सिंह राणा, कुंदन सिंह भंडारी और पूरन सिंह बिष्ट पर 8 हजार लीटर सब्सिडी वाले केरोसिन तेल की हेराफेरी का आरोप है.

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करोड़ों रुपयों के गबन का आरोप

सीबीआई ने आरोप लगाया है कि इन अधिकारियों ने परिवहन दस्तावेजों में हेरफेर कर टट्टू या सिविल वाहन के बजाए कुली का उल्लेख किया, ताकि सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा सके. इस गड़बड़ी से सरकार को 22.07 लाख रुपये का नुकसान हुआ. सीबीआई अब इन मामलों की गहन जांच कर रही है.

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