छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हाथों मारे गए आदिवासियों और आम ग्रामीणों के बच्चे अपना करियर बनाने के लिए जीतोड़ मेहनत कर रहे हैं. सरकार भी ऐसे बच्चों के लिए दिल खोलकर सहयोग कर रही है. लिहाजा JEE मेंस परीक्षा में छत्तीसगढ़ के आदिवासी और पिछड़े इलाकों के 116 बच्चों ने उत्तीर्ण होकर इतिहास रच दिया है. हालांकि राज्य से इस बार लगभग 200 बच्चे JEE में चयनित हुए हैं.
खास बात यह है कि इस परीक्षा में पास होने वाले 18 ऐसे बच्चे हैं जिन्होंने धुर नक्सली इलाके दंतेवाड़ा से पढ़ाई करके अपना जौहर दिखाया है. ये सभी बच्चे सरकारी आश्रमों में रहकर पढ़ाई कर रहे थे. इस इलाके में छू लो आसमान नामक अभियान के तहत इन बच्चों का करियर बनाया जा रहा है. दुख की बात यह है कि कामयाबी हासिल करने वाले ज्यादातर बच्चों के सिर से उनके मां-बाप का साया उठ चुका है. सरकारी सहायता से इन बच्चों का पालन पोषण और पढ़ाई लिखाई की जा रही है. बच्चे इतने होनहार हैं कि मन लगाकर ना केवल पढ़ाई- लिखाई कर रहे हैं, बल्कि अपना करियर बनाने पर भी ध्यान दे रहे हैं.
JEE मेंस परीक्षा में जहां आंध्रप्रदेश के सूरज कृष्णा देशभर में अव्वल रहे वहीं भिलाई के सुयश सिंह 99 रैंक के साथ स्टेट टॉपर रहे. सुयश सिंह को 360 में से 316 अंक मिले. सुयश सिंह सीनियर आईएएस अधिकारी सुबोध सिंह के पुत्र हैं.
(तस्वीर में सुयश सिंह)
JEE मेंस परीक्षा में दंतेवाड़ा के जिन 18 बच्चों ने कामयाबी हासिल की है, उनमें आठ लड़कियां और दस लड़के हैं. कारली और बालोद गांव के इन बच्चों को 'छू लो आसमान' नामक अभियान के तहत पढ़ाया जा रहा था. दंतेवाड़ा के कलेक्टर सौरभ कुमार ने तमाम बच्चों की हौसला अफजाई की. इसके अलावा सरकारी स्कूलों के 116 छात्रों के चयन ने लोगों को हैरान कर दिया है.
आमतौर पर सरकारी स्कूलों में पढ़ाई लिखाई राम भरोसे ही रहती है, लेकिन पहली बार सरकारी स्कूलों ने भी अपनी साख कायम करते हुए JEE मेंस परीक्षा में अपना परचम लहराया है. जशपुर के संकल्प आवासीय विद्यालय से 17 छात्र चुने गए हैं. एकलव्य विद्यालय से 09 और विभिन्न सरकारी स्कूलों से 38 विद्यार्थी उर्तीण हुए. सफल हुए ये सभी बच्चे छोटे- छोटे गांव और गरीब परिवारों से ताल्लुक रखते हैं.
JEE मेंस परीक्षा में संकल्प आवासीय विद्यालय के सर्वाधिक अंक प्राप्त करने वाले छात्र युवराज पैकरा के माता-पिता खेती किसानी करते हैं. वो फरसाबहार नामक गांव में रहते हैं. फिलहाल इन बच्चों की कामयाबी से सरकार तो गदगद है ही साथ ही वो शिक्षक और अफसर भी खुश हैं जिन्होंने इन्हें पढ़ाया और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कराई.
परमीता शर्मा / सुनील नामदेव