सरायपाली सीट जहां से एक बार जीता विधायक दूसरी बार नहीं चुना गया

छत्तीसगढ़ की सरायपाली विधानसभा सीट पर 10 बार कांग्रेस के कब्जे में रही है तो 3 बार बीजेपी लेकिन एक बार का जीता विधायक दूसरी बार नहीं बन सका है. राज्य गठन के बाद दो बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है.

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सरायपाली विधायक रामलाल चौहान सरायपाली विधायक रामलाल चौहान

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 15 सितंबर 2018,
  • अपडेटेड 11:23 AM IST

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले की सरायपाली विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है. राज्य के गठन के बाद तीन बार हुए विधानसभा चुनाव में दो बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस ने जीत हासिल की है. मौजूदा समय में यहां से बीजेपी के रामलाल चौहान विधायक हैं, लेकिन कांग्रेस वापसी के लिए हरसंभव कोशिश में जुटी है.

सरायपाली के सियासी समीकरण की बात की जाए तो इस सीट को लंबे समय तक कांग्रेस का गढ़ माना जाता था. हालांकि बीते पंद्रह साल से इस सीट पर कभी कांग्रेस तो कभी बीजेपी के प्रत्याशी को जीत मिलती रही है. इस विधानसभा सीट की सबसे बड़ी खासियत ये है कि यहां से जीतने के बाद कोई भी विधायक दोबारा चुनकर नहीं आया.

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सरायपाली विधानसभा का अधिकतर इलाका जंगल से ढका हुआ है और गरियाबंद-छुरा से होते हुए रायगढ़ तक यह इलाका नक्सलियों के लिए सेफ कॉरिडोर भी है. ये गांड़ा समुदाय बहुल माना जाता है. हालांकि क्षेत्र में अघरिया और कोलता समुदाय भी बड़ी तादाद में है.

2013 के विधानसभा चुनाव नतीजे

बीजेपी के रामलाल चौहान को 82064 वोट मिले थे.

कांग्रेस के डॉ. हर्षवर्धन भारद्वाज 53232 वोट मिले थे.

2008 के परिणाम

कांग्रेस के डॉ. हर्षवर्धन भारद्वाज 64456 वोट मिले थे.

बीजेपी के नीरा चौहान को 48234 वोट मिले थे.

2003 के चुनाव नतीजे

बीजेपी के त्रिलोचन पटेल को 48234 वोट मिले थे

कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर सिंह 40942 वोट मिले थे.

जातीय समीकरण

सरायपाली का जातीय समीकरण भी दिलचस्प है. यहां पर 24 फीसदी एसटी, 11 फीसदी एससी, 18 फीसदी अघरिया और 16 फीसदी वोटर कोलता समाज से हैं. इसके अलावा सामान्य के 2 फीसदी और अल्पसंख्यक वोटर 2 फीसदी हैं.

सरायपाली के सियासी इतिहास की बात की जाए तो सीट पर अब तक 10 बार कांग्रेस ने अपना कब्जा जमाया है, जबकि बीजेपी केवल तीन बार ही कांग्रेस के इस गढ़ को ढहाने में कामयाब हो पाई है. कांग्रेस के टिकट पर यहां राजपरिवार से जुड़े महेंद्र बहादुर और देवेंद्र बहादुर जीतते रहे हैं. लेकिन राज्य बनने के बाद 2003 के चुनाव में यहां बीजेपी के त्रिलोचन पटेल ने कांग्रेस के देवेंद्र बहादुर को हरा कर कांग्रेस को झटका दिया है.

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छत्तीसगढ़ के समीकरण

आपको बता दें कि छत्तीसगढ़ में कुल 90 विधानसभा सीटें हैं. राज्य में अभी कुल 11 लोकसभा और 5 राज्यसभा की सीटें हैं. छत्तीसगढ़ में कुल 27 जिले हैं. राज्य में कुल 51 सीटें सामान्य, 10 सीटें एससी और 29 सीटें एसटी के लिए आरक्षित हैं.

2013 में रमन सिंह हैट्रिक

2013 में विधानसभा चुनाव के नतीजे 8 दिसंबर को घोषित किए गए थे. इनमें बीजेपी ने राज्य में लगातार तीसरी बार कांग्रेस को मात देकर सरकार बनाई थी. रमन सिंह की अगुवाई में बीजेपी को 2013 में कुल 49 विधानसभा सीटों पर जीत मिली थी. जबकि कांग्रेस सिर्फ 39 सीटें ही जीत पाई थी. जबकि 2 सीटें अन्य के नाम गई थीं.

2008 के मुकाबले बीजेपी को तीन सीटें कम मिली थीं, इसके बावजूद उन्होंने पूर्ण बहुमत से अपनी सरकार बनाई. रमन सिंह 2003 से राज्य के मुख्यमंत्री हैं.

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