24 लाख रुपये के इनामी 6 नक्सलियों ने किया सरेंडर, कमांडर ने भी डाले हथियार

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में 24 लाख रुपये के इनामी 6 नक्सलियों ने पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया. इसमें नक्सली कमांडर भी शामिल है. सुकमा में नक्सलवाद को खत्म करने के लिए इसे बड़ी सफलता मानी जा रही है. सरेंडर करने वालों में नक्सली कमलू, उसकी पत्नी बांदी, बंदू और सुशीला है. बंदू और सुशीला पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था, जबकि महादेव और दशरू पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था.

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सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

aajtak.in

  • सुकमा,
  • 25 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 8:28 PM IST

छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में शुक्रवार को कुल 24 लाख रुपये के इनामी राशि वाले छह नक्सलियों ने सरेंडर कर दिया. पुलिस अधिकारियों ने जानकारी दी कि आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों में से प्रत्येक पर लाखों रुपये का इनाम घोषित था.

न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस के अनुसार, आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों की पहचान कमलू हेमला उर्फ पवन, उसकी पत्नी बांदी दूधि उर्फ कमला, बांदी सोढ़ी उर्फ बंदू, मड़वी/नागुल सुशीला, कुंजाम रोशन उर्फ महादेव और कोटेश सोढ़ी उर्फ दशरू के रूप में हुई है.

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पुलिस अधिकारी ने बताया कि कमलू, उसकी पत्नी बांदी, बंदू और सुशीला पर 5-5 लाख रुपये का इनाम था, जबकि महादेव और दशरू पर 2 लाख रुपये का इनाम घोषित था. अधिकारी ने आगे बताया कि, 'कमलू प्रतिबंधित संगठन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) के दक्षिण उप-जोनल ब्यूरो प्रेस टीम का कमांडर और क्षेत्रीय समिति का सदस्य था. 

उसकी पत्नी बांदी सिल्गेर स्थानीय संगठन दस्ते (एलओएस) की कमांडर थी. सुशीला किस्ताराम एलओएस की उप-कमांडर थी और बंदू दक्षिण उप-जोनल ब्यूरो समन्वय दल की सदस्य थी.' महादेव प्रतिबंधित संगठन की प्लाटून नंबर 4 का सदस्य था और दशरू पामेड़ क्षेत्रीय समिति का सदस्य था. इन सभी ने पुलिस और सुरक्षा बलों के समक्ष आत्मसमर्पण किया.

पुलिस ने बताया कि सभी आत्मसमर्पित नक्सलियों को सरकार की नीति के अनुसार वित्तीय सहायता प्रदान की गई है और पुनर्वास कार्यक्रम के तहत उनकी मदद की जाएगी. पुलिस अधिकारियों ने कहा कि यह आत्मसमर्पण सरकार की पुनर्वास नीति और सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई का परिणाम है.

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छत्तीसगढ़ में नक्सलवादियों को मुख्यधारा में लाने के लिए सरकार की पुनर्वास नीति के तहत नक्सलियों को आत्मसमर्पण के बाद वित्तीय सहायता, पुनर्वास, और शिक्षा और रोजगार के अवसर प्रदान किए जाते हैं. अधिकारियों ने बताया कि इस तरह का आत्मसमर्पण न केवल क्षेत्र में शांति स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है बल्कि नक्सलियों के बीच आतंकवाद से तौबा करने के लिए बढ़ते रुझान को भी दर्शाते हैं.

 

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