बिहार: MLC चुनाव के लिए NDA के बीच बंटवारा, BJP 13 और JDU 11 सीटों पर उतारेगी उम्मीदवार

Bihar MLC Chunav 2022: बिहार विधान परिषद चुनाव को लेकर एनडीए में चल रही रस्साकसी शनिवार को आखिरकार खत्म हो ही गई. NDA गठबंधन के बीच हुई बैठक में 13 सीटें भाजपा और 11 सीटों पर जदयू को देने पर सहमति बन गई.

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Bihar एनडीए में एमएलसी चुनाव को लेकर सीट का बंटवारा तय. (फाइल फोटो) Bihar एनडीए में एमएलसी चुनाव को लेकर सीट का बंटवारा तय. (फाइल फोटो)

सुजीत झा

  • पटना,
  • 29 जनवरी 2022,
  • अपडेटेड 9:34 PM IST
  • बिहार एनडीए में एमएलसी चुनाव को लेकर सीट का बंटवारा तय
  • बीजेपी 13 और जेडीयू 11 सीटों पर चुनाव लड़ेंगे
  • बीजेपी एक सीट पशुपति पारस की पार्टी को देगी

बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव में हुए सीटों के बंटवारे से साफ हो गया कि बीजेपी (BJP) बिहार में जदयू (JDU) के बड़े भाई की भूमिका में है. जबकि अब तक बड़े भाई होने की जिम्मेदारी जदयू के कंधे पर थी. एमएलसी चुनाव में बीजेपी 13 और जदयू 11 के  सीटों पर चुनाव लड़ने का समझौता हो गया है. पहले जेडीयू 50:50 के तहत 12-12 सीटों पर चुनाव लड़ने की वकालत कर रहा था, लेकिन बीजेपी इस बार अड़ी रही. बीजेपी नेताओं का कहना है कि वह 13 सीटों पर पहले से हैं, इसलिए अपनी मौजूदा सीटों को नहीं छोड़ेंगे. हालांकि, बीजेपी ने अपने हिस्से की एक सीट राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (पारस गुट) को एक सीट देने पर राजी हो गई है.

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एमएलसी चुनावों के लिए सीटों का बंटवारे का ऐलान शनिवार को संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुआ. इसमें केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव और बिहार सरकार के मंत्री विजय चौधरी मौजूद थे. दोनों दलों के नेताओं ने कहा कि एनडीए बिहार में एकजुट है और किसी प्रकार का कोई विवाद नहीं हैं. बिहार में विधानपरिषद की 24 सीटों पर चुनाव होना है. मौके पर बिहार के उपमुख्यमंत्री तारकिशोर प्रसाद और बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जयसवाल भी मौजूद थे.

एमएलसी चुनाव को लेकर सीटों का बंटवारा काफी दिनों से अटका हुआ था. जदयू 12 सीटों पर लड़ना चाहता था जबकि बीजेपी 13 सीटों पर. जेडीयू का तर्क था कि चूंकि 2019 के लोकसभा और 2020 के विधानसभा चुनाव में दोनों पार्टियों ने 50:50 के फॉर्मूले पर चुनाव लड़ा था, इसलिए एमएलसी चुनाव में भी यही फार्मूला होना चाहिए, लेकिन इस बार बीजेपी पीछे नहीं हटी.
 
लोकसभा चुनाव में 50:50 के फॉर्मूले को लागू करने के लिए बीजेपी ने अपनी कई सीटिंग सीटें जदयू को दे दी थीं, लेकिन इस बार ऐसा नहीं दिखा. विधानसभा चुनाव में भी सीटों की अदला बदली हुई थी, लेकिन बीजेपी एमएलसी के चुनाव में अड़ी रही.

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साल 2013 में जब बीजेपी और जेडीयू अलग हुए थे, तब जेडीयू की निर्विवाद रूप से बिहार में बीजेपी का बडा भाई के रूप पहचान थी, लेकिन गठबंधन टूटने और फिर 2017 में जुटने के बीच हालात काफी बदल गए. 2020 के विधानसभा चुनाव में तो बीजेपी सीटों के मामले में काफी आगे निकल गई, लेकिन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को ही बनाया.

भले ही बीजेपी एमएलसी चुनाव में ज्यादा सीट लेकर बड़े भाई की भूमिका में हो, लेकिन जदयू ने उसकी 13 सीटिंग सीटों में से एक सीट पशुपति कुमार पारस की पार्टी राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी को दिलवा कर यह साबित करने की जरूर कोशिश की कि भले ही कद कम हुआ है, लेकिन जोर में कमी नहीं है. पहले पारस को भी जदयू के कोटे से ही सीट मिलने की बात थी.  

 

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