अदिति सिंह, 34 वर्ष
विधायक रायबरेली सदर
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रायबरेली सदर से पांच बार विधायक रहे पिता अखिलेश सिंह की तबियत खराब होने के चलते अदिति सिंह ने राजनीति में प्रवेश किया. वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में रायबरेली सदर सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में पहला चुनाव जीतने वाली अदिति अपने पिता के पदचिन्हों पर ही चल रही हैं.
अखिलेश सिंह पहले कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में रायबरेली सदर से चुनाव जीतते रहे लेकिन पिछले दो चुनाव उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में कांग्रेस के विरोध में ही लड़ा. पिता की तरह ही अदिति ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद अब भाजपा का दामन थाम लिया है.
कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली की सदर विधायक के रूप में अदिति ने अपनी पहचान एक सक्रिय नेता की बनाई है. मुख्यमंत्री योग आदित्यनाथ को अपना गुरु मानने वाली अदिति नवंबर, 2020 में रायबरेली में कमला नेहरू एजुकेशन सोसाइटी की जमीन से जुड़े विवाद को लेकर गांधी परिवार पर हमलावर हो गई थीं.
हालांकि इससे साल भर पहले नवंबर, 2019 में वे उन कर्मचारियों के समर्थन में उतर आई थीं जो मोदी सरकार की ओर से रायबरेली के आधुनिक रेलडिब्बा कारखाने का निगमीकरण किए जाने का विरोध कर रहे थे. रायबरेली सदर विधायक के रूप में अदिति की कई बार जनता की समस्याओं को लेकर स्थानीय प्रशासन से भिड़ंत हो चुकी है.
समाज सेवा मसूरी इंटरनेशन स्कूल से बारहवीं तक की पढ़ाई करने के बाद अदिति ने अमेरिका के ड्यूक विश्वविद्यालय से मैनेजमेंट की डिग्री ली. राजनीति में आने से पहले वे सामाजिक कार्यों में सक्रिय थीं
''2017 के यूपी विधानसभा चुनाव में भाजपा लहर के
दौरान जीवन का पहला चुनाव जीतना जनता के बीच अदिति की पकड़ जाहिर करता है’’
—प्रोफेसर शशिकांत पांडेय, विभागाध्यक्ष राजनीति शास्त्र विभाग, बाबासाहेब भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ
आशीष मिश्र