नवगठित
राज्य तेलंगाना के सूचना प्रौद्योगिकी तथा पंचायती राज मंत्री के.टी.
रामराव कहते हैं, ‘‘हैदराबाद हमेशा आगे, यही इस शहर के लिए उपयुक्त जुमला
है.’’ इस शहर पर नौकरियों की तलाश में आए ग्रामीण युवकों का दबाव लगातार बढ़
रहा है. तेलंगाना में हुए एक सर्वेक्षण के मुताबिक ग्रेटर हैदराबाद की
आबादी 1.2 करोड़ से ज्यादा है. शहर तेजी से कॉस्मोपॉलिटन बनता जा रहा है.
शायद
ही कोई महीना ऐसा गुजरता हो कि शहर के महंगे इलाके जुबली हिल्स के रोड नं.
36 पर कोई-न-कोई लांज बार या रेस्तरां न खुलता हो. ये उन आइटी प्रोफेशनल्स
के ठिकाने बनते हैं जिनकी संख्या बढ़ती जा रही है. शहर की प्रगति का मुख्य
स्रोत आइटी निर्यात 2013-14 में 57,000 करोड़ रु. हो गया है. इससे पहले वाले
साल में यह 49,831 करोड़ रु. था. इससे शहर देश के आला चार निर्यातक शहरों
में से एक बन गया है.
आइटी उद्योग में 3,00,000 लोग काम करते हैं और हर साल
20,000 रोजगार का सृजन होता है. हैदराबाद सॉफ्टवेयर एंटरप्राइजेज एसोसिएशन
के पूर्व अध्यक्ष वी. राजन्ना कहते हैं, ‘‘इन्फ्रास्ट्रक्चर, प्रतिभा और
सरकार, उद्योग तथा अकादमिक जगत में तालमेल होने से शहर में काफी संभावनाएं
हैं.’’
तेलंगाना के कुल निर्यात में आइटी उद्योग का एक-तिहाई हिस्सा होता
है. हैदराबाद दवा उद्योग का भी केंद्र है. केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय के
अधीन फार्मास्यूटिकल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल के महानिदेशक डॉ. पी.वी.
अप्पाजी कहते हैं, ‘‘देश में दवा उत्पादों के कुल 90,000 करोड़ रु. के
निर्यात में राज्य की हिस्सेदारी करीब 18,000 करोड़ रु. की है.’’
हैदराबाद
और उसके उपनगरों में अन्य शहरों के मुकाबले सबसे ज्यादा संख्या में विशेष
आर्थिक क्षेत्र (एसईजेड) भी हैं. मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव कहते हैं,
‘‘हैदराबाद दिल्ली से बड़ा तो है लेकिन शहर का विकास वैज्ञानिक तरीके से
नहीं हुआ है.’’
अमरनाथ के. मेनन