प्रेग्नेंसी से पहले माइग्रेन रहा है तो गर्भकाल में हो सकती हैं ये तीन बड़ी दिक्कतें: स्टडी

एक ताजा स्टडी में सामने आया है कि अगर प्री प्रेग्नेंसी माइग्रेन रहा है तो गर्भकाल में तीन बड़ी समस्याएं होने की संभावना बढ़ जाती हैं. ये तीन प्रॉब्लम्स प्री टर्म डिलिवरी, गर्भकाल का हाइपरटेंशन और प्री एक्लेम्श‍िया हैं.

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty) प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

मानसी मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 24 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 7:43 PM IST

प्रेग्नेंसी की नौ माह की यात्रा के हर पड़ाव की अपनी असहजता होती है. लेकिन ज‍िन महिलाओं में माइग्रेन (सिरदर्द) की समस्या पहले रही है, उन्हें काफी सावधानी बरतनी चाहिए. हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के साथ ब्रिघम और महिला अस्पताल के साथ स्टडी में शोधकर्ताओं ने पाया है कि प्री-प्रेग्नेंसी माइग्रेन वाली महिलाओं में गर्भकाल की जटिलताओं का अधिक खतरा होता है. इनमें तीन रिस्क फैक्टर जिसमें प्री-टर्म डिलीवरी, जेस्टेशनल हाइपरटेंशन और प्री-एक्लेमप्सिया खासतौर पर शामिल हैं. 

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माइग्रेन और गर्भावस्था की जटिलताओं के बीच संबंधों का आकलन करने के लिए शोधकर्ताओं ने हजारों महिलाओं के डेटा का विश्लेषण किया. न्यूरोलॉजी में प्रकाशित इस स्टडी में बताया गया है कि कैसे गर्भावस्था से पहले का माइग्रेन गर्भकाल में प्रतिकूल परिणामों से सीधे जुड़ा हुआ है. इस स्टडी के जरिये प्रसूत‍ि काल के रिस्क को समझने के लिए इसे क्ल‍िनिकल मार्कर के तौर पर रखने की बात कही गई है. 

शोधकर्ता कहते हैं कि प्री टर्म डिलिवरी और रक्तचाप संबंधी विकार मां और श‍िशु में कोई बीमारी या मृत्युदर का कारक बनता है. अध्ययनकर्ता हार्वर्ड मेडिकल स्कूल में मेडिसिन इंस्ट्रक्टर एलेक्जेंड्रा पर्डयू स्म‍िथ ने कहा क‍ि हमारे अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि माइग्रेन की हिस्ट्री कैसे एक रिस्क फैक्टर की तरह देखी जा सकती है ताकि प्रेग्नेंसी के दौरान ज्यादा से ज्यादा निगरानी रखी जा सके. 

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महिलाएं पुरुषों से ज्यादा माइग्रेन का श‍िकार 

बता दें कि आंकड़ों के मुताबिक पुरुषों की तुलना में दो से तीन गुना ज्यादा महिलाएं माइग्रेन का श‍िकार होती हैं. वैसे भी माइग्रेन 18 से 44 वर्ष की आयु के बीच की महिलाओं में सबसे अधिक प्रचलित है. कुछ के लिए, माइग्रेन का सिरदर्द Aura के साथ हो सकता है. इसके लक्षणों में अक्सर तेज रोशनी चुभने और सिरदर्द  शामिल होते हैं. अभी तक किसी भी अध्ययन में औरा फेनोटाइप माइग्रेन (औरा से अलग लक्षण वाला) के जोखिमों की जांच नहीं की. 

पर्ड्यू-स्मिथ और उनके सहयोगियों ने 30,555 गर्भवतियों पर ये स्टडी की है. इस स्टडी में औरा और विदआउट औरा वाले फेनोटाइप माइग्रेन के मरीजों का डेटा भी शामिल किया. शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रीप्रेग्नेंसी माइग्रेन प्रीटर्म डिलीवरी के 17 प्रतिशत हाई रिस्क, गर्भकालीन हाइपरटेंशन के 28 प्रतिशत हाई रिस्क और प्री-एक्लेमप्सिया की 40 प्रतिशत उच्च दर से जुड़ा था. 

ये है राहत वाली बात 

स्टडी में माइग्रेन से पीड़ित जिन प्रतिभागियों ने गर्भावस्था से पहले नियमित एस्पिरिन का उपयोग (सप्ताह में दो बार से अधिक) किया था. उनमें समय से पहले प्रसव यानी प्री टर्म डिल‍िवरी का जोखिम 45 प्रतिशत कम था. यूएस प्रिवेंटिव सर्विसेज टास्क फोर्स वर्तमान में प्री-एक्लेमप्सिया के उच्च जोखिम वाली मरीजों से गर्भावस्था के दौरान एस्पिरिन की कम खुराक की सिफारिश करती है. क्लिनिकल ट्रायल से पता चला है कि गर्भावस्था के दौरान एस्पिरिन की कम खुराक प्री टर्म बर्थ की दरों को कम करने में भी प्रभावी है. हालांकि इस स्टडी में एस्प‍िरिन के यूज करने को लेकर स्पष्टीकरण नहीं दिया गया. 

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गर्भावस्था से पहले नियमित एस्पिरिन के उपयोग की सूचना देने वाली माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं में समय से पहले प्रसव के कम जोखिम के हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि एस्पिरिन माइग्रेन से पीड़ित महिलाओं के लिए भी फायदेमंद हो सकती है. वह कहते हैं कि एस्पिरिन खुराक पर शोधकर्ता कुछ रिकमेंड नहीं कर सकते. इस सवाल का उत्तर देने के लिए नैदानिक ​​​​परीक्षणों की जरूरत होगी. 

 

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