पहले से मोटापा या डिप्रेशन में बढ़ा वजन, दोनों ही मेंटल हेल्थ के लिए चुनौती

कई बार डिप्रेशन में मोटापा बढ़ जाता है. वहीं, पहले से मौजूद मोटापा भी लोगों में डिप्रेशन बढ़ाने में रोल अदा करता है. जब स्ट्रेस में लोग इमोशनल ईट‍िंग करते हैं तो उनका वजन बढ़ने लगता है. इस सच्चाई के साथ जुड़ा दूसरा पहलू ये है कि मोटापा भी इंसान को कई तरह के डिसऑर्डर्स और डिप्रेशन का श‍िकार बनाता है. मनोचिकित्सकों से इस दोहरे रिश्ते के बारे में जानिए और सचेत रहिए.

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प्रतीकात्मक फोटो (Getty) प्रतीकात्मक फोटो (Getty)

मानसी मिश्रा

  • नई दिल्ली ,
  • 14 सितंबर 2022,
  • अपडेटेड 5:55 PM IST

'भाभी जी घर पर हैं' सीरियल में अम्माजी के किरदार से फेमस सोमा राठौड़ ने कभी शो पाने के लिए ज्यादा वजन बढ़ाया. तलाक के बाद डिप्रेशन में जाने के बाद उनका वजन पहले भी बढ़ रहा था, लेकिन उन्होंने इसे प्लस साइज में बदला ताकि उन्हें प्लस साइज वाले रोल मिल सकें. उन्हें रोल तो मिले लेकिन साथ में बॉडी शेमिंग और असहजता ने उन्हें परेशान कर दिया. अब वो दोबारा वजन घटा रही हैं. बढ़ा हुआ वजन या डिप्रेशन में बढ़ा वजन दोनों ही डिप्रेशन में इजाफा करते हैं. मनोचिकित्सकों से समझें इस रिश्ते के बारे में और बचाव के तरीके भी. 

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भारतीय समाज में आज भी मोटापे को न सिर्फ बड़े विकार के तौर पर देखा जाता है, बल्क‍ि इसमें बॉडी शेमिंग का श‍िकार होना आम बात हो जाती है. फिल्म और टीवी इंडस्ट्री का भी इसमें बड़ा रोल कहा जा सकता है, जहां मोटापे को हंसी का पात्र के तौर पर पेश किया गया. लेकिन क्या आपको पता है कि मोटापे का डिप्रेशन से गहरा रिश्ता है. कई बार डिप्रेशन में मोटापा बढ़ जाता है. वहीं, पहले से मौजूद मोटापा भी लोगों में डिप्रेशन बढ़ाने में रोल अदा करता है. जब स्ट्रेस में लोग इमोशनल ईट‍िंग करते हैं तो उनका वजन बढ़ने लगता है. इस सच्चाई के साथ जुड़ा दूसरा पहलू ये है कि मोटापा भी इंसान को कई तरह के डिसऑर्डर्स और डिप्रेशन का श‍िकार बनाता है. 

आंकड़ों के अनुसार, साल 1975 के बाद से दुनिया भर में मोटापे की दर लगभग तीन गुना बढ़ी है. इसी क्रम में डिप्रेशन भी लगातार बढ़ा है. साल 2000 के दशक की शुरुआत से कई अध्ययनों ने मोटापे और डिप्रेशन की गहरी रिश्तेदारी पर तथ्य रखे हैं. इन अध्ययनों में सामने आया है कि मोटापे से ग्रस्त लोगों में डिप्रेशन का प्रसार स्वस्थ और सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में दोगुना है. वहीं इसका दूसरा पहलू डिप्रेशन के दौरान मोटापा बढ़ना भी दिखाता है. 

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AIIMS के मनोचिकित्सक डॉ अनिल शेखावत कहते हैं कि मोटापा और डिप्रेशन दोनों चीजें बाइ डायरेक्शनल हैं, जिनको डिप्रेशन होता है उनको ओबेसिटी होने के चांसेज ज्यादा होते हैं. वहीं जिनको ओबेसिटी है उनको टू टाइम ज्यादा चांस है होता है कि उन्हें ड‍िप्रेशन आ जाए. दूसरा प्वाइंट ये है कि व्यक्त‍ि को किसी तरह का स्ट्रेस हो, चाहे वो एडवर्स लाइफ इफेक्ट हो, चाइल्ड हुड एक्सपीरिएंस हो या कुछ और... जब स्ट्रेस डेवलेप हेता है, उसके साथ ही कोर्ट‍िसोल हार्मोन डेवलेप होता है जो हमारे स्ट्रेस को डील करने के लिए ब्लड प्रेशर बढ़ाता है. 

इससे ग्लूकोज का ट्रांसपोर्टेशन हमारे ब्रेन में बढ़ता है. ये एनर्जी एफिश‍िएंसी बढ़ाता है जिससे ब्लड का सर्कुलेशन पूरी बॉडी में बढ़कर स्ट्रेस कंट्रोल करता है.  लेकिन स्ट्रेसफुल लाइफ में जब बॉडी में कार्टिसोल ज्यादा देर तक बना रहे तो बॉडी के सारे सिस्टम को नेगेट‍िव इफेक्ट देता है. कोर्ट‍िसोल लेवल हो सकता है कि हार्मोनल एक्सेस को डिस्टर्ब करे और जिससे मूड चेंज होने लग जाते हैं. इससे ये भी हो सकता है कि व्यक्त‍ि की एपेटाइट बढ़ जाए और वो इमोशनल ओवर ईटिंग करने लग जाए. 

इसमें जरूरी नहीं कि डिप्रेशन का श‍िकार हर व्यक्ति ओवर ईटिंग करता है. इसके लिए हमें डिप्रेशन को भी फौरी तौर पर समझना होगा, एक होता है टिपिकल डिप्रेशन जिसमें इंसान को न खाने का मन करता है, न घूमने फिरने और न ही एक्सरसाइज-एक्ट‍िविटी का मन करता है. इस डिप्रेशन में आने वाले व्यक्त‍ि का वजन घटने की समस्या हो सकती है. वहीं एटिपिकल डिप्रेशन में व्यक्त‍ि एपेटाइट का श‍िकार होता है. वो अनहेल्दी चीजें खा लेगा, मीठा ज्यादा खाएगा, स्मोकिंग और अल्कोहल का इस्तेमाल भी अपने मूड को ठीक करने के लिए करेगा. इसकी वजह से वो वेट गेन कर लेते हैं. डॉ शेखावत कहते हैं कि इमोशनल ईटिंग की समस्या आपको बड़ी मुसीबत में डाल सकती है, इसे समय रहते पहचानें और एक्सपर्ट की मदद लें. 

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अब इसका दूसरा पहलू है मोटापे और डिप्रेशन का. जो पहले से ओबीज हैं, उनके एड‍िपोस टिश्यू में फैट ज्यादा होता है, उसमें इन्फलामेट्री फैक्टर बढ़ जाता है, उस इन्फलामेशन को डील करने के लिए प्रोटीन बनते हैं. इसको इस तरह से समझ‍िए, मोटापे से ग्रस्त लोगों में वसायुक्त टिश्यू की एक श्रंखला होती है. इस इनफ्लेमेशन से जुड़े सिग्नलिंग प्रोटीन का उत्पादन प्रत‍िरक्षा कोश‍िकाएं करती हैं. इन प्रोटीन में से जैसे साइटोकिन्स मानसिक-स्वास्थ्य समस्याओं से संबंधित है. ये आमतौर पर अवसाद के लिए बायोमार्कर के रूप में उपयोग किया जाता है. इसके अलावा मोटापे से ग्रसित लोग एक तरह की हीनभावना का श‍िकार हो जाते हैं, जिससे उनमें व्यक्त‍ित्व विकार और तनाव बढ़ने लगता है. 

इस बारे में दक्षिण ऑस्ट्रेलिया विश्वविद्यालय में ऑस्ट्रेलियन सेंटर फॉर प्रिसिजन हेल्थ की निदेशक एलिना हाइपोनेन की ट‍िप्पणी महत्वपूर्ण है, वो कहती हैं कि मोटे लोग कलंक के भाव में जीने लगते  हैं और यह भी मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करने के लिए बाध्य है. भोपाल के जाने माने  मनोचिकित्सक डॉ सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि वास्तव में, मोटापे और अवसाद के बीच का संबंध कहीं अधिक जटिल है. पिछले एक दशक में अनुसंधान ने दो स्थितियों के बीच आगे-पीछे एक परस्पर और अतिव्यापी जैव रासायनिक का वर्णन किया है, जिसमें प्रत्येक दूसरे को बढ़ाने की साजिश रच रहा है. एक तरफ एटिपिकल डिप्रेशन इमोशनल ईटिंग से मोटापे को बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मोटापे के कारण भी डिप्रेशन बढ़ रहा है. 

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वरिष्ठ मनोवैज्ञानिक डॉ विध‍ि पिलनिया कहती हैं कि डिप्रेशन में कई बार ओवर ईटिंग होती है, इसे इमोशनल ईटिंग कहते हैं. इसके साथ ही डिप्रेशन इंसान को इनेक्ट‍िव कर देता है, इसलिए मोटापा हो जाता है. इसके अलावा हाइपो थायरॉयड‍िज्म और डिप्रेशन भी एक दूसरे से जुड़े हुए होते हैं. एंटी डिप्रेशेंट भी स्टेरॉयड्स हैं, इसलिए डाइट में सुगर और साल्ट का परहेज न रखने से और खराब लाइफस्टाइल से मोटापा होता है. 

इहबास हॉस्प‍िटल दिल्ली के वरिष्ठ मनोचिकित्स डॉ ओमप्रकाश कहते हैं कि देश में ईट‍िंग डिसऑर्डर की समस्या मोटापे को बढ़ा रही है. इससे मोटापा जनित डिसऑर्डर बढ़े हैं. डॉ ओमप्रकाश बताते हैं कि ईटिंग डिसऑर्डर दो प्रकार का होता है, एक तो एनोरेक्‍स‍िया नर्वोसा है जिससे ग्रसित व्यक्त‍ि दुबला होने के लिए खाने से परहेज की हर हद पार कर देता है. वहीं दूसरा प्रकार है बुलिमिया. बुलिमिया से पीड़ि‍त व्यक्ति बिना वजह जरूरत से ज्यादा खाता है. वो चाहकर भी अपने खान-पान को कंट्रोल नहीं कर पाते हैं. एनोरेक्सिया और बुलीमिया आमतौर पर 15 वर्ष की उम्र से शुरू होता है. लेकिन कोविड-19 ड‍िजीज के माहौल में भी कई लोगों में ईटिंग डिसऑर्डर पनपे हैं. लोग तनाव को कम करने या घरों से काम करते वक्‍त बार बार खाने पीने की आदतों का श‍िकार हो जाते हैं. इसलिए अगर आप भी खाने पीने की आदत को अपने मन से कंट्रोल नहीं कर पाते तो आपको एक बार जरूर सोचना चाह‍िए क‍ि कहीं ये बुल‍िम‍िया तो नहीं है.

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ऐसे करें बचाव, ये 5 टिप्‍स अपनाएं

  • बचपन से ही बच्चों को मोटापे के प्रत‍ि सचेत रखें, लेकिन इसे बॉडी शेमिंग का पार्ट न बनने दें     
  • अपनी लाइफस्‍टाइल को हेल्‍दी और रूटीन पर रखें. कोश‍िश करें कि नाश्‍ता और खाना वक्‍त पर, पाचक और पौष्टिक हो.
  • किसी स्ट्रेस के कारण दोबारा या बार बार कुछ खाने का मन करता है तो कोश‍िश करें क‍ि हेल्‍दी चीज जैसे फल या पत्‍तेदार सलाद लें.
  • जब भूख लगे तभी खाएं, न जबरदस्ती भूखे रहें, न पेट भरा होने पर कुछ खाने की आदत डालें.
  • किसी के कहने पर मोटा होने या पतला होने की टिप्‍स न अपनाएं, क‍िसी व‍िशेषज्ञ से बात करके ही वेट घटाएं या बढ़ाएं. 
  • मोटापे के कारण यदि आपको तनाव रहता है तो मनोचिकित्सक से मिलकर इसका निदान खोजना चाहिए, साथ ही होपलेस होने से बचें. 

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