आज के समय में दुनिया में कई लोग एंग्जाइटी से जूझ रहे हैं, जो एक मेंटल हेल्थ प्रोब्लम है. हालांकि कुछ लोग एंग्जाइटी से जुड़ी गलत धारणाओं के चक्कर में फंस जाते हैं और अपने मानसिक स्वास्थ्य को ज्यादा बिगाड़ लेते हैं. आज हम आपको बताएंगे एंग्जाइटी से जुड़े कुछ कॉमन मिथक के बारे में, जिनके चक्कर में व्यक्ति को नहीं पड़ना चाहिए.
एंग्जाइटी से जुड़े मिथक
1. एंग्जाइटी का मतलब है ज्यादा सोचना- कई लोग ये मानते हैं कि एंग्जाइटी का मतलब ओवरथिंकिंग करना है और ऐसा सोचकर लोग इस मेंटल हेल्थ प्रोब्मल को नजरअंदाज कर देते हैं. जबकि एंग्जाइटी मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारी है, जिसमें इंसान को डर और बेचैनी महसूस होती है.
2. एंग्जाइटी कमजोरी की निशानी है- एंग्जाइटी के बारे में सबसे गलत धारणा ये है कि यह कमजोरी की निशानी है, जिसकी वजह से इस मेंटल हेल्थ प्रोब्लम से पीड़ित इंसान लोगों की मदद नहीं लेता और अकेले ही इस समस्या से जूझता रहता है.
3. एंग्जाइटी खुद ही खत्म हो जाएगी- इस मेंटल हेल्थ प्रोब्लम को लेकर कुछ लोगों का मानना है कि ये एक अस्थायी समस्या है, जो समय के साथ खुद ही चली जाएगी. लेकिन लोग ये नहीं जानते कि एंग्जाइटी को नजरअंदाज करना आगे चलकर उनके मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है.
4. एंग्जाइटी व्यक्ति की कल्पना है- एंग्जाइटी से जुड़ा एक मिथक है कि ये इंसान की कल्पना है, जो उसके सिर पर सवार है. अगर व्यक्ति चाहे तो खुद ही इस मेंटल हेल्थ प्रोब्लम से छुटकारा पा सकता है. जबकि एंग्जाइटी कल्पना की उपज नहीं बल्कि इंसान के ब्रेन में होने वाले केमिकल बदलाव हैं, जो उसके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकते हैं.
5. एंग्जाइटी का शिकार शर्मीले और नर्वस लोग होते हैं- कई लोगों का मानना है कि एंग्जाइटी सिर्फ शर्मीले और नर्वस लोगों को होने वाली मानसिक बीमारी है. हालांकि ऐसा नहीं है क्योंकि एंग्जाइटी इंसान के व्यक्तित्व पर आधारित मेंटल हेल्थ प्रोब्लम नहीं है और ये किसी को भी हो सकती है.
6. एंग्जाइटी का एकमात्र इलाज मेडिसिन है- एंग्जाइटी के बारे में एक गलत धारणा है कि ये सिर्फ दवाओं से ठीक हो सकती है. हालांकि ये बात सच है कि मेडिसिन से एंग्जाइटी का इलाज किया जाता है, लेकिन दवाई लेने से पूरी तरह से इस समस्या का समाधान नहीं हो सकता. इस मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारी को ठीक करने के लिए मेडिसिन के अलावा CBT, एक्सरसाइज और मेडिटेशन भी काफी मददगार होता है.
7. एंग्जाइटी गंभीर समस्या नहीं है- एंग्जाइटी से जुड़ा एक मिथक यह भी है कि ये गंभीर समस्या नहीं है. कुछ लोग सोचते हैं कि एंग्जाइटी इंसान की रोजमर्रा जिंदगी का सामान्य हिस्सा है, जो समय के साथ ठीक हो जाती है. लेकिन ऐसा नहीं है, अगर कोई व्यक्ति लंबे समय से इस मेंटल हेल्थ प्रोब्मल से जूझ रहा है तो उसे डिप्रेशन और पैनिक अटैक जैसा समस्या भी हो सकती है.
8. बच्चों को एंग्जाइटी नहीं होती- एंग्जाइटी के बारे में कुछ लोगों की धारणा है कि ये बच्चों को नहीं होती. हालांकि ऐसा नहीं है क्योंकि एंग्जाइटी किसी भी उम्र के इंसान को हो सकती है. फर्क बस इतना है कि बच्चों और व्यस्क लोगों में एंग्जाइटी के लक्षण अलग होते हैं. एंग्जाइटी से पीड़ित बच्चों में थकान, सोने में परेशानी, चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और पेटदर्द जैसे लक्षण नजर आते हैं.
9. एंग्जाइटी लाइलाज है- एंग्जाइटी के बारे में एक मिथक है कि इसका कोई इलाज नहीं है. जबकि ऐसा नहीं है क्योंकि मेडिसिन, CBT, एक्सरसाइज, मेडिटेशन, हेल्दी डाइट और सेल्फ केयर से एंग्जाइटी से छुटकारा पाया जा सकता है.
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