भारत में फिर कहर बरपाने वाला है कोरोना? डॉक्टर गुलेरिया ने कही ये बात

चीन में कोरोना वायरस के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत सरकार भी इसे लेकर काफी ज्यादा एक्शन में आ गई. हाल ही में भारत स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 को लेकर एक बैठक की जिसमें कई अहम मुद्दों पर बात हुई और महत्वपूर्ण फैसले भी लिए हैं. इसी बीच एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कहा कि कोरोना महामारी को लगभग 3 साल हो चुके हैं, ऐसे में भारत में नेचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन कवरेज के हाई रेट के कारण समान स्थिति नहीं पैदा होगी.

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कोविड-19 पर बोले एम्स के पूर्व डाइरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया (pc: getty images) कोविड-19 पर बोले एम्स के पूर्व डाइरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया (pc: getty images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 22 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 12:13 PM IST

चीन में कोरोना वायरस के मामलों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है. चीन में कोविड के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारत में भी कोरोना का खतरा काफी ज्यादा बढ़ गया है. कोरोना के बढ़ते मामलों को देखते हुए भारतीय सरकार एक्शन में आ चुकी है. हाल ही में भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक मीटिंग बुलाई जिसमें कोरोना के संबंधित कई अहम फैसले लिए गए.

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मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के पूर्व डायरेक्टर रणदीप गुलेरिया ने कहा कि भले में चीन में कोविड -19 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी हो रही है लेकिन भारत में नैचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन कवरेज के हाई रेट के कारण चीन जैसी स्थिति नहीं होगी.

डॉक्टर रणदीप गुलेरिया फिलहाल गुरुग्राम स्थित मेदांता अस्पताल में इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनल मेडिसिन एंड रेस्पिरेटरी एंड स्लीप मेडिसिन एंड डायरेक्टर के चेयरमैन हैं. उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया कि भारत में टेस्टिंग में कमी आई है. सर्दियों के मौसम में अक्सर लोग सर्दी, जुकाम या बुखार आने पर इसका टेस्ट नहीं कराते हैं. ऐसे में अगर कोरोना के टेस्ट होते रहेंगे तो म्यूटेशन का पता चल पाएगा.

एम्स के पूर्व डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया (pc: getty images)

रणदीप गुलेरिया ने बताया कि पूरी दुनिया खासतौर पर चीन और इटली में कोरोना महामारी जिस तरह से अपने पीक पर थी और कोरोना के लाखों मामले सामने आ रहे थे, उसे देखते हुए हमने महसूस किया कि इस स्थिति से बचने के लिए ज्यादा तैयार रहना बेहतर है.

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भारत में कोरोना महामारी के शुरुआती दौर में ही लॉकडाउन लगा दिया गया था ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके. भले ही इस दौरान बहुत से लोगों ने यह भी तर्क दिया कि यह लॉकडाउन समय से पहले था. लेकिन इससे लोगों में जागरुकता पैदा करने में मदद मिली और साथ ही हमें तैयारी करने के लिए अधिक समय मिल पाया. इस दौरान, हमने मरीजों को संभालने के लिए बुनियादी ढ़ांचे को बदलने , पुनर्गठन आदि का काम किया. इन्हीं सब चीजों के चलते पश्चिमी देशों की तुलना में हमने अच्छा काम किया.

वैक्सीनेशन और इंफेक्शन रेट ज्यादा इसलिए खतरा कम

उन्होंने कहा, जब यह महामारी आई तो हमारे लोगों में इस वायरस से निपटने के लिए कोई इम्यूनिटी नहीं थी, जिस कारण कुछ लोगों को इस दौरान गंभीर इंफेक्शन का सामना करना पड़ा. लेकिन अब,  कोरोना महामारी को लगभग 3 साल हो गए हैं, और अब हम ऐसी स्थिति में हैं जहां हमारे लोगों में नेचुरल इंफेक्शन और वैक्सीन कवरेज की दर बहुत ज्यादा है. उन्होंने बताया कि हमारे लोगों की इम्यूनिटी इतनी ज्यादा स्ट्रॉन्ग हो गई है कि कोई भी नया वायरस हमें गंभीरता से प्रभावित नहीं कर सकता. 

उन्होंने बताया कि पिछले तीन सालों में लोगों ने कोरोना वायरस के अलग-अलग वेरिएंट्स जैसे अल्फा, बीटा, डेल्टा आदि सब-वैरिएंट्स का सामना किया है. जिसके चलते भारतीयों के लिए कोरोना वायरस उतना खतरनाक साबित नहीं हो रहा है जितना पहले था. लेकिन हमने पिछले एक साल के भीतर ओमिक्रॉन के कई अलग-अलग रूप विकसित होते हुए देखा है. ये वैरिएंट्स एक-दूसरे से बहुत ज्यादा अलग नहीं है लेकिन इसके बावजूद हमें चीन में तेजी से बढ़ रहे कोरोना वायरस के BF.7 वेरिएंट पर ध्यान देना होगा और इसके प्रति सतर्क भी रहना होगा. हमें नहीं पता है कि आने वाले वक्त में वायरस किस तरह से बिहैव करेगा. ये वायरस अब पहले से कम खतरनाक और स्थिर दिख रहा है लेकिन हमें चीन में कोरोना की वजह से हो रहे हॉस्पिटलाइजेशन और मौतों पर करीबी से नजर रखनी होगी.

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एम्स में अपने कार्यकाल के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि हमने एम्स में विस्तार की योजनाएं बनाई थी और उसपर काम भी चल रहा है. लेकिन कोरोना महमारी के वजह से इस योजना पर काफी असर पड़ा है. कोरोना के चलते एम्स में मरीजों की भीड़ काफी ज्यादा बढ़ी है. उन्होंने बताया कि हेल्थ केयर का भविष्य नए डॉक्टर्स हैं और हमें उन्हें भविष्य के लिए ट्रेनिंग देने की जरूरत है. कोरोना महामारी के बाद से मेडिकल फील्ड में काफी बड़ा बदलाव आया है ऐसे में जरूरी है कि हम नए डॉक्टर्स को इन बदलावों के बारे में ट्रेनिंग दें और उन्हें हर स्थिति से लड़ने के लिए मजबूत बनाएं.

 

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