आर्मी हॉस्पिटल RR की बड़ी उपलब्धि, सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट करने वाला देश का दूसरा सरकारी हॉस्पिटल बना

179 मेड रेजिमेंट के हवलदार भोजराज सिंह की पत्नी अनीता (33 वर्षीय) का आर्मी हॉस्टिपल आरआर में सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट हुआ. 179 मेड रेजिमेंट के हवलदार भोजराज ने ही अपनी पत्नी को किडनी दी है. दोनों की तबीयत फिलहाल ठीक है

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आर्मी हॉस्पिटल आरआर  (रिसर्च एंड रेफरल) ने रोबोटिक ट्रांसप्लांट की शुरुआत की आर्मी हॉस्पिटल आरआर (रिसर्च एंड रेफरल) ने रोबोटिक ट्रांसप्लांट की शुरुआत की

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 27 अप्रैल 2024,
  • अपडेटेड 12:10 PM IST

आर्मी हॉस्पिटल आरआर  (रिसर्च एंड रेफरल) के यूरोलॉजी विभाग ने रोबोटिक ट्रांसप्लांट (Recipient) की एक नई शुरुआत की है. इस सर्जरी के साथ, दिल्ली के सफदरजंग हॉस्पिटल (Safdarjung Hospital) के बाद एएचआरआर देश का दूसरा सरकारी अस्पताल बन गया है जिसने रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट (Robotic Renal Transplant) प्रोग्राम शुरू किया है.

179 मेड रेजिमेंट के हवलदार भोजराज सिंह की पत्नी अनीता (33 वर्षीय) का आर्मी हॉस्टिपल आरआर में सफल रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट हुआ. 179 मेड रेजिमेंट के हवलदार भोजराज ने ही अपनी पत्नी को किडनी दी है. दोनों की तबीयत फिलहाल ठीक है. इस सर्जरी का नेतृत्व  यूरोलॉजी विभाग के प्रमुख कर्नल अमित शाह ने किया था. यह सर्जरी कमांडेंट और AHRR के निदेशक जनरल अजीत नीलाकंर के मार्गदर्शन में संपन्न हुई.

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रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट क्या है?
रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट एक प्रकार का किडनी प्रत्यारोपण है जिसमें सर्जरी करने के लिए रोबोटिक उपकरणों का उपयोग किया जाता है. यह पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में तेजी से रिकवरी होती है.

रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट कैसे होती है?
रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट में, सर्जन रोगी के पेट में कई छोटे कट लगाकर रोबोटिक इक्विपमेंट्स को डालते हैं. इन इक्विपमेंट्स पर कई कैमरे भी लगे होते हैं जो सर्जन को शरीर के अंदर देखकर सर्जरी करने में मदद करते हैं. सर्जन फिर रोबोटिक इक्विपमेंट्स का उपयोग करके डोनर की किडनी को पेशेंट के शरीर में ट्रांसप्लांट करते हैं.

रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट के फायदे

  • कम कट्स: रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण में पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में बहुत छोटे कट की आवश्यकता होती है. इससे दर्द, रक्तस्राव और संक्रमण का खतरा कम हो जाता है.
  • तेजी से रिकवरी: रोगी आमतौर पर रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण के बाद तेजी से ठीक होते हैं और उन्हें अस्पताल में कम समय बिताना पड़ता है.
  • कम दर्द: रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण के बाद रोगियों को आमतौर पर कम दर्द होता है.
  • बेहतर कॉस्मेटिक रिजल्ट: रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट में छोटे कट्स की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप कम ध्यान देने योग्य निशान होते हैं.

रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण के जोखिम
सभी सर्जरी की तरह, रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण से भी कुछ जोखिम जुड़े होते हैं, जिनमें संक्रमण, रक्तस्राव और एनेस्थीसिया से प्रतिक्रियाएं शामिल हैं. रोबोटिक किडनी प्रत्यारोपण पारंपरिक ओपन सर्जरी की तुलना में अधिक महंगा हो सकता है.

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