'हवा तक जहरीली हो गई', मुंबई को लेकर रूमी जाफरी की बड़ी चिंता, बोले- इतना पैसा जाता कहा हैं

रूमी जाफरी ने मुंबई मंथन में बीएमसी के भ्रष्टाचार, गंदगी और बदहाल सड़कों पर सवाल उठाए. रूमी ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि- बीएमसी सबसे अमीर संस्था है, पैसे की कमी नहीं, लेकिन अगर सबकुछ वैसा ही पड़ा है. तो पैसा जाता कहां है.

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रूमी जाफरी जताई चिंता (Photo: Screengrab) रूमी जाफरी जताई चिंता (Photo: Screengrab)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 9:18 PM IST

गॉड तुस्सी ग्रेट हो, चेहरे, लाइफ पार्टनर, दुल्हन हम ले जाएंगे, जैसी फिल्में लिखने और बनाने वाले रूमी जाफरी आजतक के स्पेशल प्रोग्राम मुंबई मंथन में शामिल हुए. उन्होंने बीएमसी के भ्रष्ट काम और व्यवहार की चर्चा की और साथ ही बताया कि मुंबई में सड़कें कितनी बदहाल हैं. 

बीएमसी के पास है बहुत पैसा

रूमी जाफरी ने कहा कि- हम नेताओं को डिस्कस करने तो बैठे नहीं हैं. नेता क्या है, क्या करता है- वो पूरा देश जानता है. लेकिन हम अपने शहर की बात कर रहे हैं, तो यहां की बीएमसी है वो सबसे पैसे वाली है. इतना पैसा है कि वो सही जगह पर क्यों नहीं लगता, आजतक मेरी समझ में नहीं आया है.
 
'दूसरी बात जो मैंने रियलाइज किया कि कोविड में मास्क जरूरी हो गया था. आप बिना मास्क निकलिए तो 5 मिनट में बीएमसी का ऑफिसर आपको पकड़ लेता था. बाइक पर आता था, आपका फोटो खींचता था, या आपसे पैसे लेता था. तो इन बीएमसी वालों को कचरा नहीं दिखता. उनको गड्ढा नहीं दिखता. ये उनकी ड्यूटी है.'

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बदनाम हो रही सपनों की नगरी 

रूमी आगे बोले- मैं अपने घर से निकलता हूं, तो बाहर कचरे के डब्बे से 10-20 मीटर तक कचरा पड़ा रहता है. मैं परेशान हूं. ये कई दिन तक पड़ा रहता है. और उस जगह की बात है जो मामूली शहर नहीं है. हम तो छोटी जगह के रहने वाले हैं. हमारे लिए तो सपनों का शहर है. मतलब हिंदुस्तान का हर आदमी मुंबई को सपनों की नगरी की तरह देखता है, इतने गाने बने हैं मुंबई के लिए जितने किसी के लिए नहीं. अब तो यहां कि हवा भी खराब हो गई है. सांस लेना मुश्किल हो रहा है.

रूमी ने आगे लोगों से अपील करते हुए कहा कि- हमें भी हमारी जिम्मेदारी को समझना होगा. लोग कचरा डालने आते हैं, डस्टबीन में नहीं डालते बाहर डाल कर चले जाते हैं. लोगों को सड़क पर चलना आना चाहिए. गाड़ी पार्क करना आना चाहिए. कई लोग ऐसे गाड़ी लगाते हैं कि वहां तीन गाड़ी पार्क हो सकती है, लेकिन वो एक ही लगाकर चले जाते हैं. 

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सिनेमा में बदलाव जरूरी

आगे रूमी ने सिनेमा में आए बदलाव को लेकर बात की और कहा कि- बदलना ही इंसान की प्रकृति है. कहानियां समाज का दर्पण है. जैसे राज कपूर-नरगिस के किरदार होते थे, कहानियां होती थी. वो आजकल के यंग लोगों पर ये कैरेक्टर नहीं अच्छे लगेंगे. बदलाव तो होना है ये अच्छा लगता है. इसमें गलत नहीं है.  

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