मनीष पॉल ने 500 से अधिक प्रवासी श्रमिकों को फुटवेयर देकर की मदद

मनीष पॉल ने कहा कि कोरोना ने लोगों पर कड़ा प्रहार किया है. पूरा देश थम गया है और हर दिन मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. हर कोई परेशानी से गुजर रहा है.

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मनीष पॉल मनीष पॉल

अमित त्यागी

  • मुंबई,
  • 06 जून 2020,
  • अपडेटेड 9:22 PM IST

लॉकडाउन में प्रवासी मजदूरों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. मगर उनकी मदद के लिए एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री आगे आई है. सोनू सूद के बाद अब एक्टर और कॉमेडियन मनीष पॉल भी लोगों की मदद को आगे आए हैं. हाल ही में मनीष ने 40 ऐसे श्रमिकों की मदद की जो अपने घर जाना चाहते थे. मनीष ने जब श्रमिकों को रवाना किया तो उन सभी को राशन सामग्री दी और वहां पहुंच कर कुछ तकलीफ ना हो इसलिए कुछ धन राशि भी इन श्रमिकों को दी गई. इस बार मनीष ने रास्तों पर चल रहे मुंबई और दिल्ली के 500 से ज्यादा प्रवासी मजदूरों को फुटवेयर देकर मदद की.

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मनीष इससे पहले भी पीएम केअर फंड में 20 लाख की धन राशि डोनेट कर चुके हैं. इतना ही नहीं अपने स्टाफ को लॉकडाउन से पहले एडवांस सैलरी देकर छुट्टी दे दी थी. हाल ही में मनीष ने व्हाट इफ शार्ट फ़िल्म यूट्यूब पर प्रर्दशित की जो कि लॉकडाउन पर एक मैसेज देती है. इस फ़िल्म से कमाई गई राशि भी कोविड 19 से जूझ रहे लोगों की भलाई के लिए डोनेट की थी.

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मनीष पॉल ने कहा- कोरोना ने लोगों पर कड़ा प्रहार किया है. पूरा देश थम गया है और हर दिन मरने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है. हर कोई परेशानी से गुजर रहा है और कई ऐसे प्रवासी श्रमिक हैं जो बड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं और अपने अस्तित्व के साथ जूझ रहे हैं. प्रत्येक दिन प्रवासी मज़दूरों को अपने मूल स्थानों पर पहुंचने के लिए रास्ते में चलते हुए पाया जाता है और कई दुर्घटनाएं सुर्खियां बनती हैं. यह सचमुच हमारे दिल को बहुत ही तकलीफ देनेवाला है. सभी के पास जरूरती सामानों का आभाव है.

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हाल ही में हर कहीं से ऐसी तस्वीरें आ रही थीं जहां लोग छोटे-छोटे बच्चे भी शामिल हैं वे सैकड़ों किलोमीटर की दूरी नंगे पैरों से तय कर रहे थे जिसे देख किसी का भी सीना पसीज जाएगा. मनीष पॉल पहले से सामाजिक कार्यों में सहभागी होते रहे हैं और इस संकट की घड़ी में भी वे जितना संभव हो सकता है उतनी मदद कर रहे है.

सराहनीय काम कर रहे मनीष

मनीष इस बात का एक जीता-जागता उदाहरण हैं कि हमें इन कठिन समय के दौरान एक दूसरे का समर्थन कैसे करना चाहिए और यह समय है जब हम इन कठिनाइयों, दर्द को एक साथ और उम्मीद से दूर कर सकते हैं.

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