भगवान तिवारी बोले- हर बच्चे को पढ़ाकर जॉब नहीं दी जा सकती

इंडिया टुडे के खास कार्यक्रम 'स्टेट ऑफ द स्टेट्स कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़' में तमाम हस्त‍ियों ने शिरकत की. सांस्कृतिक नवजागरण: सिनेमा, स्पोर्ट्स और आर्ट्स विषय पर आयोजित सेशन में फिल्म स्टार अनुज शर्मा, एक्टर भगवान तिवारी और मुख्यमंत्री सचिवालय के ओएसडी विक्रम सिंह सिसोदिया ने अपनी बात रखी.

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भगवान तिवारी भगवान तिवारी

स्वाति पांडे

  • नई दिल्ली,
  • 29 जून 2018,
  • अपडेटेड 8:45 PM IST

इंडिया टुडे के खास कार्यक्रम 'स्टेट ऑफ द स्टेट्स कॉन्क्लेव छत्तीसगढ़' में तमाम हस्त‍ियों ने शिरकत की. सांस्कृतिक नवजागरण: सिनेमा, स्पोर्ट्स और आर्ट्स विषय पर आयोजित सेशन में फिल्म स्टार अनुज शर्मा, एक्टर भगवान तिवारी और मुख्यमंत्री सचिवालय के ओएसडी विक्रम सिंह सिसोदिया ने अपनी बात रखी.

परदे पर अपने नकारात्मक किरदारों के लिए पहचाने जाने वाले भगवान तिवारी ने कहा- "मेरे आखिरी शो गुलाम में एक डायलॉग था- औरत के मायणे इतने कि तवे की रोटी ठंडी न हो और कुर्ते की कॉलर गंदी न हो". लेकिन ये एक काल्पनिक कहानी थी, समाज इसके पूरी तरह विपरीत है. समाज बदल रहा है. चूंकि, हम कलाकार हैं तो समाज के प्रति हमारी कुछ जिम्मेदारी भी है. छत्तीसगढ़ के प्रति मेरा एक भावनात्मक लगाव है."

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भगवान तिवारी ने कहा कि आर्ट को बढ़ावा देने के लिए सरकार को कुछ कदम जरूर उठाना चाहिए. जिन टीचर्स का आर्ट के प्रति रुझान हो, उन्हें स्कूल में जरूर रखना चाहिए, ताकि जिन बच्चों में जैसा गुण हो, उसे वैसा बनाया जा सके. देखिए, हर बच्चे को पढ़ाकर उसे जॉब नहीं दी जा सकती. उसे अपनी प्रतिभा के अनुसार करियर बनाना चाहिए.

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अनुज शर्मा ने अपनी अगली फिल्म दबंग दरोगा के गाने को गाकर एंट्री की. उन्होंने सफल होने के पीछे अपने संघर्ष पर बात करते हुए कहा- "मेरा मानना है कि ये तय है कि आपको जहां पहुंचना है, वहां पहुंचना है. किसी को ज्यादा चलना पड़ता है, तो किसी को कम. खुद पर भरोसे पर बहुत कुछ निर्भर करता है. मेरी पहली फिल्म और छत्तीसगढ़ राज्य का निर्माण एकसाथ हुआ. मैं इस पूरे सफर को करीब से देखते आया हूं. मेरा असली संघर्ष पहली फिल्म हिट होने के बाद शुरू हुआ. जब फिल्में हिट हुई तो चुनौतियां शुरू हुईं. आपकी कंसिस्टेंसी काफी मायने रखती है. 

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एयरपोर्ट पर प्रियंका चोपड़ा का हाथ थामे दिखे निक, US रवाना हुएअनुज शर्मा ने आगे कहा, "हम बहुत हद तक मुंबई के सिनेमा पर निर्भर थे. हमारा स्पॉट बॉय भी मुंबई से आता था. लेकिन हमारे अथक परिश्रम और जज्बे से छत्तीसगढ़ की इंडस्ट्री खड़ी हुई. यहां प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है. अभी लाइन से मेरी चार फिल्में आने वाली हैं. एक बढ़िया दौर आया है. हम इससे भी अच्छी जगह खड़े होते, यदि हमारे पास अच्छे शिक्षण संस्थान होते."

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