फिल्म इंडस्ट्री में सबसे वर्सेटाइल एक्टर्स में से एक नसीरुद्दीन शाह का जन्म 20 जुलाई, 1949 को बाराबंकी में हुआ था. नसीरुद्दीन ने फिल्म इंडस्ट्री और थियेटर को जो योगदान दिया है वो अविस्मरणीय है.
उन्होंने 80 के दशक में पैरेलल सिनेमा में शानदर रोल्स किए और चंद सालों में ही इंडस्ट्री के सबसे वर्सेटाइल एक्टर्स में से एक बन गए. उनका ये सफर अभी तक कायम है. आइए जानें नसीरुद्दीन का वो किस्सा जिसने एक्टिंग के प्रति उनकी रुची को बढ़ाया.
दरअसल बचपन में नसीरुद्दीन शाह शर्मीले स्वभाव के थे और उनकी लाइफ बहुत बोरिंग थी. वे पढ़ने में भी अच्छे नहीं थे. उन्होंने ''द अनुपम खेर शो- कुछ भी हो सकता है'' में ये किस्सा शेयर करते हुए बताया था कि बचपन में वे किसी भी चीज में अच्छे नहीं थे.
उन्हें केवल लिटरेचर में इंट्रेस्ट था. इसके अलावा उन्हें कोई भी सब्जेक्ट पल्ले नहीं पड़ता था. मगर उन्होंने जब जाॅफरी कैंडल का एक शो देखा तो वे उनके अभिनय से काफी प्रभावित हुए.
जॉफरी, शेक्सपीयर के एक शो पर काम कर रहे थे. इस दौरान उन्होंने बताया कि किस तरह से जॉफरी एक पल में ही रूप-रंग बदलते थे, ये देखना मेरे लिए बहुत रोचक होता था. यहीं से नसीर के मन में एक्टिंग करने के ख्याल ने दस्तक दी और उन्हें उनके अंदर का एक्टर दिखने लगा.
इसके बाद नसीरुद्दीन शाह ने एक्टर बनने की जद्दोजहद शुरू की. इस दौरान उन्होंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा और फिल्म एंड टेलिविजन इंस्टिट्यूट ऑफ इंडिया में तालीम हासिल की. इसके बाद वे कई सारी सुपरहिट फिल्मों का हिस्सा बने.
उन्होंने स्पर्श, पार, एलबर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है, जाने भी दो यारों, बाजार जैसी फिल्मों में काम किया. इसके अलावा वे 'ए वेडनेसडे', 'इश्किया' और 'फाइडिंग फैनी' में भी अपने अभिनय से सभी को प्रभावित करते नजर आ चुके हैं. उन्होंने एक कॉमेडियन, एक लीड एक्टर, एक विलेन और सपोर्टिव रोल में भी बखूबी काम किया है.