मुनमुन
सेन ने 1984 में बॉलीवुड फिल्म अंधेर बहार से अपने करियर की शुरुआत की.
उन्होंने प्रसिद्ध सस्पेंस थ्रिलर फिल्म सौ दिन में भी काम किया. इस फिल्म
में उन्होंने जैकी श्रॉफ और माधुरी दीक्षित के साथ स्क्रीन शेयर की.
1994 में ज़ख्मी दिल के बाद उन्होंने एक्टिंग से ब्रेक ले लिया. 2004 में थ्रिलर फिल्म कुछ तो है से फिल्म इंडस्ट्री में वापसी की. मुनमुन ने फेमस तेलुगु निर्देशक के.विश्वनाथ के साथ भी काम किया है.
एक्टिंग की
दुनिया में आने से पहले मुनमुन मॉडलिंग करती थी. उन्होंने कई टेलीविजन एड
भी किए हैं. हिंदी के अलावा, उन्होंने कुछ बंगाली फिल्मों और छोटे पर्दे पर
भी काम किया है.
उनके सबसे फेमस फिल्म 2004 में Korak Day’s My Karma थी. इस फिल्म की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना हुई थी.
मुनमुन को कई अवॉर्ड और पुरस्कार मिल चुके हैं जिसमें नंदी अवॉर्ड, क्रिटिक्स
काउंसिल ऑफ इंडिया अवॉर्ड, प्रोमोथेस बरुआ अवॉर्ड और वेस्ट बंगाल लाइफ टाइम
अवॉर्ड समेत कई सम्मान हासिल हो चुके हैं.
मुनमुन सेन ने अंदर
बाहर, युग पुरुष, शीशा, सौ दिन, जख्मी दिल, जाल, बाहर आने तक, निल निरजाने,
तेरे बिना क्या जीना, लेकिन, बारूद, प्यार की जीत, कुछ तो है, पत्थर के
निशान, वक्त का बादशाह, मंजू, इरादा और वो फिर आएगी जैसी फिल्मों में काम
किया है.
मुनमुन सेन ने 2014 में राजनीति में कदम रखा. सांसद चुने
जाने के वक्त मुनमुन सेन की आयु 64 साल थी. उन्होंने तृणमूल कांग्रेस
पार्टी ज्वॉइन की. नौ बार सांसद रहे CPM के नेता बसुदेव आचार्य को हराकर
मुनमुन ने बहुत सुर्खियां बटोरी थी.
पश्चिम बंगाल में चौथे चरण के
मतदान के दौरान हुई हिंसा पर मुनमुन सेन का बयान भी चर्चा में रहा.
मुनमुन ने कहा था- आसनसोल की हिंसा के बारे में उन्हें कोई जानकारी नहीं है,
क्योंकि बेड टी देर से मिलने की वजह से वह देर से सोकर उठी थीं.इस बयान की वजह से मुनमुन सेन की काफी आलोचना भी हुई थी.