पिछले कुछ समय में इंडियन सिनेमा में एक नई टर्म बहुत तेजी से चलन में आई है- पैन इंडिया. तेलुगू सिनेमा से निकली 'बाहुबली' फ्रैंचाइजी ने बाकी भाषाओं में जमकर कमाई की और यहीं से 'पैन इंडिया' पॉपुलर होने लगा. 'बाहुबली 2' तो 500 करोड़ रुपये से ज्यादा के कलेक्शन के साथ हिंदी में सबसे ज्यादा कमाने वाली फिल्म है. KGF 2, RRR, 'पुष्पा', 'पोन्नियिन सेल्वन- 1' और 'कांतारा' जैसी फिल्में अपनी ऑरिजिनल भाषा के अलावा हिंदी और दूसरी भाषाओं में भी जोरदार कमाई कर के पैन इंडिया हिट बन चुकी हैं. इन फिल्मों की कामयाबी ने प्रभास, यश, राम चरण, जूनियर एनटीआर और रिषभ शेट्टी जैसे कई साउथ स्टार्स को पैन इंडिया स्टार बना दिया.
'पैन इंडिया' टर्म भले अब ज्यादा पॉपुलर हुई हो, लेकिन 70 और 80 के दशक में इंडिया की कई फिल्मों और कलाकारों ने इसे खूब जिया है. रजनीकांत और कमल हासन जैसे कई बड़े नाम उस दौर से ही निकले जिनकी फिल्में साउथ की भाषाओं के अलावा हिंदी में भी खूब चलती थीं. मेल एक्टर्स का, भाषा की लिमिटेशन तोड़ कर अलग-अलग इंडस्ट्री में काम करना तो खूब चर्चा में आता है. लेकिन एक्ट्रेसेज हमेशा से दूसरी इंडस्ट्री में पहचान बनाने के मामले में बहुत एक्टिव रही हैं.
इसकी सबसे बड़ी मिसाल वैजयंतीमाला हैं जिन्होंने 1950 और 60 के दशक में तमिल तेलुगू और कन्नड़ के साथ-साथ हिंदी फिल्मो में भी खूब काम किया. साउथ की इंडस्ट्रीज और बॉलीवुड में एक साथ कामयाबी पाने वाली एक्ट्रेसेज में लोगों को हेमा मालिनी, रेखा, श्रीदेवी, रति अग्निहोत्री और ऐश्वर्या राय समेत कई बड़े नाम याद आते हैं. लेकिन एक एक्ट्रेस ऐसी हैं जिनका नाम लोगों को एकदम से नहीं याद आता- लक्ष्मी. आइए आपको बताते हैं लक्ष्मी के बारे में जिनकी पैन इंडिया अचीवमेंट शानदार हैं:
बहुत छोटी उम्र में शुरुआत और साउथ में कमाल
लक्ष्मी ने अपने करियर की शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट, तमिल फिल्म 'श्री वल्ली' (1961) से की थी. 13 दिसंबर 1952 में पैदा हुईं लक्ष्मी तब केवल 9 साल की थीं. हीरोइन के रोल में आने में भी उन्हें ज्यादा समय नहीं लगा. 16 की उम्र में उन्होंने तमिल फिल्म 'जीवनमसम' (Jeevanamsam, 1968) से उनका डेब्यू हुआ. इसी साल लक्ष्मी ने कन्नड़ में 'गोवादल्ली सीआईडी 999' (Goadalli CID 999) और 'बंधव्यालु' (Bandhavyalu) से तेलुगू में भी डेब्यू किया.
मलयालम में लक्ष्मी का डेब्यू 1974 में फिल्म 'चट्टाक्करी' से हुआ. ये पहली मलयालम फिल्म थी जो बैंगलोर के किसी थिएटर में 40 हफ्तों से ज्यादा चली थी. इसी के साथ अब वो साउथ की चारों बड़ी फिल्म इंडस्ट्री में बड़ा नाम बन चुकी थीं. लक्ष्मी की फिल्मों की लिस्ट देखने पर आपको पता चलेगा कि उनके पास काम की भरमार थी. डेब्यू के बाद अगले एक दशक में लक्ष्मी साउथ की चारों इंडस्ट्रीज में छा चुकी थीं और इनमें कई साल तो ऐसे थे जब उनकी 10 या उससे ज्यादा फिल्में रिलीज हुईं. इसे यूं समझें कि उस दौर में इंडिया के सबसे बड़े मेल स्टार्स के पास ही इतना काम हुआ करता था.
हिंदी में पहली ही फिल्म बनी कल्ट
साउथ में नाम बुलंद कर चुकीं लक्ष्मी ने 1975 में आई फिल्म 'जूली' से हिंदी डेब्यू किया. 'जूली' उनकी ही मलयालम फिल्म 'चट्टाक्करी' का हिंदी रीमेक थी. एक एंग्लो-इंडियन परिवार की ये कहानी अपने दौर से काफी आगे की मानी जाती है. क्रिटिक्स ने तो फिल्म और लक्ष्मी की जमकर तारीफ की ही, बॉक्स ऑफिस पर भी 'जूली' ब्लॉकबस्टर रही.
'जूली' 1975 की टॉप 10 हिंदी फिल्मों में शामिल थी, और ये वही साल था जब 'शोले' 'जय संतोषी मां' 'सन्यासी' और 'दीवार' जैसी धमाकेदार हिट फिल्में आई थीं. इस फिल्म के लिए लक्ष्मी को 'बेस्ट एक्ट्रेस' का फिल्मफेयर अवार्ड भी मिला. वैसे, 'जूली' को इसलिए भी याद किया जाता है कि एक और पैन इंडिया एक्ट्रेस श्रीदेवी को हिंदी दर्शकों ने इसी फिल्म से नोटिस किया था.
हिंदी में लक्ष्मी ने, अपने करियर के प्राइम पर गिनी चुनी 5 फिल्में कीं. लेकिन इन फिल्मों की कहानी बहुत हट के थी. 1979 में आई उनकी फिल्म 'आंगन की कली' उन गिनी चुनी हिंदी फिल्मों में से एक है जो एडॉप्शन पर बात करती हैं. उनकी आखिरी हिंदी फिल्म 'हलचल' 2004 में आई थी, जिसमें उन्होंने करीना कपूर की दादी का किरदार निभाया था. इस किरदार में भी जनता ने उन्हें बहुत पसंद किया था.
लक्ष्मी का पैन इंडिया कमाल
लक्ष्मी ने इंडिया की पांच बड़ी फिल्म इंडस्ट्रीज में काम किया- तमिल, तेलुगू, मलयालम, कन्नड़ और हिंदी. कमाल ये है कि उन्होंने इन पांचों भाषाओं में न सिर्फ बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं, बल्कि अपनी परफॉरमेंस से क्रिटिक्स का दिल भी जीता. लक्ष्मी अकेली ऐसी इंडियन एक्ट्रेस हैं जिन्हें साउथ की चारों भाषाओं में फिल्मफेयर अवार्ड मिला. इसमें 'जूली' को भी जोड़ दें तो अभी तक वो अकेली इंडियन एक्ट्रेस हैं जिन्होंने 5 भाषाओं की फिल्मों में फिल्मफेयर अवार्ड जीता है.
लक्ष्मी अकेली इंडियन एक्ट्रेस हैं जिन्हें साउथ के चारों राज्यों का 'बेस्ट एक्ट्रेस' अवार्ड (तब आंध्र प्रदेश और तेलंगाना अलग राज्य नहीं थे) और साथ ही नेशनल अवार्ड मिला है. लक्ष्मी ने 'बेस्ट एक्ट्रेस' कैटेगरी में आंध्र प्रदेश सरकार का नंदी अवार्ड 4 बार और कर्नाटक स्टेट अवार्ड 3 बार जीता है. जबकि तमिलनाडु और केरल में उन्हें एक-एक बार 'बेस्ट एक्ट्रेस' का स्टेट अवार्ड दिया गया है. लक्ष्मी को 1977 में उनकी तमिल फिल्म 'सिला नेरंगलिल सिला मणिथर्गल' (Sila Nerangalil Sila Manithargal) के लिए नेशनल अवार्ड मिला था. 'जूली' के लिए उन्हें बंगाल फिल्म जर्नलिस्ट्स अवार्ड भी दिया गया था.
लक्ष्मी अभी तक एक्टिंग में एक्टिव हैं और 2022 में ही उनकी कन्नड़ फिल्म 'त्रिकोण' रिलीज हुई है. 2021 में उन्हें अपनी तेलुगू फिल्म 'ओह बेबी!' के लिए 'बेस्ट एक्ट्रेस इन सपोर्टिंग रोल' का अवार्ड मिला है.
उनके बारे में एक बेहतरीन बात और बता दें, 5 भाषाओं में काम कर चुकीं लक्ष्मी ने हर भाषा में अपनी डबिंग खुद ही की है और वो किसी दूसरे से डबिंग करवाना पसंद नहीं करतीं. उम्मीद करते हैं कि लक्ष्मी के बारे में पढ़ने के बाद 'पैन इंडिया' की बातचीत में फिल्म फैन्स उनका नाम लेना कभी नहीं भूलेंगे.
सुबोध मिश्रा