सोनाक्षी सिन्हा फिल्म डबल एक्सएल को लेकर चर्चा में है. इस फिल्म के लिए सोनाक्षी ने लगभग 17 किलो वजन बढ़ाया था. सेट पर अक्सर खाते पीते शूटिंग करने के एक्सपीरियंस के साथ-साथ सोनाक्षी हमसे अपनी जर्नी पर भी चर्चा करती हैं.
स्क्रिप्ट के लिए कैसे राजी हुईं के सवाल पर सोनाक्षी कहती हैं, मुझे स्क्रिप्ट को पढ़ने के बाद किसी को कन्विन्स करने की जरूरत नहीं पड़ी थी. यह कहानी मेरे लिए काफी पर्सनल है. मैं बहुत कुछ इससे रिलेट कर पाती हूं. हम हुमा के लिविंग रूम में बैठे थे और वहीं से फिल्म का कॉन्सेप्ट डेवलप हुआ था. हम पांच से छ दोस्त बैठे थे. वहां हम अपने बढ़े वजन की कंपलेन कर रहे थे. लॉकडाउन में मेरा वजह काफी बढ़ गया था. मुदस्सर वहीं थे, उन्होंने कहा कि मैं इस पर फिल्म बनाने की सोच रहा हूं. चूंकि तुम दोनों इस फेज से गुजरे हो, तो तुमसे बेहतर इसमें कास्टिंग हो ही नहीं सकती थी. फिर क्या था, तीन महीने में स्क्रिप्ट रेडी हुई और नौ महीने में फिल्म की शूटिंग पूरी हो गई.
अपने किरदार से क्या टेकअवे है?
किरदार के टेकअवे पर सोनाक्षी कहती हैं, मुझे तो पता चल गया कि मैं एक किरदार के लिए किस हद तक की तैयारी कर सकती हूं. मेरे पूरे करियर में ऐसी फिल्म ऑफर नहीं हुई है. मैंने हमेशा यही सुना है कि सोना तुम वजन कम कर लो, ये करो-वो करो. यहां हम पर ऐसी कोई बंदिशे नहीं थे. मैं इन चीजों को अपने बचपन के ट्रॉमा के नजरिये से देखती हूं. फिल्मों आने से पहले मैंने वजन कम किया था लेकिन फिर भी हमेशा डर सताता था कि दोबारा मैं वापस वजन न बढ़ा लूं. मैंने जर्नी के दौरान अपना वजन कम ही किया है. लेकिन जब इस रोल के लिए मुझे वजन बढ़ाने को कहा गया, तो वो बचपन का ट्रॉमा कहीं न कहीं मेरे आड़े आ रहा था. फिर सोचा कि इतना अच्छा मेसेज है और पर्सनल भी है, तो क्यों न रिस्क लिया जाए. मैंने हिम्मत जुटाई और वजन बढ़ाया.
स्टारकिड्स को मिलती है ट्रेनिंग
स्टारकिड्स की ट्रेनिंग पर सोनाक्षी कहती हैं, बेटी होने के नाते इसका मतलब यह नहीं है कि मैं इंडस्ट्री के अंदर हूं और सबकुछ देखा हुआ है. मैं फिल्मों से अलग रहती थी. जो कुछ भी सीखा है, सेट पर ही सीखा है. मैं अपने काम से काम तक का मतलब रखती रही हूं. जब प्रमोशन का वक्त आता है, तो अपने बिल से निकलकर आती हूं. मैं घर के अंदर ही रहना पसंद करती हूं. मुझे ऐसे ही रहना पसंद है. मैं चाहती हूं कि लोग मेरे काम के बारे में ही बात करें और उतना तक ही जानें.
थिएटर को लेकर जो अनप्रेडिक्टिबिलिटी आई है, उससे डर लगता है. हां, नर्वसनेस तो होती है. क्योंकि चीजें बहुत ही अनिश्चित हो गई हैं. लेकिन हम अच्छे की उम्मीद कर सकते हैं. हम चाहते हैं कि हमारी फिल्म के जरिए जो मैसेज देने की कोशिश है, वो लोगों को पसंद आए.
कूल गैंग में शामिल होना जरूरी
फिल्म का कोई ऐसा सीन जो दिल के करीब रहा हो, पर सोनाक्षी कहती हैं, कॉलेज के दिनों में मैं फैशन डिजाइनर बनना चाहती थी. हालांकि मैं ऐसे माहौल में रही हूं, जहां लोग आपको लगातार एक फिक्स ढांचे में डालना चाहते हैं. कूल गैंग में आपको शामिल होना है, जहां लोग फैशन, बॉडी आदि के बारे में बात कर रहे हैं. मैं यह सब सुनते हुए ही बड़ी हुई हूं. शूटिंग के दौरान ऐसा लग रहा था कि मैं उन्हीं लम्हों को दोबारा जी रही हूं. एक सीन के दौरान मैं थोड़ी इमोशनल भी हो गई थी, मुझे याद है बचपन में जब मैं स्ट्रेस में होती थी, तो बहुत खाना खाती थी. यहां मेरा किरदार भी यही करता है. यह सीन करते हुए आंसू खुद ब खुद आ गए थे.
नेहा वर्मा