बॉलीवुड स्टार संजय दत्त की बेटी त्रिशाला दत्त ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरीज पर रिश्तों, सेल्फ-अवेयरनेस, इमोशनल रिस्पॉन्सिबिलिटी और पारस्परिकता (reciprocity) पर एक गहरा और सोचने लायक नोट शेयर किया है. सोशल मीडिया पर एक्टिव त्रिशाला अपनी पर्सनल और इमोशनल जर्नी को फैंस और फॉलोअर्स के साथ शेयर करती हैं. अब एक बार फिर उन्होंने अपने पोस्ट के जरिए बड़ी बात बयां की है.
त्रिशाला ने लिखी लंबी पोस्ट
त्रिशाला दत्त ने लिखा, 'तुम किसी और के लिए ग्रोथ नहीं कर सकते. और ये किसी को सजा देने या रिश्ता छोड़ने की बात नहीं है, बल्कि ये हकीकत है.' उन्होंने बताया कि जब एक व्यक्ति लगातार रिफ्लेक्शन से बचता है, जिम्मेदारी लेने से इनकार करता है, हानिकारक पैटर्न दोहराता है और बदलाव के लिए कोई असली कोशिश नहीं करता, तो वो रिश्ता प्यार नहीं रहता, बल्कि इमोशनली थकाने वाला बन जाता है.
उन्होंने आगे लिखा, 'तुम ही वो इंसान बन जाते हो जो झुकता है, समझाता है, रेगुलेट करता है, माफ करता है और ढलता है. जबकि वो वही रहते हैं. ये प्यार नहीं है. तुम्हें तभी रहना चाहिए जब समझ की पारस्परिकता हो, परफेक्शन की नहीं, स्पीड की नहीं, बल्कि मूवमेंट की.'
त्रिशाला ने लोगों से रिश्तों को निष्पक्ष तरीके से देखने की सलाह दी और कुछ सवाल पूछने को कहा. उन्होंने लिखा, 'पिछले 6-12 महीनों में, क्या इस व्यक्ति ने खुद की जांच-पड़ताल का कोई लगातार पैटर्न दिखाया है? क्या माफी के बाद उसके व्यवहार में बदलाव आया है? जब तुम पीछे हटते हो, तो क्या वो आगे बढ़ता है या तुम्हें सजा देता है? जब तुम बाउंड्री तय करते हो, तो क्या वो उनका सम्मान करता है या उन्हें रिजेक्शन के रूप में देखता है?'
अंत में उन्होंने लिखा, 'अगर जवाब ज्यादातर 'नहीं' है, तो आपका रुकना अब करुणा नहीं है. ये सीधे-सीधे अपनी थकान में हिस्सा लेना है और ये जिम्मेदारी आपकी है.' त्रिशाला ने ये भी कहा कि बार-बार इमोशनल नेग्लेक्ट सहते रहना करुणा नहीं, बल्कि अपनी खुद की डिप्लेशन यानी थकावट में भागीदारी है.
त्रिशाला दत्त, संजय दत्त और उनकी पहली पत्नी रिचा शर्मा की बेटी हैं. रिचा को 1989 में ब्रेन ट्यूमर हुआ था. 1996 में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया था. त्रिशाला की परवरिश यूएस में उनके नाना-नानी के पास हुई थी. वह बचपन से विदेश में रह रही हैं और प्रोफेशनल साइकोथेरेपिस्ट हैं.
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