इंडस्ट्री में जेंडर पे गैप पर बोलीं कोंकणा- 'हम बरसों से इसे सहते आ रहे हैं, आवाज उठाना जरूरी'

बॉलीवुड में जेंडर पे गैप एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है. इसके खिलाफ कई फीमेल एक्ट्रेस ने अपनी आवाज बुलंद भी की है. तापसी पन्नू, करीना कपूर खान के बाद अब कोंकणा सेन शर्मा ने भी इसपर अपनी राय रखी है.

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कोंकणा सेन शर्मा कोंकणा सेन शर्मा

नेहा वर्मा

  • मुंबई,
  • 30 अगस्त 2021,
  • अपडेटेड 7:07 PM IST
  • जेंडर पे गैप पर बोलीं कोंकणा सेन शर्मा
  • बरसों से सहते आ रहे हैं यह अन्याय
  • आवाज उठाने का वक्त आ गया है

फिल्मों में अपनी सशक्त अभिनय के लिए पहचानी जाने वालीं कोंकणा सेन शर्मा ने हमेशा से लीक से हटकर अपनी राहें चुनी हैं. फिल्मों की चॉइस हो या निजी जिंदगी के फैसले कोंकणा बाकि एक्ट्रेसेस से काफी अलहदा रही हैं. 

साथ ही कोंकणा बॉलीवुड इंडस्ट्री में एक्ट्रेसेज की मांगों को लेकर अपनी आवाज बुलंद करती रही हैं. पिछले दिनों ही फीमेल फीस मुद्दे पर कोंकणा ने अपनी राय रखी है.

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बराबरी की बात करते हैं, लेकिन सच्चाई कुछ और

जब कोंकणा से पूछा गया कि इंडस्ट्री में फीमेल एक्टर को मेल एक्टर की तुलना में मिलने वाली फीस पर उनकी क्या राय है. तो जवाब में कोंकणा कहती हैं, हम महिला और पुरुष की बराबरी की बात भले करते हैं, लेकिन सच्चाई तो कुछ और ही है. समाज में जेंडर पे गैप एक मुद्दा तो रहा है. यह केवल हमारे इंडस्ट्री तक की ही बात नहीं है, यह समस्या हर जगह है. महिलाओं को इसके लिए एकजुट होना होगा.

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बरसो से अन्याय सहते आ रहे हैं

कोंकणा आगे कहती हैं, केवल महिलाएं ही क्यों, मीडिया और जर्नलिस्ट को भी इस पर इनवेस्टिगेट करने की जरूरत है. ताकि हमारे साथ हो रहे इस भेदभाव का कोई समाधान निकलें. हम बरसों से इस अन्याय को सहते आ रहे हैं. यह सही नहीं है.आप ही देखें, बहुत सी ऐसी महिलाएं हैं, जो परिवार को चलाती हैं. इस अन्याय के खिलाफ आवाज उठनी जरूरी है, ताकि आगे चलकर ऐसी पॉलिसी बनाई जाए, जिससे हम महिलाओं को सहूलियत मिले. 

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जिम्मेदारियां ज्यादा, प्रीविलेज्ड कम 

हमारे समाज की सरंचना ही कुछ इस ढंग से की गई है कि हम महिलाओं को हर तरह की जिम्मेदारियां दे दी गई हैं लेकिन प्रीविलेज्ड काफी कम हैं. खासकर लोअर इनकम ग्रुप से आने वाली महिलाओं को ज्यादा भुगतना पड़ता है. 

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इसके अलावा एक और मुद्दा है कि महिलाओं को खासकर वर्किंग वूमेन को घर आने के बाद भी बच्चों की जिम्मेदारी और खाना बनाने की रिस्पॉन्सिबिलिटी दे दी जाती है. आप उन्हें डिक्टेट करने लगते हैं, जैसे कि उनका ही केवल कर्तव्य है, वहीं मर्द काम से आने के बाद आराम फरमाते हैं. ये कहां से इक्वालिटी वाली चीज हुई. हमें इन सब मुद्दों पर गहराई से देखना होगा और महिलाओं के हक के लिए आगे आना होगा. 

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