अक्षय कुमार बॉलीवुड के खिलाड़ी कहलाते हैं. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत एक एक्शन हीरो के रूप में की थी. लेकिन अब अक्षय एक देशभक्त के रूप में जाने जा रहे है. पिछले कुछ सालों में अक्षय बड़े पर्दे पर कई अनसुनी और अनजानी कहानियों को लेकर आए हैं, जिन्होंने लोगों को देशभक्ति की भावना देने के साथ-साथ उनकी आंखों को नम भी किया है. ऐसा ही कुछ वो अपनी नई फिल्म 'मिशन रानीगंज: द ग्रेट भारत रेस्क्यू' से भी किया है.
हाल ही में अक्षय कुमार ने इंडिया टुडे से बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने अपनी फिल्मों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संग अपने इंटरव्यू, इजरायल में चल रहे युद्ध और भारत-कनाडा के बीच मतभेद पर अपने विचार रखे. फिल्म 'मिशन रानीगंज' को लेकर अक्षय ने कहा, 'जसवंत सिंह गिल बहुत महान इंसान थे. उन्होंने इतने लोगों को बचाया. इस फिल्म के लिए मैंने कोयले की खदानों में शूटिंग की है. ये बहुत मुश्किल था.'
बातचीत एक दौरान अक्षय कुमार से कई सवाल पूछे गए. उनसे पूछा गया कि फिल्म 'मिशन रानीगंज' के नाम को द ग्रेट इंडियन रेस्क्यू को बदलकर द ग्रेट भारत रेस्क्यू किया गया है. इंडिया को भारत में बदलने का फैसला किसका था और क्यों लिया गया?
इसपर अक्षय ने जवाब दिया, 'प्रोड्यूसर ये करना चाहते थे और मुझे भी ये बात सही लगी थी. तो हमने ये किया. और अंत में भारत, इंडिया, हिंदुस्तान सब एक ही है. आपके पासपोर्ट पर भी दोनों लिखे हैं. तो इससे खास फर्क नहीं पड़ता. तो हमारे बीच आपसी सहमति हुई और हमने इसे बदल दिया.'
आज के समय में देश बदल रहा है. नया भारत बन रहा है. लोगों ने इसे उस नजरिए से देखा है.
अक्षय: देखिए आज जब आप अपनी खबरें पढ़ते हैं तो वो भी ट्रेंड के हिसाब से पढ़ते हैं. आप भी कुछ ऐसा नहीं पढ़ते जो ट्रेंड में नहीं है. सेम चीज है, प्रोड्यूसर ये चाहते थे. वो ट्रेंड के साथ रहना चाहते थे. तो उन्होंने ये किया.
पिछले कुछ सालों में जैसे रोल्स आप चुन रहे हैं जैसे मिशन रानीगंज, एयरलिफ्ट, वो काफी दिलचस्प हैं. कई अलग-अलग रोल्स आप चुन रहे हैं. क्यों?
अक्षय: मुझे ये पसंद है. मुझे फिल्में बनाना पसंद है. पहले मैं प्रोड्यूसर नहीं था. मेरे पास पैसे नहीं थे फिल्म बनाने के तो मैं दूसरों की दी फिल्में कर रहा था. मैंने खूब एक्शन फिल्में और कॉमेडी की. लेकिन जब से मैंने अपनी कंपनी केप ऑफ गुड फिल्म्स शुरू की है, मैं ऐसी फिल्में बना रहा हूं. मैं ऐसी फिल्में बनाता हूं क्योंकि ये मेरा तरीका है समाज को कुछ वापस देने का. मुझे लोगों को किसी असली चीज के बारे में बताने में मजा आता है. ऐसा नहीं है कि मैं किसी दूसरी फिल्म में काम नहीं करूंगा. मैं वेलकम 3 में काम कर रहा हूं, मैंने बड़े मियां छोटे मियां का शूट पूरा कर लिया है. लेकिन अगर आप पूछें तो मैं ऐसी फिल्में करना एन्जॉय करता हूं.
अक्षय आपको ऐसे एक्टर के रूप में जाना जाता है, जो असली दुनिया से भी जुड़ा है. आप असल जिंदगी की कहानी पर्दे पर दिखाते हैं. और ये भी साफ है कि जो भी आपके आसपास हो रहा है उसका असर आपके ऊपर पड़ता है. आपने एयरलिफ्ट जैसी बढ़िया फिल्म बनाई थी, जिसमें इंडियन रेस्क्यू को दिखाया गया, जिसके बारे में कम ही लोग जानते थे. अब हम देख रहे हैं इजरायल में क्या हो रहा है. क्या आप न्यूज देखते हैं? क्या आप इन चीजों को देखते हैं?
अक्षय: हां, मैं न्यूज देखता हूं. और किसी भी तरह का आतंकवाद कुबूल करने लायक नहीं है. मैं वीडियो देखता हूं और ये बहुत दुखद है, जो भी हो रहा है. मैं बस उम्मीद कर रहा हूं कि चीजें ठीक हो जाएं. ऐसी चीजें सही में दुनिया पर असर डालती हैं. और जो चीजें हो रही हैं, लोगों के परिवारों को जो झेलना पड़ रहा है, ये बेहद बुरा है.
भारत के आइडिया के बारे में फिर से बात करता हैं. पिछले समय में इंडिया ने कई उपलब्धियां पाई हैं. एक भारतीय के तौर पर, अब तो आप भारत के नागरिक भी हो गए हैं, आप अक्षय कुमार कैसे बदलते भारत को देखते हैं? क्या ये उस भारत से अलग है जो आपने एक बार देखा था?
अक्षय: हां, हां बिल्कुल. चीजें बहुत बदल रही हैं. और ये बदलाव अच्छे के लिए हो रहा है. बहुत सी पॉलिसी, इंफ्रास्ट्रक्चर, इकोनॉमी और डिफेंस, बजट, प्लेन, जेट्स और बाकी चीजें बदली हैं. विदेश जाओ तो भारत की रेप्युटेशन बहुत बेहतर हो गई है. अब मैं अपना भारतीय पासपोर्ट दिखाता हूं तो लोग गर्व के साथ उसे देखते हैं. अभी अमेरिका के न्यू जर्सी में एक बड़ा मंदिर खुला है. मैं उसकी तस्वीरें देख रहा था और वो बेहद खूबसूरत है.
आप दस्तावेजों के अलावा हर तरह से भारत के नागरिक थे. अब वो भी हो गया है. आपको कैसा लग रहा है? आप इसकी कोशिश काफी लंबे समय से कर रहे थे.
अक्षय: मैंने कोरोना काल की वजह से 2-3 साल गंवा दिए थे. ये कमाल की बात है कि इस साल 15 अगस्त के दिन मुझे अपनी भारत की नागरिकता मिली. मैं हमेशा से एक भारतीय था. मैंने हमेशा यहां टैक्स भरा है. हमेशा से यहां रहा हूं. कुछ नहीं यार, उस वक्त फिल्में नहीं चल रही थीं तो मैं कनाडा चला गया था. कई लोग, कई भारतीय वहां जाते हैं. ऑस्ट्रेलिया में रहो, कनाडा में रहो, अमेरिका में रहो... कहीं न कहीं लोग रहते हैं. बस इतनी सी बात से लोगों को दिक्कत थी. उनके कितने परिवारवाले बाहर जाकर रहते हैं. लेकिन फिर भी मैं हमेशा से भारतीय था. ये चीज लोगों को बुरी लग रही थी. मैं भी इससे परेशान रहा. मैंने समय लिया अपनी नागरिकता वापस लेने में.
आपको लोगों ने कनाडा कुमार कहा, ये सब सुनकर आपको कैसा लगा था? कैसा लगता था जब लोग आपका मजाक उड़ाते थे या फिर आपकी आलोचना करते थे?
अक्षय: इसका क्या ही जवाब दिया जाए. अब सोशल मीडिया का जमाना है. हर कोई कमेंट करता है. लेकिन ठीक है, मुझे मेरी नागरिकता वापस मिल गई है तो पॉजिटिव साइड की तरफ देखना चाहिए. बस इतना काफी है.
आपने पीएम मोदी का इंटरव्यू लिया था. आपने उनसे पूछा कि वो कैसे आम खाते हैं. इसपर आपकी काफी आलोचना हुई थी. आपने क्यों ऐसी चीजें उनसे पूछी?
अक्षय: मुझे लगा कि मुझे उनसे ये पूछना है. मैं उनकी ह्यूमन साइड को जानना चाहता था. मैं उनसे पूछना चाहता था कि वो अपनी घड़ी उल्टी क्यों पहनते हैं. मैं उनसे पूछना चाहता था कि उनके बैंक अकाउंट में कितने पैसे हैं. मैं उनसे पॉलिसी के बारे में नहीं पूछूंगा उसके लिए पत्रकार हैं. मैं क्यों पूछूं. मैं वो उनसे पूछूंगा, जो मैं चाहता हूं. इसलिए मैं वहां गया था. और आपको पता है कि प्रधानमंत्री के ऑफिस ने मुझे नहीं कहा कि आप ये चीजें उनसे नहीं पूछ सकते हैं. उन्होंने कहा आप यहां आए हैं ये आपका इंटरव्यू है. जो आपको पूछना है पूछो.
आपको लगता है उन्होंने मुझे इजाजत दी होगी ये पूछने कि वो अपने आम कैसे खाते हैं. मेरे हाथ में तो पेपर भी नहीं था. मैं बस गया और उनसे बात करता रहा. मैंने तो बल्कि उनको चुटकुला भी सुनाया है. और क्यों नहीं, वो एक इंसान हैं. वो हमारे प्रधानमंत्री हैं. पूरी इज्जत के साथ. मैं उनकी ह्यूमन साइड को जानना चाहता हूं. हमने वो साइड देखी है. हजारों इंटरव्यू आप लोगों के हैं. तो मुझे समझ नहीं आया. लोगों को इससे प्रॉब्लम थी. अंत में आप कुछ भी कर लो. कोई न कोई ऐसा होगा जिसको दिक्कत होगी.
क्या लोग अभी भी आपकी आलोचना करते हैं और कहते हैं कि आप सरकार के साथ हो गए हैं, आपने प्रधानमंत्री का इंटरव्यू लिया है.
अक्षय: मुझको बताइए किसको छोड़ते हैं. सबको पकड़कर रखते हैं. कोई इसके बारे में, आपके बारे में कुछ बोलते होंगे, मेरे बारे में कुछ बोलते होंगे. तो अब सबके पास कुछ न कुछ कहने को है. अब हमारे पास पावर है, हाथ में फोन है. हर कोई कुछ न कुछ बोलता है. अब ये आपके ऊपर निर्भर करता है कि आपको ये बातें कैसे लेनी हैं. अगर आप इसका असर खुद पर पड़ने देंगे तो इसमें आपका नुकसान है. मुझे लगता है कि मुझे बुरा भला कहने वाले लोगों को फर्क नहीं पड़ता. इसका कोई मतलब नहीं है मेरे लिए.
पिछले कुछ हफ्तों से हम कनाडा और भारत के रिश्ते पर दरार देख रहे हैं. खालिस्तान और हरदीप सिंह निज्जर... इन सबको आप कैसे देखते हैं? ये भारत और कनाडा के रिश्ते का काफी बुरा फेज है.
अक्षय: भारत का कनाडा से हमेशा ही अच्छा रिश्ता रहा है. लेकिन दुर्भाग्यवश इन सबकी वजह से चीजें खराब हैं. मैं बहुत सकारात्मकता में विश्वास रखने वाला रहा हूं. मैं बस उम्मीद और दुआ करता हूं कि चीजें सुलझ जाएं और ठीक हो जाएं , जैसी पहले थीं वैसी हो जाएं. मैं नकारात्मक साइड पर नहीं देखना चाहता कि क्या हो रहा है. लेकिन मैं चाहता हूं ये देखना कि क्या होगा आगे. मुझे लगता है कि सबकुछ नॉर्मल हो जाएगा और मैं इसी की दुआ भी करता हूं. मैं उन चीजों में विश्वास रखता हूं जिनमें प्रधानमंत्री रखते हैं.
मैं श्योर हूं कि उनके पास सही कारण होंगे जिनके चलते उन्होंने सभी निर्णय लिये. ऐसा ही होता है. जैसे क्रिकेट में आपने धोनी को अपना कैप्टन चुना है, तो वो जो भी निर्णय लेंगे उसी को आपको मानना है. इसी तरह टीम जीतती है. बहुत से लोग मुझे कहते हैं कि उन्होंने स्वच्छ भारत बनाया इसलिए आपने टॉयलेट एक प्रेम कथा फिल्म बनाई. वो मार्स पर लगे तो आपने मिशन मंगल बनाई, ऐसा नहीं है. मैंने एयरलिफ्ट भी बनाई है तब कॉन्ग्रेस का राज था. वो तो आप कोई बोले नहीं. इससे फर्क नहीं पड़ता कि कौन पावर में है. उस मोमेंट से फर्क पड़ता है.
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