चुनाव में नेताओं का विमर्श और भाषण गधे के स्तर पर उतर आया है. आज तक के मंच पर देश के तमाम बड़े मंचीय कवि इकट्ठा हुए, जिन्होंने गधों और राजनेताओं के तालमेल को अपनी कविताओं में पिरोकर श्रोताओँ के सामने रखा.
कवि तेज नारायण शर्मा कहते हैं कि कैसे यूपी चुनाव में गदहो की ब्रांडिंग कर उन्हें धारीदार जेब्रा बनाने की कोशिश हो रही है. कैसे राजनीति धुंआधार बल्लेबाजी कर रही है और देश फॉलोऑन खेलने के लिए मजबूर है. कैसे नाथूराम गोडसे स्कूल से ट्रेनिंग लिए छात्र चुनाव के दिनों में गांधी के मार्ग से होकर गुजरने लगते हैं.