...तो हवामहल से हार जाते महंत बालमुकुंद! सिर्फ 900 वोट से जीत पाए, 1400 वोट नोटा पर पड़े

राजस्थान में कुल ऐसी 13 सीटें हैं, जहां हारे हुए प्रत्याशियों का गणित नोटा ने बिगाड़ा है. इन सीटों पर प्रत्याशी जितने वोट से हारे हैं, उससे ज्यादा वोट नोटा में पड़े हैं. ऐसी ही सीट हवामहल है. यहां से बालमुकुंद आचार्य को 95989 वोट मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी तिवारी को 95015 वोट मिले. वहीं, नोटा के खाते में 1463 वोट पड़े.

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बालमुकुंद आचार्य बालमुकुंद आचार्य

aajtak.in

  • जयपुर ,
  • 06 दिसंबर 2023,
  • अपडेटेड 10:21 AM IST

जयपुर की हवामहल सीट से विधानसभा चुनाव जीतने के बाद बालमुकुंद आचार्य लगातार एक्शन मोड में हैं. कभी वे अपने समर्थकों के साथ नॉनवेज की दुकान बंद कराने पहुंच जाते हैं, तो कभी मुस्लिम समुदाय के साथ खड़े होकर सफाई देते दिख रहे हैं.

बालमुकुंद के इस एक्शन को लेकर सोशल मीडिया पर उनकी आलोचना और तारीफ दोनों हो रही हैं. बालमुकुंद ने हवामहल सीट से कांग्रेस के आर आर तिवारी को मात दी है. लेकिन खास बात ये है कि वे सिर्फ 974 वोट से जीते हैं. इससे ज्यादा वोट तो इस सीट पर नोटा (1463) को मिले हैं. 

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राजस्थान में कुल ऐसी 13 सीटें हैं, जहां हारे हुए प्रत्याशियों का गणित नोटा ने बिगाड़ा है. इन सीटों पर प्रत्याशी जितने वोट से हारे हैं, उससे ज्यादा वोट नोटा में पड़े हैं. ऐसी ही सीट हवामहल है. यहां से बालमुकुंद आचार्य को 95989 वोट मिले. जबकि कांग्रेस प्रत्याशी तिवारी को 95015 वोट मिले. वहीं, नोटा के खाते में 1463 वोट पड़े. बाबा बालमुकुंद 19 में से 18वें राउंड तक कांग्रेस उम्मीदवार से पीछे चल रहे थे. उनके समर्थकों ने भी आस छोड़ दी थी, लेकिन आखिरी राउंड के बाद वे 974 वोटों से जीत गए. बालमुकुंद आचार्य अखिल भारतीय संत समाज राजस्थान के प्रमुख हैं.

13 सीटों पर नोटा ने बिगाड़ा गणित

सीट नोटा हार-जीत का अंतर
नसीराबाद 1392 1135
कठूमर 738 409 
बांसवाड़ा 3528 1400
बायतू 2173 910
चौहटन 3901 1428
आसींद 2029 1526
जहाजपुर 2542 580
कोटपूतली 1344 321
हवामहल 1463 974
भीनमाल 4084 1027
जायल 2200   1565
खींसर 2130 2059
मावली 2411 1567

राजस्थान में बीजेपी को मिली जीत

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राजस्थान में बीजेपी को स्पष्ट बहुमत मिला है. राजस्थान में बीजेपी ने 115 सीटों पर जीत हासिल की है, जबकि कांग्रेस को 69 और अन्य को 15 सीटें मिलीं. राजस्थान की जनता ने हर 5 साल में सरकार बदलने के 30 साल पुराने रिवाज को कायम रखा है. 

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