Punjab Assembly Elections 2022: पंजाब में विधानसभा चुनाव के लिए अगले महीने यानी फरवरी में वोटिंग होनी है. जबकि परिणाम 10 मार्च को आएंगे. लेकिन विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों की लड़ाई चरम पर है. सभी वोटर्स को रिझाने में लगे हुए हैं. पार्टियों इन दिनों कोई कसर नहीं छोड़ना चाह रही हैं. ऐसे ही पंजाब के अमृतसर की 11 विधानसभा में से एक है बाबा बकाला विधानसभा. यहां चुनाव दिलचस्प रहेगा. मतदाता किसकी झोली में जीत की सौगात देंगे, ये तो 10 मार्च को पता चलेगा, लेकिन प्रत्याशी मतदाताओं को अपने खेमे में लाने के प्रयास में हैं. क्या हैं बाबा बकाला विधानसभा सीट के सियासी समीकरण.
राजनीतिक पृष्ठभूमि
इसी सीट को पहले ब्यास विधानसभा के नाम से जाना जाता था. वर्ष 1972 में यहां पहली बार विधानसभा चुनाव हुए. इसमें कांग्रेस ने जीत दर्ज की. कांग्रेस के सोहन सिंह ने अकाली दल के विहान सिंह को हराया था. लेकिन इस जीत की खुशी सिर्फ 5 सालों के लिए ही थी. 1977 में अकाली दल के जीवन सिंह ने सोहन सिंह को हराया. 1980 में दोबारा से अकाली दल के खाते में यह सीट आई. जीवन सिंह उमरानंगल ने कांग्रेस के गुरदयाल सिंह को 1500 वोट से हराया. 1985 में कांग्रेस ने फिर ये सीट पर चुनाव जीता. 1997 में अकाली दल के मनमोहन सिंह ने कांग्रेस के जसबीर सिंह से हराया.
2017 का जनादेश
2017 में यह सीट कांग्रेस की झोली में आई. कांग्रेस के उम्मीदवार संतोख सिंह ने आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार दलबीर सिंह को 6000 वोट से हराया. वर्तमान में बाबा बकाला विधानसभा से संतोख सिंह विधायक हैं. इससे पहले 2012 में अकाली दल के मंजीत सिंह मन्ना ने कांग्रेस के रंजीत सिंह को 30000 वोट से हराया था.
सामाजिक ताना-बाना
बाबा बकाला विधानसभा ग्रामीण एरिया है. इसकी खासियत है कि लोकसभा में यह क्षेत्र तरनतारन का हिस्सा है जबकि विधानसभा चुनाव में यह सीट अमृतसर के हिस्से में आती है. इस विधानसभा क्षेत्र में करीब 1,30,000 वोट हैं.
विधायक का रिपोर्ट कार्ड
गांव की टूटी सड़कें और बरसात के समय यहां जगह-जगह भरने वाला पानी लोगों के लिए बड़ी मुसीबत पैदा करता है. इस विधानसभा के लोगों का कहना है कि चुनावों में नेता बड़े-बड़े वादे तो करते हैं लेकिन वह चुनावों के बाद सिर्फ मुंह जुबानी तक ही सीमित रह जाते हैं, क्योंकि बाद में यहां कोई काम नहीं होता.
अमित शर्मा