महाराष्ट्र की 288 विधानसभा सीटों के नतीजे आ गए हैं. सांगली जिले के 8 विधानसभा सीटों पर 21 अक्टूबर को वोट डाले गए थे. पलूस-कड़ेगांव सीट से कांग्रेस के DR. KADAM PATANGRAO SHRIPATRAO भारी मतों से जीत दर्ज की है. 2011 जनगणना के मुताबिक, सांगली की आबादी 28.22 लाख से अधिक है. यहां औसत साक्षरता 81.48 के करीब है.
ये विधानसभा सीटें हैं
मिराज (एससी), सांगली, इस्लामपुर, शिरला, पलूस-कड़ेगांव, खानपुर, तसगांव-कवठे महाकाल, जाठ
मिराज
वोटरों की संख्या- 179884
2019 में किसे मिली जीत- बीजेपी के डॉ. सुरेश दगड़ू खड़े ने स्वाभिमानी पक्ष के बालासो दत्रात्रेय होनमोरे को 30398 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या-8
सांगली
वोटरों की संख्या- 188683
2019 में किसे मिली जीत- बीजेपी के धनंजय सुधीर हरि गाडगिल ने कांग्रेस के पृथ्वीराज गुलाबराव पाटिल को 6939 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या- 12
इस्लामपुर
वोटरों की संख्या- 250066
2019 में किसे मिली जीत- एनसीपी के जयंत राजाराम पाटिल ने नर्दलीय निशिकांत प्रकाश भोंसले पाटिल को 72169 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या- 9
शिरला
वोटरों की संख्या- 229278
2019 में किसे मिली जीत- एनसीपी के मानसिंह फतेहसिंह राव नायक ने भाजपा के शिवाजीराव यशवंतराव को 25931 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या- 10
खानपुर
वोटरों की संख्या- 216871
2019 में किसे मिली जीत- शिवसेना के अनिलभाऊ बावर ने निर्दलीय सदाशिव राव हनुमंत राव पाटिल को 26291 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या- 12
तसगांव-कवठे महाकाल
वोटरों की संख्या- 201272
2019 में किसे मिली जीत- एनसीपी की सुमनवाहिनी आर.आर पाटिल ने शिवसेना के अजितराव शंकरराव घोरपड़े को 62532 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या-6
जाठ
वोटरों की संख्या-175425
2019 में किसे मिली जीत- कांग्रेस के विक्रमसिंह बालासाहेब सावंत ने भाजपा के जगताप विलासराव नारायण को 34674 वोटों से हराया.
प्रत्याशियों की संख्या- 9
कभी कांग्रेस का गढ़ हुआ करता था सांगली जिला
सांगली शहर दक्षिण-पश्चिम भारत के पश्चिम एवं दक्षिण महाराष्ट्र राज्य में स्थित है. सांगली नगर पुणे-बंगलुरु रेलमार्ग पर कोल्हापुर के पूर्व में कृष्णा नदी के किनारे स्थित है. सांगली संस्थान के वर्तमान राजा विजय सिंह राजे पटवर्धन हैं. महाराष्ट्र की सांगली पहले मिरज सीट कहलाती थी लेकिन 1967 में इसका नाम सांगली लोकसभा सीट (सांगली लोकसभा मतदारसंघ) हो गया था. संभवत: सबसे लंबे समय तक यहां कांग्रेस ने लगातार शासन किया. 1962 से 2014 के बीच 52 सालों तक लगातार कांग्रेस का शासन रहा. यहां तक की आपातकाल के बाद जब कांग्रेस अपने बुरे दिनों में थी, तब भी यहां कांग्रेस का सांसद बना. कांग्रेस के तिलिस्म को मोदी लहर ने 2014 में तोड़ा था.
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