गाजीपुर लोकसभा सीट से बसपा उम्मीदवार उमेश सिंह ने सपा-बीजेपी के उम्मीदवारों को 'माफिया' करार दिया है. बहुजन समाज पार्टी ने गाजीपुर सीट से उनके नाम का आज ही ऐलान किया. इसके बाद उन्होंने कहा कि 'गाजीपुर जरूर कुछ दिन माफियाओं के चंगुल में रहा है. आज दोनों दलों के तरफ से माफिया है जो अपने आपको मसीहा कहते हैं. कोई नकली माफिया है, तो कोई असल में माफिया है.'
गाजीपुर लोकसभा का प्रत्याशी बनाए जाने के बाद डॉक्टर उमेश कुमार सिंह ने कहा कि गाजीपुर वीरों की धरती रही है, क्रान्तिकारियों का जिला रहा है. उन्होंने कहा कि इस नकली और असली माफिया से अब गजानन ही रक्षा करेंगे. उन्होंने कहा, "आज तो मैं प्रत्याशी घोषित हुआ हूं. अब आपको महसूस होगा कि बहुजन समाज पार्टी जिस प्रत्याशी की तलाश कर रही थी, वो मेरे पर आकर समाप्त हो गई हैं."
बीजेपी-सपा के उम्मीदवारों को बताया माफिया
उमेश सिंह ने कहा, "आज मैं सर्वे पदाधिकारियों और बहन कुमारी मायावती का तहे दिल से धन्यवाद करता हूं. गाजीपुर की जनता से आशीर्वाद मांगता हूं. आप जिसे खोज रहे थे वो आपके समक्ष आ गया है. कल से फिजा कुछ और होगी. उन्होंने सपा उम्मीदवार और मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी को निशाने पर लेते हुए कहा कि कुछ दिन पहले ही उनके द्वारा प्रचार कराया जा रहा था कि वे मसीहा हैं.
बसपा उम्मीदवार उमेश सिंह ने कहा, "आज मसीहा गायब हो गया और गरीब वहीं रह गया. हमने (बसपा) ने तो उन्हें नहीं भगाया. सांसद के पद से भी उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया और अपने आपको सांसद बताते हैं. अब तो जनता ही तय करेगी की नैतिकता भी कोई चीज है." उन्होंने बीजेपी और सपा दोनों प्रत्याशियों के खिलाफ कैंपेन शुरू करते हुए जीत का दावा भी किया है. इस सीट से बीजेपी ने पारसनाथ राय को उम्मीदवार बनाया है जो पेशे से शिक्षक हैं.
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कौन हैं उमेश कुमार सिंह?
गाजीपुर सीट से उमेश सिंह के नाम की घोषणा बसपा के मुख्य मंडल को-ऑर्डिनेटर विनोद बागड़ी ने एक कार्यक्रम में की. उमेश सिंह मूल रूप से गाजीपुर सैदपुर (सुरक्षित) विधानसभा के मुड़ीयार गांव के रहने वाले हैं. वह छात्र जीवन से ही राजनीति में सक्रिय हैं. उमेश सिंह काशी हिंदू विश्वविद्यालय से विज्ञान में स्नातक कर एलएलबी और एलएलएम करते हुए छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे. 1991-92 में वह बीएचयू के छात्र संघ महामंत्री चुने गए थे.
विनय कुमार सिंह