लोकसभा चुनाव 2019 के तहत राजस्थान की टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट को राज्य के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट का गढ़ कहा जाता है. बीजेपी उम्मीदवार सुखबीर जौनपुरिया ने निकटतम प्रतिद्वंदी कांग्रेस के नमोनारायण मीणा को 111291 से हरा दिया. भारतीय जनता पार्टी के सुखबीर जौनपुरिया को 644319 वोट मिले. वहीं कांग्रेस के नमोनारायण मीणा 533028 वोट मिले. बहुजन समाज पार्टी के लक्ष्मीकांत बैरवा 23301 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर हैं.
कब और कितनी हुई वोटिंग
टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट पर चौथे चरण (29 अप्रैल) के तहत वोटिंग हुई है. इस सीट पर कुल मतदान 63.21 फीसदी रिकॉर्ड दर्ज किया गया. इस संसदीय सीट पर 19,43,668 मतदाता हैं जिसमें 1021907 पुरुष और 921760 महिला मतदाता शामिल हैं. 19,43,668 मतदाताओं में से 1228509 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.
कौन-कौन हैं थे प्रमुख उम्मीदवार
टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट से 8 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और कांग्रेस के बीच रहा. बीजेपी ने एक बार फिर सुखबीर जौनपुरिया को चुनाव मैदान में उतारा. कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा को टिकट दिया. पिछली बार यहां से जौनपुरिया ने बीजेपी के टिकट पर जीत दर्ज की थी.
2014 का चुनाव
साल 2014 लोकसभा चुनाव में टोंक-सवाईमाधोपुर संसदीय सीट पर कुल 61 फीसदी मतदान हुआ था और कुल मिलाकर 22 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे. इसमें से बीजेपी को 52.6 फीसदी और कांग्रेस को 39.6 फीसदी वोट मिले थे. बीजेपी से सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने कांग्रेस से मोहम्मद अजहरुद्दीन को 1 लाख 35 हजार 311 मतों से पराजित किया था. इस चुनाव में जौनपुरिया को 5 लाख 48 हजार 179 और अजहरुद्दीन को 4 लाख 12 हजार 868 वोट मिले थे.
सामाजिक ताना-बाना
लोकसभा चुनाव से पहले यहां गुर्जरों ने आरक्षण की मांग को लेकर आंदोलन किया था. इसके बाद राज्य की नवगठित कांग्रेस सरकार को उनकी मांगें माननी पड़ी थी. राज्य का टोंक और सवाई माधोपुर जिला शुरू से ही गुर्जर-मीणा संघर्ष का गवाह रहा है. टोंक-सवाई माधोपुर लोकसभा सीट साल 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई.
यह संसदीय क्षेत्र टोंक जिले की 4 विधानसभा और सवाईमाधोपुर जिले की 4 विधानसभा क्षेत्रों से मिलकर बना है. यहां से वर्तमान में बीजेपी के सुखबीर सिंह जौनपुरिया सांसद हैं. इस सीट के अस्तित्व में आने के बाद साल 2009 में पहली बार लोकसभा चुनाव हुए. कांग्रेस के नमो नारायण मीणा और गुर्जर समाज के बड़े नेता कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के बीच मुकाबला देखने को मिला. हालांकि इस चुनाव में कांग्रेस के नमो नारायण मीणा ने जीत दर्ज की.
सीट का इतिहास
साल 2014 की मोदी लहर में कांग्रेस इस सीट को बचाने में नाकाम रही. टोंक-सवाई माधोपुर में हुए दूसरे लोकसभा में कांग्रेस ने अपने स्टार प्रचारक और यूपी से सांसद रहे पूर्व क्रिकेटर मोहम्मद अजहरुद्दीन को मैदान में उतारा था, तो बीजेपी ने भी चेहरा बदलते हुए गुर्जर उम्मीदवार के तौर पर सुखबीर सिंह जौनपुरिया पर दांव खेला था. पिछले लोकसभा चुनाव में जौनपुरिया ने अजहरुद्दीन को पटखनी दी थी और किरोणी लाल मीणा तीसरे स्थान पर रहे.
टोंक-सावाई माधोपुर की पहचान ऐतिहासिक नजरिए से सवाई माधोपुर के चलते अहम है. सवाई माधोपुर का इतिहास यहां के रणथम्भौर दुर्ग के ईर्द गिर्द ही घूमता है. तो वहीं रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान भी इसी क्षेत्र में आता है, जो पूरे भारत में अपने बाघों के लिए जाना जाता है. सवाई माधोपुर की स्थापना जयपुर के महाराजा सवाई माधो सिंह ने की थी. जयपुर राजघराने की राजकुमारी दियाकुमारी सवाई माधोपुर से विधायक भी रहीं.
साल 2011 की जनसंख्या के मुताबिक यहां की आबादी 27 लाख 56 हजार 877 है, जिसका 78.81 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 21.19 प्रतिशत हिस्सा शहरी है. इसके साथ ही कुल आबादी का 20.56 फीसदी अनुसूचित जाति और 16.83 फीसदी अनुसूचित जनजाति हैं. टोंक-सवाई माधोपुर सीट पर मुस्लिम, गुर्जर और मीणा समाज का अच्छा खासा प्रभाव है. इसके अलावा एससी, ब्राह्मण, माली और राजपूत समाज का भी अलग-अलग इलाकों में अपना प्रभाव है.
टोंक सवाई माधोपुर संसदीय सीट के अंतर्गत सवाई माधोपुर जिले की गंगापुर, बामनवास, सवाई माधोपुर, खंडर और टोंक जिले की मालपुरा, निवाई, टोंक और देवली-उनियारा विधानसभा शामिल हैं. हाल में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने यहां की 8 सीटों में से 6 सीट पर जीत का परचम लहराया था, जबकि गंगापुर सीट पर निर्दलीय और मालपुरा सीट पर बीजेपी की जीत हुई थी.
चुनाव की हर ख़बर मिलेगी सीधे आपके इनबॉक्स में. आम चुनाव की ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए सब्सक्राइब करें आजतक का इलेक्शन स्पेशल न्यूज़ लेटर
राहुल झारिया