कमल छोड़, हाथ थाम रहे आदिवासी, धार में मोदी की रैली से होगी वापसी?

मध्य प्रदेश में  दो दशक के बाद पहली बार आदिवासी वोट बैंक बीजेपी के हाथों से फिसला है. ऐसे में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा सीटों पर बीजेपी को कड़ी चुनौती मिल रही है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूबे के धार में रैली के जरिए आदिवासियों को साधने के लिए आज उतर रहे हैं.

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पीएम नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान (फोटो-PMO) पीएम नरेंद्र मोदी और शिवराज सिंह चौहान (फोटो-PMO)

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 05 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 2:51 PM IST

मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार से सबक लेते हुए भारतीय जनता पार्टी लोकसभा चुनाव से ऐन पहले अपने किले को दुरुस्त करने में जुट गई है. प्रदेश में  दो दशक के बाद पहली बार आदिवासी वोट बैंक बीजेपी के हाथों से फिसला है. ऐसे में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित लोकसभा सीटों पर बीजेपी को कड़ी चुनौती मिल रही है. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सूबे के धार में रैली के जरिए आदिवासियों को साधने के लिए आज उतर रहे हैं.

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एमपी में आदिवासी राजनीति

 मध्य प्रदेश में अनुसूचित जनजाति (एसटी) वर्ग की आबादी करीब 23 फीसदी है. प्रदेश की 29 लोकसभा सीटों में से छह सीटें अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हैं, जिनमें शहडोल, मंडला, बैतूल, खरगोन, धार और रतलाम शामिल है. 2014 के लोकसभा चुनाव में सभी छह सीटों पर बीजेपी को जीत मिली थी, लेकिन रतलाम सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने बीजेपी से ये सीट छीन ली.

बीजेपी से छिटक रहा आदिवासी

मध्य प्रदेश में आदिवासी मतदाता बीजेपी के परंपरागत वोटर माने जाते थे, लेकिन हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस इस वोटबैंक में सेंधमारी में कामयाब रही है. अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित सीटों पर बीजेपी को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. मध्य प्रदेश के मालवा से लेकर महाकौशल इलाके तक में बीजेपी को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा था. ऐसे में अगर यही वोटिंग पैटर्न रहा तो 2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिए अपने किले को संभाल पाना मुश्किल हो जाएगा.

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आदिवासियों के लिए आरक्षित सीट के समीकरण

 मंडला लोकसभा सीट के तहत 8 सीटें आती हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 6 और बीजेपी को 2 सीटें मिली थीं. जबकि 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी के फग्गन सिंह कुलस्ते ने जीत हासिल की थी. ऐसे ही रतलाम-झबुआ लोकसभा सीट के तहत 8 सीटें हैं, जिनमें कांग्रेस पांच और बीजेपी 3 सीटें जीतने में कामयाब रही थी. फिलहाल इस सीट पर कांग्रेस के कांतिलाल भूरिया सांसद हैं.

खरगोन लोकसभा सीट के तहत 8 सीटें है, जिनमें से कांग्रेस 6, बीजेपी एक और एक सीट पर निर्दलीय को जीत मिली थी. यहां बीजेपी से सुभाष पटेल सांसद हैं. ऐसे ही धार लोकसभा सीट के तहत आठ विधानसभा सीटें आती हैं, जिनमें से कांग्रेस 6 और बीजेपी दो सीटों पर जीती थी. बीजेपी की सावित्री ठाकुर मौजूदा समय में सांसद हैं. इस तरह से वोटिंग पैटर्न रहा तो बीजेपी के लिए खरगोन और धार सीट पर वापसी की राह मुश्किलों भरी नजर आ रही है.

बैतूल और शहडोल दो लोकसभा सीटें ऐसी हैं जिसके तहत आठ-आठ विधानसभा सीटें आती हैं. 2018 के विधानसभा चुनाव में दोनों संसदीय सीटों पर कांग्रेस-बीजेपी दोनों पार्टियां चार-चार सीटें जीतने में कामयाब रही हैं. बैतूल सीट से बीजेपी के ज्योति धुर्वे सासंद हैं और शहडोल सीट पर ज्ञान सिंह सिंह सांसद है.

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