हरियाणा ने भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र का मिजाज फिलहाल बदला नजर आ रहा है. 2014 में इस सीट पर जाट समुदाय के धर्मबीर सिंह ने बाजी मारी थी. धर्मबीर चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में शामिल हुए, और मोदी लहर में जीत दर्ज की. लेकिन उन्होंने 2019 में चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था. ऐसे में चुनौती बीजेपी के सामने है कि यहां से किसे मैदान में उतारा जाए. वहीं कांग्रेस की श्रुति चौधरी बाजी पलटने के लिए जुटी हैं. ऐन-ए-अकबारी में भिवानी शहर का उल्लेख किया गया है, और यह शहर मुगलों के काल से वाणिज्य का एक प्रमुख केंद्र रहा है.
2014 का जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में बीजेपी के धर्मबीर सिंह ने इंडियन नेशनल लोकदल के बहादुर सिंह को 1,29,394 वोटों से हराया था. बीजेपी उम्मीदवार को मोदी लहर में 39.26 फीसदी वोट शेयर के साथ 4,04,542 वोट मिले थे, जबकि INLD के बहादुर सिंह को 26.70 फीसदी वोट के साथ 2,75,148 वोट पड़े थे. वहीं कांग्रेसी की श्रुति चौधरी को 2,68,115 वोट मिला था.
2009 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की श्रुति चौधरी ने जीत हासिल की थी. उन्होंने INLD के उम्मीदवार अजय सिंह चौटाला को हराया था. श्रुति चौधरी को कुल 3,02,817 वोट मिले थे, जबकि अजय सिंह चौटाला को 2,47,240 वोट पड़े थे.
2014 के चुनाव के अनुसार भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा के अंदर के कुल 12,12,513 वोटर्स हैं, जिसमें 6,46,450 पुरुष और 5,66,063 महिला वोटर्स हैं. पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान यहां पर कुल 1388 पोलिंग स्टेशन बनाए गए थे.
सामाजिक ताना-बाना
भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा सीट में भिवानी, दादरी, बादड़ा, तौशाम, लोहारु, अटेली, महेंद्रगढ़, नारनौल और नांगल चौधरी समेत 9 विधानसभा क्षेत्र हैं. इनमें से पांच विधानसभा क्षेत्र- लोहारू, बाढ़ड़ा, दादरी, भिवानी और तोषाम जिला भिवानी के अंतर्गत आते हैं, जबकि 4 विधानसभा क्षेत्र- अटेली, महेंद्रगढ़, नारनैल और नांगल चौधरी महेंद्रगढ़ में आते हैं. भिवानी जिले के पांचों विधानसभा क्षेत्र जाट बहुल मतदाताओं वाली सीटें हैं, वहीं महेंद्रगढ़ जिले के चारों विधानसभा क्षेत्र में यादव मतदाताओं की ज्यादा संख्या है.
जातिगत समीकरणों के हिसाब से भिवानी-महेंद्रगढ़ लोकसभा क्षेत्र में सबसे अधिक संख्या जाट मतदाताओं की है. यहां करीब 3,60,000 जाट वोटर्स हैं. दूसरी सबसे अधिक जबकि यादव (अहीर) की वोटर्स की संख्या करीब 2,60,000 है. वहीं यहां 1,34,000 ब्राह्मण वोटर्स भी हैं.
खास आंकड़े
2008 से पहले भिवानी और महेंद्रगढ़ दो अलग-अलग लोकसभा सीटें थीं, लेकिन 2008 में हुए परीसिमन में कुछ इलाकों को काटकर अलग कर दिया गया और बाकी बचे इलाकों को मिलाकर एक नई सीट (भिवानी-महेंद्रगढ़) का गठन कर दिया गया. 1952 से लेकर 2008 तक इस सीट का कोई अस्तित्व नहीं था. पहली बार 2009 के चुनावों में यह सीट वजूद में आई थी.
पुरानी भिवानी लोकसभा सीट 1977 में वजूद में आई थी. पहली बार जनता पार्टी की चंद्रावती ने इस सीट पर बंसीलाल जैसे दिग्गज कांग्रेसी को हराया. लेकिन इसके बाद 1980 और 1984 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के बंसीलाल ने लगातार जीत दर्ज की. 1999 में यहां से INLD के अजय चौटाला और 2004 में कांग्रेस के कुलदीप बिश्नोई ने बाजी मारी. साल 2008 में इस सीट का अस्तित्व खत्म कर दिया गया.
सांसद का रिपोर्ट कार्ड
63 साल के धर्मबीर सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस छोड़कर बीजेपी में आए थे. उन्होंने 16वीं लोकसभा के दौरान संसद में 10 डिबेट में हिस्सा लिया और एक बार प्राइवेट मेंबर बिल भी सदन के पटल पर रखा. जबकि बीजेपी सांसद ने अब तक अपने कार्यकाल के दौरान लोकसभा में कुल 70 सवाल पूछे.
अमित कुमार दुबे