गाजियाबाद लोकसभा सीट: क्या 2014 जैसी जीत दोहरा पाएंगे वीके सिंह?

Ghaziabad Loksabha constituency 2019 का लोकसभा चुनाव अपने आप में ऐतिहासिक होने जा रहा है. लोकसभा सीटों के लिहाज से सबसे बड़ा प्रदेश उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद लोकसभा सीट क्यों है खास, इस लेख में पढ़ें...

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जनरल वीके सिंह जनरल वीके सिंह

मोहित ग्रोवर

  • नई दिल्ली,
  • 04 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 5:07 PM IST

देश की राजधानी दिल्ली से सटी उत्तर प्रदेश की गाजियाबाद लोकसभा सीट अभी भारतीय जनता पार्टी के पास है. इस सीट पर दो ही बार लोकसभा चुनाव हुए हैं और दोनों ही बार ये सीट बीजेपी के खाते में गई है. गाजियाबाद लोकसभा सीट की गिनती प्रदेश की वीआईपी सीटों में होती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश के सेंटर के तौर पर भी गाजियाबाद सीट अहम मानी जाती है. पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह अभी इस सीट से सांसद हैं.

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गाजियाबाद लोकसभा सीट का इतिहास

गाजियाबाद लोकसभा सीट काफी नई है. अभी तक यहां पर दो बार ही चुनाव हुआ है पहला 2009 और फिर 2014. ये सीट 2008 में हुए परिसीमन के बाद ही अस्तित्व में आई. पहली बार 2009 में जब यहां से चुनाव हुए तो मौजूदा केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के अध्यक्ष रह चुके राजनाथ सिंह ने यहां से बड़े अंतर से चुनाव जीता था. लेकिन 2014 में राजनाथ सिंह लखनऊ चले गए और ये सीट वीके सिंह को मिली. हालांकि, चुनाव से पहले वीके सिंह को टिकट दिए जाने का काफी विरोध हुआ था.

गाजियाबाद लोकसभा सीट का समीकरण

वोटरों की संख्या के हिसाब से देखें तो गाजियाबाद प्रदेश की बड़ी लोकसभा सीटों में से गिनी जाती है. 2014 में यहां करीब 23 लाख से अधिक वोटर थे, इनमें 13 लाख पुरुष और 10 लाख महिला वोटर रहीं. 2014 में यहां पर 56 फीसदी ही मतदान हुआ था. इनमें 6000 से अधिक वोट NOTA में डाले गए थे. आपको बता दें कि गाजियाबाद में मुस्लिम जनसंख्या भी 25 फीसदी से अधिक है, ऐसे में मुस्लिम वोटरों का भी काफी गहरा प्रभाव है.

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गाजियाबाद लोकसभा के अंतर्गत आने वाली विधानसभा सीटें

गाजियाबाद लोकसभा क्षेत्र में कुल 5 विधानसभा सीटें आती हैं. इसमें लोनी, मुरादनगर, साहिबाबाद, गाजियाबाद और धोलाना जैसी सीटें शामिल हैं. 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में इनमें से सिर्फ धोलाना सीट बहुजन समाज पार्टी के खाते में गई थी, जबकि अन्य सभी 4 सीटों पर भारतीय जनता पार्टी का कब्जा था.

2014 में मोदी लहर ने किया विरोधियों का काम-तमाम

पिछले लोकसभा चुनाव में इस सीट पर मोदी लहर ने विरोधियों को बिखेर दिया था. सेना से रिटायर होकर भारतीय जनता पार्टी में आए जनरल वीके सिंह ने इस सीट पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से किस्मत आजमाई तो उन्हें आधी से अधिक वोट मिली. वीके सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार रहे राजबब्बर को करीब 5 लाख से भी अधिक वोटों से हराया था.

2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे

जनरल वीके सिंह, भारतीय जनता पार्टी, कुल वोट मिले 758,482, 56.5%

राज बब्बर, कांग्रेस, कुल वोट मिले 191,222, 14.2%

मुकुल, बहुजन समाज पार्टी, कुल वोट मिले 173,085, 12.9%

सांसद वीके सिंह का प्रोफाइल

सेना प्रमुख रह चुके वीके सिंह ने 2014 में लोकसभा चुनाव से पहले ही भारतीय जनता पार्टी में एंट्री मारी थी. 2010 से लेकर 2012 तक वह सेना प्रमुख रहे, हालांकि यूपीए सरकार के आखिरी दिनों में उनकी उम्र को लेकर काफी बड़ा विवाद छिड़ा था. 2014 में गाजियाबाद से बड़ी जीत हासिल करने का ईनाम वीके सिंह को केंद्र सरकार में मंत्री बनकर मिला.

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2014 से ही वह विदेश राज्य मंत्री के पद पर हैं, सीरिया-इराक जैसे देशों में मुश्किल समय में भारतीयों को निकालने में वीके सिंह ने काफी अहम भूमिका निभाई थी. मंत्री पद पर रहने के बाद वीके सिंह अपने बयानों के कारण चर्चा में रहे थे, मीडिया को लेकर उन्होंने कई बार अभद्र टिप्पणी भी की है. ADR की रिपोर्ट के मुताबिक, वीके सिंह के पास 4 करोड़ से अधिक की संपत्ति है.

संसद में वीके सिंह का प्रदर्शन

बतौर विदेश राज्य मंत्री तो वीके सिंह के काम की कई बार तारीफ हुई है. अगर 16वीं लोकसभा में उनके प्रदर्शन को देखें तो उन्होंने 40 से अधिक बहस में हिस्सा लिया है. सांसद निधि के तहत मिलने वाले 25 करोड़ रुपये के फंड में से उन्होंने कुल 85 फीसदी रकम खर्च की.

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