दिनेश शर्मा: प्रोफेसर, मेयर और अब डिप्टी CM की कुर्सी पर काबिज

लखनऊ यूनिवर्सिटी के कॉमर्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर रहे दिनेश शर्मा दो बार लखनऊ के मेयर रह चुके हैं. वह 2008 में पहली बार लखनऊ के मेयर चुने गए और 2012 में फिर मेयर बने. 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद बीजेपी ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया और साथ ही गुजरात का प्रभारी भी नियुक्त किया.

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यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा

सना जैदी

  • नई दिल्ली,
  • 20 मार्च 2019,
  • अपडेटेड 3:21 PM IST

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री यानी डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा भारतीय जनता पार्टी के सदस्य और अटल बिहारी वाजपेयी के करीबी रहे हैं. दिनेश शर्मा का जन्म 12 जनवरी 1964 को लखनऊ में हुआ. दिनेश शर्मा का एक प्रोफेसर के पद से राजनीति तक पहुंचने का सफर काफी दिलचस्प रहा है.

लखनऊ यूनिवर्सिटी के कॉमर्स डिपार्टमेंट में प्रोफेसर रहे दिनेश शर्मा दो बार लखनऊ के मेयर रह चुके हैं. वह 2008 में पहली बार लखनऊ के मेयर चुने गए और 2012 में फिर मेयर बने. 2014 में केंद्र में एनडीए की सरकार बनने के बाद बीजेपी ने उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया और साथ ही गुजरात का प्रभारी भी नियुक्त किया.

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दिनेश शर्मा अटल बिहारी वाजपेयी के काफी करीबी रहे हैं, बताया जाता है कि अटल बिहारी वाजपेयी ने 2006 में अपना आखिरी भाषण भी दिनेश शर्मा को चुनाव जिताने के लिए ही दिया था. दिनेश शर्मा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के भी भरोसेमंद नेता हैं. 2017 में उत्तर प्रदेश में बीजेपी के नेतृत्व में योगी आदित्यनाथ की सरकार बनी तो दिनेश शर्मा उपमुख्यमंत्री बने. उत्तर प्रदेश की राजनीति में पहली बार ऐसे हुए जब दो डिप्टी सीएम नियुक्त किए गए. इनमें एक केशव प्रसाद मौर्य तो दूसरे उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा बने.

लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा भले ही 2014 से पहले भले ही ज्यादा चर्चा में नहीं रहे लेकिन कहीं ना कहीं उन्हें अमित शाह और नरेंद्र मोदी से अच्छे संबंधों का फायदा जरूर मिला है. बताया जाता है कि दिनेश शर्मा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के भी पसंदीदा रहे हैं.

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डिप्टी सीएम बनने के बाद आए चर्चा में

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा अपने अटपटे बयान को लेकर 2018 में खूब चर्चा बटौरी. दिनेश शर्मा ने मथुरा में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा था कि सीता जी का जन्म मिट्टी के बर्तन से हुआ था, यानी उस समय भी टेस्ट ट्यूब से बच्चे पैदा करने का कॉन्सेप्ट था. दिनेश शर्मा ने कहा था कि सीता जी भी टेस्ट ट्यूब बेबी हो सकती हैं. उन्होंने कहा था कि रामायण के समय में टेस्ट ट्यूब बेबी की तकनीक रही होगी.

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