पन्ना कमेटी, फोन कॉल, वेरिफिकेशन टीम...BJP ने ऐसे जीता कर्नाटक

उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतने के साथ ही बीजेपी आलाकमान ने कर्नाटक में कमल खिलाने के लिए कमर कस ली थी. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नेताओं की एक बड़ी फौज कर्नाटक में उतारी. मोदी कैबिनेट के 30 मंत्रियों समेत 55 सांसदों को पहले 4-4 विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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बीजेपी कार्यकर्ता जीत का जश्न मनाते हुए बीजेपी कार्यकर्ता जीत का जश्न मनाते हुए

कुबूल अहमद

  • नई दिल्ली,
  • 16 मई 2018,
  • अपडेटेड 1:29 PM IST

कर्नाटक का किला बीजेपी ने फतह कर लिया है. कांग्रेस के इस सबसे मजबूत गढ़ को बीजेपी ने अपने माइक्रो मैनेजमेंट और चुनावी रणनीति से धराशायी कर दिया. बीजेपी बहुमत के जादुई आंकड़े से भले ही 8 सीटें दूर रह गई लेकिन उसका 104 सीटों तक पहुंचना  पिछले एक साल की मेहनत और सधी हुई रणनीति का नतीजा है.

उत्तर प्रदेश का चुनाव जीतने के साथ ही बीजेपी आलाकमान ने कर्नाटक में कमल खिलाने के लिए कमर कस ली थी. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने नेताओं की एक बड़ी फौज कर्नाटक में उतारी. मोदी कैबिनेट के 30 मंत्रियों समेत 55 सांसदों को पहले 4-4 विधानसभा क्षेत्र की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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बीजेपी के पन्ना प्रमुख का कॉन्सेप्ट शाह ने ही ईजाद किया था. कर्नाटक में पन्ना प्रमुख के साथ पहली बार पन्ना कमेटी भी बनाई गई. इसके तहत वोटर लिस्ट के उसी पन्ने से 2-3 वोटर छांट कर अपने साथ जोड़े. इस तरह हर विधानसभा में पार्टी ने 15 से 22 हजार पन्ना कार्यकर्ताओं की फौज खड़ी की और 10 लाख से ज्यादा प्रतिबद्ध मतदाताओं को अपने साथ जोड़ा.

कर्नाटक में बीजेपी की जीत का आधार इसी रणनीति ने तैयार किया. सिद्धारमैया की सरकार के खिलाफ माहौल बनाने के लिए पन्ना प्रमुख से लेकर पन्ना कमेटियों ने जमकर प्रचार किया. पार्टी ने महिला, युवा, किसान, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यक समेत सभी 8 मोर्चों को सक्रिय करते हुए हर गांव में घर-घर जनसंपर्क की जिम्मेदारी इनको सौंपी थी.

पन्ना कमेटी के लोगों ने एक दिन में एक ही गांव में एक घंटे के अंतराल पर जनसंपर्क अभियान चलाया. एक दिन में 8 बार जनसंपर्क की रणनीति ने बीजेपी को सिद्धारमैया के मुकाबले में सबसे ऊपर ला दिया. कांग्रेस ये काम नहीं कर सकी. कांग्रेस सिर्फ सोशल मीडिया पर ही संघर्ष करती रह गई. जबकि रात दिन बीजेपी के कार्यकर्ता इसी मिशन में लगे रहे.  

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कर्नाटक की सभी सीटों का आकलन कर अलग-अलग सीटों को 2 से 4 हिस्सों में बांटा गया. ज्यादातर विधानसभा सीटों को चार हिस्सों में बांटा गया. राज्य की हर विधानसभा में मतदाताओं को साधने के लिए बीजेपी ने 4 नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी. ये प्रभारी रोजाना बूथ कार्यकर्ताओं से पार्टी उम्मीदवार की रिपोर्ट हासिल करते. इतना ही नहीं ये प्रभारी उम्मीदवार के चुनावी कार्यक्रम से लेकर पार्टी के बड़े नेताओं की रैलियों में उन्हें पहुंचाने और फिर उसका फीडबैक लेने का भी काम करते.

बीजेपी ने मिस्ड कॉल से पार्टी के सदस्य बने लोगों से कॉल सेंटर के जरिए सीधा संपर्क किया. जिन वोटरों से फोन पर बात नहीं होती थी, उनसे प्रत्यक्ष संपर्क के लिए 10-10 लोगों की वेरिफिकेशन टीम बनाई गई. हर विधानसभा में ये व्यवस्था रखी.

कर्नाटक के करीब 50 हजार बूथों को 3 हिस्सों में बांटा गया. बूथ कमेटी, शक्ति केंद्र, महाशक्ति केंद्र में बांटकर काम किया. हर बूथ पर 5 से 7 लोगों की कमेटी बनाई गई थी. 5-7 बूथों को मिलाकर एक शक्ति केंद्र और 5 शक्ति केंद्र मिलाकर एक महाशक्ति केंद्र बनाया गया. राज्य बीजेपी इकाई को रणनीतिक मामलों से दूर रखकर सिर्फ प्रचार अभियान में लगाया गया. बीजेपी उम्मीदवारों के चयन में भी शाह ने अपने सर्वेक्षणों को ही प्राथमिकता दी.

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