धूमल को CM पद के लिए आगे कर BJP ने जीत तय कर ली: भारद्वाज

भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह की कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के दौरान वादों को पूरा नहीं कर सकी है. लिहाजा, पूरे राज्य में उनके खिलाफ एंटीइन्कंबेंसी का माहौल है लिहाजा राज्य में इस बार बीजेपी की सरकार बनना तय है.

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हिमाचल में कांग्रेस को बाहर कर जनता बनाएगी बीजेपी सरकार हिमाचल में कांग्रेस को बाहर कर जनता बनाएगी बीजेपी सरकार

राहुल मिश्र

  • शिमला,
  • 03 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 6:17 PM IST

पंचायत आजतक हिमाचल प्रदेश के अहम सत्र चुनाव की चुनौती में बीजेपी के हिमाचल इकाई के अध्यक्ष सुरेश भारद्वाज ने शिरकत की. इस सत्र का संचालन पुण्य प्रसून वाजपेयी ने किया. भारद्वाज ने कहा कि पार्टी ने प्रेम कुमार धूमल को मुख्यमंत्री पद के लिए आगे किया. पार्टी के इस ऐलान से पहले भी धूमल राज्य में पार्टी का नेतृत्व कर रहे थे.

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भारद्वाज ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में वीरभद्र सिंह की कांग्रेस सरकार अपने कार्यकाल के दौरान वादों को पूरा नहीं कर सकी है. लिहाजा, पूरे राज्य में उनके खिलाफ एंटीइन्कंबेंसी का माहौल है लिहाजा राज्य में इस बार बीजेपी की सरकार बनना तय है.

नौकरी का वादा नहीं हुआ पूरा

भारद्वाज ने कहा कि राज्य में कांग्रेस ने 10 लाख लोगों को नौकरी देने का वादा किया था लेकिन 5 साल के दौरान यह आंकड़ा एक लाख तक नहीं पहुंचा. इसके चलते राज्य के मौजूदा चुनावों में बेरोजगारी बड़ा मुद्दा है. भरद्वाज ने कहा कि आम जनता उसे सत्ता में बैठाती है जिसपर उन्हें भरोसा रहता है. इसी के चलते राज्य में 6 बार कांग्रेस सरकार रहने के बावजूद वह कभी भी लगातार दो बार चुनाव जीतने में नाकामयाब रहे हैं.

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कहां से आता है उम्मीदवारों के पास चुनाव फंड

राज्य में चुनाव खर्च की प्रति उम्मीदवार की 28 लाख रुपये की सीमा के आधार पर एक विधानसभा में करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. लिहाजा, कैसे राज्यों के चुनावों में इतना फंड आता है? क्या एक आम आदमी इसीलिए चुनाव प्रक्रिया के बाहर रहता है?

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सुरेश भारद्वाज ने कहा कि मौजूदा चुनावों में मैदान में कूदने के लिए पैसा अहम कड़ी है. लिहाजा, देश में चुनाव सुधार एक बड़ी जरूरत है जिससे महज पैसे के दम पर कोई व्यक्ति उम्मीदवार न बनने पाए. हालांकि भरद्वाज ने कहा कि मौजूदा समय में चुनावों में कुछ अच्छाई देखने को मिलती है.

अब चुनावों में पहले की तरह पेपर पोस्टर का इस्तेमाल नहीं होता. इससे न सिर्फ चुनावी खर्च पर दबाव कम हुआ है बल्कि कागज के इस्तेमाल पर भी रोक लगी है और शहरों की दिवारें भी साफ रहती है. भरद्वाज ने कहा कि भ्रष्टाचार के लिए राजनीति की भी जिम्मेदारी है. राजनीति में बड़ा नेता बनने के बाद विधायकों और सांसदों पर अलगे चुनाव का खर्च कमाने का भी दबाव देखने को मिलता है.

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