Alamnagar Election Results 2020: JDU के नरेंद्र नारायण की जीत, RJD की बुरी हार

Alamnagar Election Results, Alamnagar Vidhan Sabha seat Counting 2020: आलमनगर विधानसभा सीट पर तीसरे चरण के मतदान के तहत 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी. कुल 62.11% फीसदी वोटरों ने इस चुनाव में हिस्सा लिया था. यह विधानसभा सीट बेहद, चर्चित सीटों में से एक है.

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Alamnagar Election Results 2020: Bihar Alamnagar Election Results 2020: Bihar

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 10 नवंबर 2020,
  • अपडेटेड 1:48 AM IST
  • नरेंद्र नारायण का गढ़ है अलमनगर
  • नीतीश सरकार में मंत्री हैं नरेंद्र
  • एक बार फिर लहराया जीत का परचम

आलम नगर विधानसभा सीट पर राष्ट्रीय लोकतांत्रिक गठबंधन(एनडीए) के घटक दल जनता दल(यूनाइटेड) प्रत्याशी नरेंद्र नारायण यादव ने जीत दर्ज की है. उन्होंने महागठबंधन के घटक दल राष्ट्रीय जनता दल(आरजेडी) प्रत्याशी नबीन कुमार को भारी मतों पराजित किया है. दोनों प्रत्याशियों के बीज जीत का अंतर 28,680 है. बीजेपी को कुल 48.17 फीसदी तो वहीं कांग्रेस को 34.69 फीसदी लोगों का साथ मिला.

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नरेंद्र नारायण यादव को 1,02,517 वोट पड़े, वहीं नबीन कुमार को 73,837 मतदाताओं का साथ मिला. इस विधानसभा सीट से तीसरे नंबर पर लोक जनशक्ति पार्टी रही, जिसके उम्मीदवार सुनीला देवी को 9,287 वोट हासिल हुए. जन अधिकार पार्टी(लोकतांत्रिक) के सर्वेश्वर प्रसाद सिंह को 8,466 वोट मिले. वहीं नोटा का विकल्प 4,595 लोगों ने चुना. इस सीट से कुल 10 लोग चुनावी समर में रहे.

 

आलमनगर सीट का नतीजा


62.11 फीसदी पड़े वोट

आलमनगर विधानसभा सीट पर तीसरे चरण के मतदान के तहत 7 नवंबर को वोटिंग हुई थी. कुल 62.11% फीसदी वोटरों ने इस चुनाव में हिस्सा लिया था. यह विधानसभा सीट बेहद, चर्चित सीटों में से एक है.

जन अधिकारी पार्टी (जेएपी) के मुखिया पप्पू यादव के प्रभाव वाला जिला मधेपुरा की आलमनगर विधानसभा सीट पर कभी कांग्रेस का प्रभुत्व रहा है. साल 1995 से ही इस सीट पर जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) का कब्जा है. जेडीयू के नरेंद्र नारायण यादव आलमनगर से लगातार पांच पर सूबे की विधानसभा पहुंच चुके हैं. एक बार फिर उन्हें जनता ने चुन लिया है.

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कौन-कौन रहे सामने?

प्रदेश की नीतीश सरकार में लघु सिंचाई और कानून मंत्री नरेंद्र नारायण के सामने लगातार छठी बार तीर को विजयश्री दिलाने की चुनौती थी. कोसी क्षेत्र से पूर्व बिहार को जोड़ने वाले पुल का निर्माण 'मधेपुरा के अजातशत्रु' कहे जाने वाले नरेंद्र नारायण की सबसे बड़ी उपलब्धि मानी जाती है. वे साल 1995 से लगातार चुनावी जीत दर्ज करते आ रहे हैं. एक बार फिर उन्होंने बंपर जीत हासिल की है.

नरेंद्र नारायण यादव को इस बार विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के नबीन कुमार के साथ ही पप्पू यादव की पार्टी के उम्मीदवार सर्वेश्वर प्रसाद सिंह की कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा. लेकिन अंतिम चरण की वोटिंग में वे सब पर भारी पड़ गए. इस सीट से 10 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे, जो परास्त हो गए. हालांकि, आलमनगर विधानसभा सीट के चुनावी अतीत पर नजर डालें तो निर्दलीय उम्मीदवार भी कड़ी टक्कर देते रहे हैं.

साल 1951 में इस सीट के लिए पहले चुनाव में गैर कांग्रेसी तनुक लाल यादव विजयी रहे थे. लेकिन इसके बाद साल 1957 से 1972 के बीच पांच चुनाव में लगातार यहां कांग्रेस का परचम लहराया. इन पांच में से दो बार यदुनंदन झा और विद्याकर कवि तीन बार विधायक निर्वाचित हुए. कांग्रेस का विजय रथ साल 1977 के विधानसभा चुनाव में वीरेंद्र कुमार सिंह ने रोका.

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वीरेंद्र कुमार सिंह साल 1990 में भी आरजेडी के टिकट पर विधायक चुने गए. साल 1995 के चुनाव में नरेंद्र नारायण यादव पहली बार विधायक चुने गए. तब उन्हें किसी दल के उम्मीदवार नहीं, एक निर्दलीय से कड़ी टक्कर मिली थी. साल 2005 के विधानसभा चुनाव में भी निर्दलीय चंदेश्वरी सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे. हालांकि, 2015 के पिछले चुनाव में लोक जनशक्ति पार्टी के चंदन सिंह दूसरे स्थान पर रहे थे.

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पुरुष वोटर्स की संख्या अधिक

आलमनगर विधानसभा क्षेत्र में पुरुष मतदाताओं की संख्या अधिक है. इस विधानसभा क्षेत्र में 52.34 फीसदी पुरुष वोटर्स हैं, जबकि 47.66 फीसदी महिला मतदाता हैं. पिछले विधानसभा चुनाव में आलमनगर के 1 लाख 92 हजार 339 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था.

सीएम पद की रेस में थे

नरेंद्र नारायण यादव का नाम साल 2014 में नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद मुख्यमंत्री पद की रेस में भी शामिल था. लेकिन ऐन वक्त पर नीतीश कुमार ने जीतनराम मांझी को मुख्यमंत्री बना दिया था. मधेपुरा जिले के पुरैनी प्रखंड के बालाटोल निवासी नरेंद्र नारायण यादव साल 2005 में पहली बार मंत्री बने थे. तब उन्हें ग्रामीण विकास विभाग की जिम्मेदारी दी गई थी. इस सीट के लिए तीसरे और अंतिम चरण में 7 नवंबर को वोट डाले गए. आलमनगर विधानसभा क्षेत्र के 62.11 फीसदी वोटर्स ने अपने मताधिकार का उपयोग किया.

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