तिरुचेंदूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 215) तमिलनाडु के दक्षिणी हिस्से में स्थित थूथुक्कुडी जिले का एक तटीय और अर्ध-शहरी क्षेत्र है, जो मन्नार की खाड़ी के किनारे बसा हुआ है. यह क्षेत्र ऐतिहासिक तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो राज्यभर से श्रद्धालुओं को आकर्षित करने वाला एक प्रमुख तीर्थ स्थल है. तिरुचेंदूर की सामाजिक-आर्थिक संरचना में
तटीय मछुआरा बस्तियां, कृषि-प्रधान ग्रामीण इलाके और छोटे कस्बाई व्यापारिक केंद्र शामिल हैं. यहां की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, मत्स्य पालन, पशुपालन, व्यापार और मंदिर आधारित गतिविधियों पर निर्भर है.
राजनीतिक रूप से, इस सीट का प्रतिनिधित्व डीएमके की अनिता राधाकृष्णन वर्ष 2006 से कर रही हैं. वे मूल रूप से एआईएडीएमके से जुड़ी थीं, लेकिन 2009 में डीएमके में शामिल होने के बाद से लगातार चुनाव जीतती आ रही हैं.
भौगोलिक दृष्टि से, तिरुचेंदूर में तटीय बस्तियां, टैंक-आधारित सिंचाई क्षेत्र और शुष्क खेती वाले इलाके शामिल हैं. धान, मोटे अनाज, दलहन, पशुपालन और मछली पकड़ना यहां की आजीविका के प्रमुख साधन हैं. कृषि के लिए मौसमी जल उपलब्धता और सिंचाई टैंकों का रखरखाव अत्यंत महत्वपूर्ण है, जबकि तटीय समुदाय समुद्री संसाधनों पर निर्भर हैं. सड़क संपर्क तिरुचेंदूर को थूथुक्कुडी, विलाथिकुलम और सत्तानकुलम से जोड़ता है, हालांकि अंदरूनी इलाकों की सड़कें कमजोर स्थिति में हैं. सार्वजनिक परिवहन की अनियमितता छात्रों, महिलाओं और बुज़ुर्गों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है.
इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में तिरुचेंदूर मुरुगन मंदिर और नगर बाजार, मनापाड़ समुद्र तट, तटीय गांव, प्रमुख सिंचाई टैंक, पंचायत और ग्रामीण सड़कें, स्कूल, अस्पताल और सरकारी कार्यालय शामिल हैं.
तिरुचेंदूर के मुख्य मुद्दों में अनियमित सिंचाई और मानसून पर निर्भरता, खेती और मत्स्य पालन की बढ़ती लागत, खराब आंतरिक सड़कें, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, युवाओं में बेरोजगारी और पलायन, अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन, पीने के पानी की समस्या, कल्याणकारी योजनाओं में देरी तथा तटीय कटाव और मत्स्य उद्योग से जुड़ी चुनौतियाँ शामिल हैं.
मतदाता मनोवृत्ति की बात करें तो किसान सुनिश्चित सिंचाई और उचित खरीद मूल्य की मांग करते हैं. मछुआरे आजीविका सुरक्षा और सब्सिडी को प्राथमिकता देते हैं. मजदूर वर्ग स्थिर मजदूरी और कल्याण योजनाओं की निरंतरता चाहता है. युवा शिक्षा और रोजगार के अवसरों पर जोर देते हैं, जबकि महिलाएं स्वास्थ्य, पेयजल और सुरक्षा को प्राथमिक मानती हैं. बुज़ुर्ग मतदाता पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन सुविधाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं. कुल मिलाकर, मतदाता अब केवल पार्टी निष्ठा के बजाय प्रतिनिधियों की पहुंच, कार्यक्षमता और सेवा-प्रदान को अधिक महत्व दे रहे हैं.