श्रीवैकुंठम विधानसभा क्षेत्र (संख्या 216) तमिलनाडु के थूथुक्कुडी जिले में स्थित एक प्रमुख ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्र है, जिसकी अर्थव्यवस्था मजबूत कृषि आधार और तटीय प्रभाव से जुड़ी हुई है. यह क्षेत्र सांस्कृतिक रूप से समृद्ध है, जहां मंदिर, स्थानीय त्योहार और धार्मिक संस्थान सामुदायिक जीवन में अहम भूमिका निभाते हैं. यहां के प्रमुख धार्मिक
स्थलों में श्री श्रीवैकुंठनाथन पेरुमल मंदिर और श्री कैलासनाथर मंदिर (शनि स्थली) शामिल हैं. इसके अलावा, यह क्षेत्र स्वतंत्रता सेनानी वीरपांडिया कट्टाबोम्मन को समर्पित ऐतिहासिक पंचालंकुरिची स्मारक किला के लिए भी जाना जाता है.
श्रीवैकुंठम की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि, पशुपालन और छोटे स्तर के व्यापार पर आधारित है, जबकि तटीय गांवों में मत्स्य पालन और समुद्री संसाधन आजीविका का प्रमुख साधन हैं. यहां का मतदाता वर्ग किसानों, कृषि मजदूरों, मछुआरों, छोटे व्यापारियों और कस्बाई निवासियों से मिलकर बना है. मतदान व्यवहार जाति और समुदाय नेटवर्क, प्रत्याशी की उपलब्धता और शिकायत निवारण की क्षमता से प्रभावित होता है. जहां शहरी इलाकों में पार्टी पहचान का असर दिखता है, वहीं ग्रामीण और तटीय क्षेत्रों में मतदाता ठोस विकास, भरोसेमंद कल्याणकारी योजनाओं और सक्रिय स्थानीय नेतृत्व को प्राथमिकता देते हैं.
सड़क संपर्क श्रीवैकुंठम को थूथुक्कुडी, तिरुचेंदूर और विलाथिकुलम से जोड़ता है, लेकिन कई ग्रामीण अंदरूनी सड़कें अब भी अविकसित हैं. सार्वजनिक परिवहन सीमित है, जिससे महिलाओं, छात्रों और बुज़ुर्गों को विशेष कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है.
इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में श्रीवैकुंठम नगर बाजार, तटीय मछुआरा गांव, प्रमुख सिंचाई टैंक और नहरें, पंचायत यूनियन और ग्रामीण सड़कें, स्कूल, अस्पताल, सरकारी कार्यालय तथा धार्मिक और सांस्कृतिक स्थल शामिल हैं.
श्रीवैकुंठम की मुख्य समस्याओं में अनियमित सिंचाई जल आपूर्ति, कृषि और मत्स्य पालन की बढ़ती लागत, खराब आंतरिक सड़कें, गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाओं की कमी, युवाओं में बेरोजगारी और पलायन, अपर्याप्त सार्वजनिक परिवहन, शुष्क और तटीय इलाकों में पेयजल संकट, कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी, धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर स्थलों का रखरखाव तथा तटीय कटाव से मत्स्य उद्योग पर पड़ता प्रभाव शामिल है.
मतदाता मनोवृत्ति के अनुसार, किसान सुनिश्चित सिंचाई, और उचित फसल मूल्य चाहते हैं. मछुआरे आजीविका सुरक्षा, सब्सिडी और तटीय बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देते हैं. कृषि मजदूर स्थिर मजदूरी और कल्याण योजनाओं की निरंतरता की अपेक्षा रखते हैं. युवा शिक्षा, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों की मांग करते हैं. महिलाएं स्वास्थ्य, पेयजल और सुरक्षा को अहम मानती हैं, जबकि बुज़ुर्ग मतदाता पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और परिवहन सुविधाओं को महत्व देते हैं. कुल मिलाकर, यहां के मतदाता भी पार्टी निष्ठा से अधिक प्रतिनिधियों की सुलभता, समस्या समाधान की क्षमता और विकास कार्यों के आधार पर अपना निर्णय लेते हैं.