शोझिंगनल्लूर विधानसभा क्षेत्र (संख्या 27) चेन्नई की ओल्ड महाबलीपुरम रोड (OMR) आईटी कॉरिडोर पर स्थित है. यह क्षेत्र तेजी से शहरीकरण की ओर बढ़ रहा है, जहां तकनीक आधारित विकास, बड़े पैमाने पर रिहायशी विस्तार और बुनियादी ढांचे पर बढ़ता दबाव साफ दिखाई देता है.
यह चेन्नई की सबसे बड़ी विधानसभा क्षेत्रों में से एक है, जिसका गठन 2008 में
परिसीमन के बाद हुआ था. कभी यह इलाका छोटे-छोटे अर्ध-ग्रामीण गांवों का समूह था, लेकिन आज शोलिंगनल्लूर पेरुंगुडी, थोराइपक्कम, नवलूर और सिरुसेरी को जोड़ने वाला एक अहम आईटी और रिहायशी केंद्र बन चुका है. इसी वजह से यह चेन्नई का सबसे तेजी से बदलने वाला और राजनीतिक रूप से सक्रिय क्षेत्र माना जाता है.
अन्य पारंपरिक शहरी सीटों से अलग, शोझिंगनल्लूर की राजनीति विकास प्रबंधन पर टिकी हुई है. यहां आईटी सेक्टर से हो रहे आर्थिक विकास के साथ-साथ पानी, ड्रेनेज, सड़क और यातायात जैसी बुनियादी सुविधाओं को संतुलित करना सबसे बड़ी चुनौती है. इस क्षेत्र के मतदाता आधुनिक सोच रखते हैं, लेकिन उनकी अपेक्षाएँ बहुत ज़्यादा और स्पष्ट हैं.
शोझिंगनल्लूर में मतदाताओं का स्वरूप काफी विविध है. यहां आईटी पेशेवर, बड़े अपार्टमेंट्स में रहने वाले लोग, दूसरे राज्यों से आए प्रवासी, निर्माण और सेवा क्षेत्र के मजदूर, पुराने गांवों के निवासी, तटीय इलाकों के मछुआरे और सरकारी योजनाओं के लाभार्थी शामिल हैं. नए रिहायशी इलाकों में जातिगत प्रभाव कम है, लेकिन पुराने गांवों में यह अब भी दिखाई देता है.
हालांकि यहां चौड़ी मुख्य सड़कें हैं, फिर भी पीक ऑवर में भारी ट्रैफिक जाम आम समस्या है. बरसात के मौसम में जलभराव और बाढ़ से ड्रेनेज की कमजोरियां और प्राकृतिक जलमार्गों पर अतिक्रमण उजागर हो जाता है.
इस क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में मानसून के दौरान जलभराव, मेट्रो निर्माण के कारण खराब और गड्ढों से भरी सड़कें, अपर्याप्त स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज, ओएमआर और उससे जुड़ी सड़कों पर ट्रैफिक जाम, पीने के पानी की कमी और टैंकरों पर निर्भरता शामिल है. टैंकर सप्लाई पर कथित तौर पर राजनीतिक संरक्षण प्राप्त माफियाओं का नियंत्रण भी एक गंभीर मुद्दा है. इसके अलावा सीवेज ओवरफ्लो, कचरा प्रबंधन की समस्या, आखिरी छोर तक सड़क कनेक्टिविटी की कमी, जल निकायों और दलदली इलाकों पर अतिक्रमण, तथा सरकारी अस्पतालों और स्कूलों की कमी भी लोगों को परेशान करती है.
फिलहाल शोझिंगनल्लूर में मतदाता मौजूदा प्रतिनिधि और राज्य सरकार के कामकाज पर करीबी नजर रखे हुए हैं. लोगों में किए गए कार्यों की पहचान तो है, लेकिन साथ ही वे विकल्पों के प्रति भी सतर्क रुचि दिखा रहे हैं. आने वाले चुनावों में यह इस बात पर निर्भर करेगा कि राजनीतिक दल शहरी समस्याओं को कितनी गंभीरता से उठाते हैं और अपने अभियान को किस तरह आगे बढ़ाते हैं.