पोन्नेरी विधानसभा क्षेत्र (क्रमांक 002) तिरुवल्लूर जिले के उत्तरी हिस्से में स्थित है और तमिलनाडु के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण व तेजी से बदलते इलाकों में गिना जाता है. चेन्नई के करीब होने के बावजूद यह क्षेत्र आज भी अपनी मजबूत ग्रामीण पहचान बनाए हुए है. यहां कृषि, बढ़ता शहरीकरण और फैलती औद्योगिक गतिविधियां एक साथ देखने को मिलती हैं. कभी धान के
खेतों, झीलों और बुनकर समुदायों के लिए पहचाने जाने वाला पोन्नेरी अब उत्तरी चेन्नई के विकास की कहानी का अहम केंद्र बन चुका है, जिसे नई सड़क परियोजनाओं, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स हब ने आकार दिया है.
राजनीतिक और सामाजिक रूप से पोन्नेरी की एक अलग पहचान है. यहां ग्रामीण मतदाताओं, मछुआरा समुदायों, पारंपरिक बुनकरों और उभरते अर्ध-शहरी मध्यम वर्ग का मिश्रण देखने को मिलता है. एन्नोर बंदरगाह, मनाली औद्योगिक क्षेत्र और प्रमुख मालवाहक मार्गों के पास होने के कारण यहां के मतदाता रोजगार के अवसरों, बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों से खास तौर पर प्रभावित रहते हैं. सामाजिक गठजोड़, जातीय समीकरण और स्थापित राजनीतिक निष्ठाएं इस क्षेत्र में चुनावी नतीजों को बेहद करीबी बनाती हैं, जहां छोटे बदलाव भी बड़ा असर डालते हैं.
भौगोलिक रूप से यह विधानसभा क्षेत्र जल संसाधनों से समृद्ध है. पुजल झील, रेड हिल्स का जलग्रहण क्षेत्र और अनेक सिंचाई टैंक गांवों में कृषि को सहारा देते हैं. एन्नोर-पुलिकट तटीय पट्टी यहां की जलवायु, आजीविका और आवागमन को प्रभावित करती है. चेन्नई-पोन्नेरी-पांचेत्ती (सीपीपी) रोड और राष्ट्रीय राजमार्ग-16 क्षेत्र की प्रमुख परिवहन कड़ियां हैं, जो ग्रामीण इलाकों को उत्तरी चेन्नई के औद्योगिक क्षेत्रों से जोड़ती हैं. रेड हिल्स, मिंजूर और शोलावरम के आसपास के इलाके धीरे-धीरे उपनगरीय रूप ले रहे हैं.
पोन्नेरी विधानसभा क्षेत्र में मिंजूर, पोन्नेरी कस्बा, देवदानम, कावरापेट्टई, अनुपमपट्टु, तिरुपलईवनम और एन्नोर-पुलिकट बेल्ट के कई पंचायत क्षेत्र शामिल हैं. हर इलाके की प्राथमिकताएं अलग हैं- मछुआरा क्षेत्रों में आजीविका की सुरक्षा और तटीय संरक्षण अहम मुद्दे हैं, कृषि प्रधान गांवों में सिंचाई और झील प्रबंधन पर जोर दिया जाता है, जबकि उपनगरीय इलाकों में बेहतर सड़कें, स्कूल और स्वास्थ्य सेवाओं की मांग रहती है.
इस क्षेत्र के प्रमुख केंद्रों में मिंजूर बाजार, पुजल झील और रेड हिल्स जलग्रहण क्षेत्र, अनुपमपट्टु रेलवे स्टेशन, पोन्नेरी बस स्टैंड, कावरापेट्टई औद्योगिक पट्टी, तिरुपलईवनम का तटीय इलाका, पुलिकट पक्षी अभयारण्य क्षेत्र और उत्तरी चेन्नई का तापीय व औद्योगिक प्रभाव क्षेत्र शामिल हैं.
पोन्नेरी के सामने कई अहम चुनौतियां हैं. बाहरी गांवों में पानी की कमी, एन्नोर-मनाली औद्योगिक पट्टी से होने वाला प्रदूषण, पंचायत क्षेत्रों में सड़कों की खराब स्थिति, तटीय कटाव से मछुआरों की आजीविका पर संकट, सरकारी अस्पतालों के उन्नयन में देरी, अधिक सरकारी स्कूलों और छात्रावासों की आवश्यकता, ग्रामीण युवाओं में बेरोजगारी और आवास योजनाओं की धीमी प्रगति जैसे मुद्दे यहां प्रमुख हैं.
कुल मिलाकर पोन्नेरी एक ऐसा विधानसभा क्षेत्र है जहां ग्रामीण और अर्ध-शहरी स्वरूप का मिश्रण है. मछुआरे, किसान और औद्योगिक श्रमिकों की बड़ी आबादी यहां रहती है. मतदाताओं का ध्यान मुख्य रूप से जल सुरक्षा, रोजगार और सड़कों पर केंद्रित रहता है. जातीय समीकरण चुनावी अंतर को प्रभावित करते हैं और कई स्विंग क्षेत्रों में पार्टी के प्रतीक से ज्यादा उम्मीदवार का प्रदर्शन मायने रखता है. इसी वजह से पोन्नेरी को एक कठिन और बेहद कड़ी प्रतिस्पर्धा वाला विधानसभा क्षेत्र माना जाता है.