राष्ट्रीय शिक्षा नीति: NTA को मिले ये अधिकार, एंट्रेंस टेस्ट में हुए बदलाव

मोदी सरकारी की ओर से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) जारी कर दी गई है. जानिए इस नीति में नेशनल टेंस्टिंग एंजेंसी यानी NTA के लिए क्या- क्या बदलाव हुए हैं. यहां पढ़ें.

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प्रतीकात्मक फोटो प्रतीकात्मक फोटो

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 29 जुलाई 2020,
  • अपडेटेड 11:48 PM IST

नरेंद्र मोदी सरकार की ओर से बुधवार को जारी की नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुसार, नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (National Education Policy, NEP) को अब देश भर के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करने के लिए एडिशनल चार्ज दिया जाएगा. जिसमें वह हायर एजुकेशन के लिए आम यानी कॉमन एंट्रेंस परीक्षा का आयोजन कर सकता है.

NTA पहले से ही ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंल एग्जाम JEE Main, मेडिकल प्रवेश परीक्षा - NEET, UGC NET, दिल्ली विश्वविद्यालय (DUET), जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNUEE) जैसे केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करता है.

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NTA करेगा आम प्रवेश परीक्षा की पेशकश

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) विश्वविद्यालय प्रवेश परीक्षा के लिए हर साल कम से कम दो बार विज्ञान, ह्यूमैनिटीज, भाषा, कला, और व्यावसायिक विषयों में उच्च गुणवत्ता वाली सामान्य योग्यता परीक्षा, साथ ही विशिष्ट सामान्य विषय परीक्षा की पेशकश करेगी.

नई नीति के अनुसार, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में प्रवेश के लिए NTA की ओर से आयोजित की जाने वाली प्रवेश परीक्षा वैकल्पिक होगी. नई प्रणाली में संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रवेश के लिए आयोजित standardised aptitude test यानी सैट में कुछ समानताएं हैं.

NTA ने ली थी CBSE की जगह प्रवेश परीक्षा आयोजन करने की जिम्मेदारी

आपको बता दें, कुछ साल जिन कोर्सेज की प्रवेश परीक्षा का आयोजन CBSE किया था,उन सभी परीक्षाओं की जिम्मेदारी नेशनल टेंस्टिंग एजेंसी (NTA) को दे गई थी. जिसमें प्रवेश परीक्षाएं जैसे - JEE मेन, NEET, UGC NET, CTET, GATE, AICTE, IIT और IIM इत्यादि शामिल है.

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बता दें, नई शिक्षा नीति के अनुसार संगीत, दर्शन, कला, नृत्य, रंगमंच, उच्च संस्थानों की शिक्षा के पाठ्यक्रम में शामिल होंगे. स्नातक की डिग्री 3 या 4 साल की अवधि की होगी. एकेडमी बैंक ऑफ क्रेडिट बनेगी, छात्रों के परफॉर्मेंस का डिजिटल रिकॉर्ड इकट्ठा किया जाएगा.

साल 2050 तक स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणाली के माध्यम से कम से कम 50 फीसदी शिक्षार्थियों को व्यावसायिक शिक्षा में शामिल होना होगा. गुणवत्ता योग्यता अनुसंधान के लिए एक नया राष्ट्रीय शोध संस्थान बनेगा, इसका संबंध देश के सारे विश्वविद्यालय से होगा.

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