मध्यप्रदेश की कमलनाथ सरकार ने प्रदेश में द इंस्टीट्यूट ऑफ टेंपल मैनेजमेंट खोलने की घोषणा की है. इससे पहले साल 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ये संस्थान बनवाने की घोषणा की थी. एमपी कांग्रेस ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडलर से एक खबर साझा करते हुए इस संस्थान के बारे में जानकारी दी.
बताया जा रहा है कि इस इंस्टीट्यूट में प्रदेश के सभी मठ-मंदिरों के पुजारियों को बेहतर प्रबंधन के गुर सिखाए जाएंगे. संस्थान में इंजीनियरिंग की ही तरह 6 शाखाएं खोली जाएंगी. इन ब्रांचेज में पुजारी इंजीनियरिंग व फाइनेंस जैसे कोर्स कराए जाएंगे. संस्थान शोध करके धार्मिक स्थल की आवश्यकताओं और उनकी अपेक्षाओं का पता लगाएंगे. सरकार ने पांच साल के हिसाब से इस इंस्टीट्यूट की प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार की है. इसकी स्थापना भोपाल में ही की जानी है.इसलिए खुल रहा है संस्थान, ये करेंगे संचालन
संस्था का संचालन आचार्य और विद्वानों के नेतृत्व में गठित संचालक मंडल करेगा. यहां मंदिरों से जुड़ी गतिविधियां सिखाई जाएंगी. इनमें विशेष रूप से वेद विद्यालय, आगम शालाएं, संस्कृत पाठन, मंदिर सरोवर, धर्म ग्रंथालय का विकास खास रहेगा.
इतने करोड़ होंगे खर्च
कहा जा रहा है कि इंस्टीट्यूट के इन्फ्रास्ट्रक्चर और मैनेजमेंट में 50 करोड़ रुपये खर्च होंगे. अध्यात्म विभाग की कोशिश है कि ये राशि केंद्र सरकार से ली जाए, वित्त आयोग को इसके लिए पत्र भी भेजा गया गया. एसीएस अध्यात्म विभाग मनोज श्रीवास्तव का बयान है कि द इंस्टीट्यूट आफ टेंपल मैनेजमेंट की स्थापना पर विचार चल रहा है. इसमें मंदिरों के प्रबंधन की ट्रेनिंग दी जाएगी.
शिवराज सिंह भी कर चुके हैं यही वादा
साल 2014 में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कुछ ऐसी ही घोषणा करते हुए कहा था कि प्रदेश में मध्यप्रदेश मंदिर प्रबंध संस्थान और पुजारी कल्याण कोष स्थापित किया जाएगा. चौहान ने 31 जुलाई को विदिशा में बेतवा नदी के तट पर बाढ़ वाले गणेश की प्राण प्रतिष्ठा समारोह में ये बात कही थी. उन्होंने कहा था कि मध्यप्रदेश मंदिर प्रबंध संस्थान प्रदेश के मठ-मंदिरों की बेहतर व्यवस्था के लिए बनेगा.
उन्होंने इस संस्थान की जितनी भी विशेषताएं बताई थीं, बिल्कुल वैसी ही विशेषताएं कमलनाथ सरकार ने दोहराई हैं. बस बजट को लेकर शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि इस कोष को राज्य शासन द्वारा हर साल दो करोड़ रुपए दिए जाएंगे. कोष आकस्मिक परिस्थिति में पुजारियों की मदद करेगा. साथ ही धर्मस्व विभाग के अंतर्गत गठित किए जाने वाले इस कोष में विभिन्न स्रोतों से दान भी प्राप्त किया जा सकेगा.
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