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कभी सोचा है पुलिस की वर्दी का रंग खाकी क्यों होता है? ये रहा जवाब

मोहित पारीक
  • 18 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 10:04 AM IST
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जब आप किसी पुलिसकर्मी को देखते हैं तो आप देखकर ही पहचान जाते हैं कि ये पुलिसकर्मी है या नहीं. हर कोई पुलिसकर्मी की वर्दी से उनकी पहचान करता है, जिसका रंग खाकी होता है. आपने देखा होगा कि पुलिसवाले की वर्दी का कलर खाकी होता है, लेकिन क्या आप जानते हैं आखिर पुलिस की वर्दी का रंग खाकी ही क्यों होता है...

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बता दें कि जब भारत में ब्रिटिश शासन था तब पुलिस की वर्दी खाकी रंग की नहीं बल्कि सफेद कलर की होती थी. लेकिन लंबी ड्यूटी की वजह से वो जल्दी ही गंदी हो जाती थी और इससे पुलिसकर्मियों को बड़ी दिक्कत होती थी.

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इसके लिए पुलिसवालों ने अपनी वर्दी के रंग को बदलना शुरू कर दिया और वो वर्दी का रंग सफेद से अलग कर लेते थे.

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बताया जाता है कि वर्दी का रंग अलग-अलग हो जाने की वजह से अफसरों ने डाई बनवाई जिसका रंग खाकी था. यह रंग चाय की पत्तियों के पानी और कलर के माध्यम से बनाया जाता था और यह रंग वर्दी पर किया जाता था.

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उस वक्त सब पुलिसकर्मी मिट्टी के रंग की वर्दी पहनने लगे और वो ही दौर अभी तक जारी है. पुलिसकर्मियों के इस कदम को देखकर उस वक्त साल 1847 में सर हैरी लम्सडेन ने खाकी रंग की वर्दी को आधिकारिक तौर पर अपना लिया.

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कौन हैं सर हेनरी लॉरेंस- लॉरेंस नोर्थ वेस्ट फ्रंटियर के गवर्नर के एजेंट थे और लाहौर के रहने वाले थे. उन्होंने ही 'कॉर्प्स ऑफ गाइड' फोर्स दिसंबर 1846 में खड़ी की थी. ये फोर्स ब्रिटिश भारतीय सेना की एक रेजिमेंट थीं जो कि उत्तर-पश्चिम सीमा पर सेवा करने के लिए बनाई गई थी.

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