गणतंत्र दिवस पर होने वाली परेड ही है जो सबसे ज्यादा ध्यान आकर्षित करती है. आज देश 70वां गणतंत्र दिवस मना रहा है. ऐसे में देश की ये 65वीं परेड है जो राजपथ पर आयोजित की गई. जी हां ये कम ही लोग जानते हैं राजपथ पर होने वाली परेड 4 साल तक कहीं और आयोजित की जाती थी. आइए जानते हैं पहली परेड के बारे में...
1950 से लेकर 1954 तक गणतंत्र दिवस की पर अलग अलग जगह पर आयोजित की जाती थी. बता दें, 26 जनवरी को होने वाली परेड का समय 90 मिनट होता है, लेकिन पहले ये समय 90 मिनट से ज्यादा था. जिसे बाद में बदल दिया गया.
4 साल तक परेड कभी इर्विन स्टेडियम (नेशनल स्टेडियम), किंग्स वे (मौजूदा राजपथ), कभी लाल किला या कभी रामलीला मैदान में होती थी.
बता दें, पहले गणतंत्र दिवस पर 31 तोपों की सलामी दी गई थी, जिसके बाद निर्णय लिया गया. (आजादी के बाद परेड में हिस्सा लेते हुए डॉ भीमराव अंबेडकर और अन्य वरिष्ठ नेताओं की तस्वीर)
राजपथ पर साल 1955 में पहली बार गणतंत्र दिवस परेड शुरू हुई और उसके बाद से हर साल राजपथ पर परेड हो रही है.
(इस तस्वीर में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू हैं और विदेशी मेहमान इंडोनेशिया के राष्ट्र प्रमुख नजर आ रहे हैं.)
यह तस्वीर साल 1952 की है, जिसमें मशीन का चिन्ह भी शामिल किया गया था.
1955 के बाद से अब तक 8 किलोमीटर की दूरी तय करने वाली यह परेड रायसीना हिल से शुरू होकर राजपथ, इंडिया गेट तक जाती है. (फोटो 1952 की परेड की है)
भारत के आजाद हो जाने के बाद संविधान सभा की घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसंबर 1947 से आरंभ कर दिया. संविधान सभा ने 2 साल, 11 महीने, 18 दिन में भारतीय संविधान का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवम्बर 1949 को भारत का संविधान सुपुर्द किया, इसलिए 26 नवंबर दिवस को भारत में संविधान दिवस के रूप में हर साल मनाया जाता है. (फोटो 1952 की परेड की है)