शिक्षिका-लेखिका से लेकर गोवा के गवर्नर पद तक पहुंचने वाली मृदुला सिन्हा अपने समर्पण, जज्बे और मेहनत के लिए याद की जाती रहेंगी. बिहार में जन्मीं मृदुला सिन्हा के निधन से देश को अपूर्णीय क्षति हुई है.
मृदुला सिन्हा का जन्म 27 नवंबर 1942 को बिहार के मुजफ्फपुर में हुआ था. उन्होंने साल 1962 में बिहार यूनिवर्सिटी के एमडीडीएम कॉलेज से बीए ऑनर्स की पढ़ाई की. फिर साल 1964 में बिहार यूनिवर्सिटी से मनोविज्ञान विषय में परास्नातक की पढ़ाई पूरी की. फिर 1971 में बिहार यूनिवर्सिटी से बीएड की पढ़ाई पूरी की.
इतने साल रहीं टीचर
साल 1964 से 68 तक डॉ एसके सिन्हा वुमंस कॉलेज मोतिहारी बिहार में लेक्चरर के पद पर रहीं, इसके बाद भारतीय शिशु मंदिर मुजफ्फरपुर की प्रिंसिपल का कार्यभार 1968 से 77 तक संभाला.
इन प्रशासनिक पदों पर संभाली जिम्मेदारी:
2004 : सदस्य, राजभाषा समिति, गृह मंत्रालय
सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, स्पात मंत्रालय
1998-2004: चेयरपर्सन, सेंट्रल सोशल वेलफेयर बोर्ड (CSWB), मानव संसाधन मंत्रालय
1996-1998: सदस्य, दिल्ली महिला आयोग, दिल्ली सरकार
1998 : सदस्य, रेलवे हिंदी सलाकार समिति, रेल मंत्रालय
राजनीतिक करियर
1981-2014: सदस्य, राष्ट्रीय कार्यकारिणी, भाजपा
2012-2014: प्रभारी, भाजपा महिला मोर्चा
2008-10: प्रभारी, भाजपा महिला मोर्चा
2006-08: संयोजक, गैर सरकारी संगठन सेल, भाजपा
1996-98: उपाध्यक्ष, अखिल भारतीय भाजपा
1986-96: अध्यक्ष, भाजपा महिला मोर्चा
1980-86: सह-संयोजक महिला सेल, एआईबीजेपी
1980: चुनाव प्रभारी, नई दिल्ली, संसदीय क्षेत्र
1977: चुनाव प्रभारी, मुजफ्फरपुर, संसदीय क्षेत्र
1975: जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में समागम क्रांति में सक्रिय भागीदारी
साहित्य जगत में रहा योगदान
मृदुला सिन्हा ने अपने जीवनकाल में 46 से अधिक पुस्तकें लिखीं. उनके उपन्यास ज्यो मेहंदी को रंग पर दूरदर्शन की लघु फिल्म बनी. इसके अलावा उनके उपन्यास नई देवयानी, घरवासा, सीता पुनि बोली, सावित्री, तिशय आदि काफी सराहे गए. उन्होंने राज माता सिंधिया पर जीवनी: राजपथ से लोकपथ लिखी जिस पर फिल्म भी बनी.
कथा संग्रह: साक्षात्कार, एक दीये की दिवाली, स्पर्श की तासीर, अपना जीवन आदि.
निबंध संग्रह: आईने के सामने, मानवी के नाते, बिहार की लोककथा (बच्चों के लिए)
विभिन्न राष्ट्रीय और क्षेत्रीय हिंदी अखबारों, पत्रिकाओं और पत्रिकाओं में नियमित कॉलम.
विजयाराजे सिंधिया पर लिखी उनकी किताब पर फिल्म ‘एक थी रानी ऐसी भी’ बनी थी.
उनके पति डॉक्टर रामकृपाल सिन्हा बिहार में कैबिनेट मंत्री और केंद्र सरकार में राज्य मंत्री रहे. अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के दौरान मृदुला सिन्हा केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड की अध्यक्ष रहीं. बाद में उन्हें गोवा की राज्यपाल बनाया गया था.
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