कर्मचारी चयन आयोग ने कुल 17727 पदों पर भर्ती के लिए आवेदन मांगे हैं. एससएससी सीजीएल (SSC CGL) टीयर वन की परीक्षा के लिए देश भर से तकरीबन 30 लाख कैंडिडेट्स ने फॉर्म भरा है. यानी कि एक पद के लिए 170 दावेदार हैं, इसलिए इन पदों पर नौकरी पाने के लिए कैंडिडेट्स को 169 उम्मीदवारों को पीछे छोड़ना होगा.
असल में यह आंकड़ा युवाओं में सरकारी नौकरी का क्रेज तो दिखाता ही है, साथ ही ये साबित भी होता है कि पढ़ाई करके डिग्रियां लेने के बावजूद युवाओं के पास जॉब नहीं है. सरकार इसके लिए अब कई तरह के प्रयास भी कर रही है. करीकुलम में पढ़ाई के साथ साथ स्किल डेववलपमेंट को खास अंग बनाया जा रहा है ताकि पढ़ाई के साथ युवा विभिन्न क्षेत्रों में स्किल हासिल करके मार्केट का हिस्सा बन सकें. इसका कारण यह भी बताया जाता है कि मार्केट में नौकरियां हैं पर स्किल्ड लोगों की भारी कमी है.
गौरतलब है कि हर साल कई विभागों में सरकारी नौकरी के लिए हजारों की संख्या में खाली पदों पर भर्ती की जाती है. लेकिन इन हजारों पद के लिए लाखों उम्मीदवार फॉर्म भरते हैं. यह युवाओं में सरकारी नौकरी की इच्छा और देश में बेरोजगारी दर को भी दर्शाता है. यह हाल सिर्फ एसएससी सीजीएल परीक्षा का ही नहीं है, देश में हो रही हर भर्ती परीक्षा का यही हाल है. उत्तर प्रदेश में कुल 60 हजार से अधिक पदों पर पुलिस भर्तियां होनी हैं, लेकिन इन भर्तियों के लिए लगभग 50 लाख से अधिक आवेदन आए हैं. यानी हर एक पद पर 80 उम्मीदवार में फाइट होनी है.
इन भर्तियों का भी यही हाल
वहीं, 2019 में योगी सरकार ने 69 हजार शिक्षकों की भर्ती के लिए परीक्षा आयोजित करवाई थी. इस परीक्षा में 4.10 लाख युवाओं ने फॉर्म आवेदन किया था. जिसमें से 1.47 लाख कैंडिडेट्स पास हुए थे और नौकरियां मिली थीं 69 हजार उम्मदीवारों को. इस डेटा के हिसाब से 6 उम्मीदवार में से 1 को नौकरी मिल थी. इसी तरह 2018 में ग्राम विकास अधिकारी के 1,918 पदों के लिए करीब 14 लाख लोगों ने आवेदन दिया था. इस हिसाब से 728 उम्मीदवारों में से 1 को नौकरी मिली थी.
पिछले पांच साल में घटा बेरोजगारी दर
पीरियोडिक लेबर फोर्स सर्वे (PLFS) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, देशभर में बेरोजगारी दर 3.2% है, जबकि उत्तर प्रदेश में ये दर 2.4% है. बेरोजगारी दर से पता चलता है कि लेबर फोर्स में शामिल कितने लोग बेरोजगार हैं. सर्वे के आंकड़ों की मानें तो पांच साल में यूपी में बेरोजगारी दर घटकर आधी हो गई है. 2018-19 में यूपी में बेरोजगारी दर 5.7% थी, जो 2022-23 में घटकर 2.4% पर आ गई.
UPSC में सिर्फ 8% क्लियर कर पाते हैं एग्जाम
UPSC की परीक्षा इसका सबसे बड़ा उदाहरण हैं, यूपीएससी ने हाल ही में अपनी अनुअल रिपोर्ट साझा की थी. इस रिपोर्ट के अनुसार, लाखों उम्मीदवार परीक्षा देते हैं लेकिन सिर्फ 8 प्रतिशत कैंडिडेट की पहला चरण पास कर पाते हैं और इंटरव्यू आते-आते यह संख्या भी काफी कम हो जाती है.
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