बिल्डिंग ही नहीं, पढ़ाई भी 'जर्जर' है... नतीजा ये है कि राजस्थान में बच्चे सरकारी स्कूल जाना नहीं चाहते!

Rajasthan Government School: राजस्थान में सरकारी स्कूल की छत गिरने की वजह से 7 बच्चों की जान चली गई. इसके बाद से राजस्थान की सरकारी स्कूलों के हालात की बात हो रही है.

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राजस्थान के सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है. (Photo: ITG) राजस्थान के सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है. (Photo: ITG)

aajtak.in

  • जयपुर,
  • 25 जुलाई 2025,
  • अपडेटेड 4:03 PM IST

राजस्थान के झालावाड़ में एक सरकारी स्कूल की बिल्डिंग का एक हिस्सा गिरने से 7 लोगों की मौत हो गई है. इसके अलावा 17 बच्चे घायल हो गए हैं. बताया जा रहा है कि अभी कुछ बच्चों के मलबे में दबे होने की आशंका है. जिस वक्त ये हादसा हुआ, उस वक्त क्लास में करीब 60 बच्चे मौजूद थे. राजस्थान के सरकारी स्कूल में हुए इस हादसे के बाद अब सरकारी स्कूलों के हालात पर भी काफी चर्चा होने लगी है. ऐसे में बताते हैं कि राजस्थान के सरकारी स्कूलों की स्थिति क्या है और किस तरह पढ़ाई में भी राजस्थान के सरकारी स्कूल किस तरह पिछड़ रहे हैं...

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नहीं भेजना चाहते सरकारी स्कूल

राजस्थान में पैरेंट्स बच्चों का सरकारी स्कूलों से प्राइवेट स्कूलों में एडमिशन करवा रहे हैं. हाल ही में लोकसभा में पेश किए गए एक जवाब में सरकार की ओर से बताया गया था कि सरकारी स्कूलों में एडमिशन लेने वाले बच्चों की संख्या कम हो रही है. UDISE+ के आंकड़े बताते हैं कि राजस्थान में सरकारी स्कूलों में साल 2021-22 में 99.12 लाख बच्चों ने एडमिशन लिया था और 2023-24 में ये डेटा 83.81 लाख रह गया था.

इससे पहले के सालों से तुलना करें तो भी सरकारी स्कूलों में एडमिशन का आंकड़ा कम होता जा रहा है. इसका मतलब है कि दो साल में 15 लाख बच्चे कम हो गए हैं. बताया जा रहा है कि स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की कमी और स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का अभाव होने की वजह से सरकारी स्कूलों में एडमिशन कम हो रहे हैं.

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टीचर्स हैं नहीं...

राजस्थान के सरकारी स्कूलों में टीचर्स के कई पद खाली हैं. अगर आंकड़ों पर नजर डालें तो राजस्थान के स्कूलों में बड़ी संख्या में पद खाली हैं. साल 2020 में 65545, 2021 में 69081, 2022 में 109462 पद टीचिंग और नॉन टीचिंग पद खाली थे.

इंटरनेट नहीं पहुंचा है...

स्मार्ट एजुकेशन को भले ही बढ़ावा दिया जा रहा हो, लेकिन पूरे भारत में सिर्फ 37.7 फीसदी सरकारी स्कूलों में ही कंप्यूटर है और 24.2 फीसदी ही ऐसे स्कूल हैं, जहां इंटरनेट कनेक्शन पहुंचा है. ऐसे में माना जा रहा है कि राजस्थान में भी कुछ ऐसी ही स्थिति होगी और ये आंकड़ा और भी नीचे हो सकती है.

कई स्कूलों के भी जर्जर हालात

झालावाड़ के अलावा राजस्थान के कई सरकारी स्कूलों के हालात खराब हैं. अब राजस्थान के अन्य स्कूलों से भी ग्राउंड रिपोर्ट सामने आनी लगी हैं, जिसकी तस्वीरें बताती हैं कि राजस्थान के कई स्कूलों के हालात ऐसे ही हैं और सेफ्टी भगवान भरोसे है. पाली के एक स्कूल की भी तस्वीर सामने आई है, जो स्कूल भी काफी जर्जर है और कभी भी गिर सकती है.

 

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