MP Nursing College Scam: मध्य प्रदेश के 375 कॉलेजों में 1.25 लाख से अधिक नर्सिंग स्टूडेंट्स पिछले 3 वर्षों से किसी भी परीक्षा में शामिल नहीं हुए हैं. जिन छात्रों ने 2020-21 में एडमिशन लिया था, वे अभी तक फर्स्ट ईयर की परीक्षा में शामिल नहीं हुए हैं, जबकि कॉलेजों में जनवरी 2023 तक छात्रों का एडमिशन जारी रहा.
चूंकि पिछले 3 वर्षों से परीक्षाएं नहीं हुई हैं, ऐसे में पिछले 3 वर्षों से मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई नया नर्सिंग स्टाफ नहीं आया है. एक अनुमान के अनुसार, वर्ष 2020 से पहले हर साल लगभग 20,000 नए नर्सिंग स्टाफ राज्य की स्वास्थ्य प्रणाली में शामिल होते हैं. इसकी वजह है साल 2020 में सामने आया नर्सिंग कॉलेज घोटाला.
क्या है नर्सिंग कॉलेज घोटाला?
राज्य नर्सिंग काउंसिल से पता चला कि मान्यता प्राप्त नर्सिंग कॉलेज या तो कागजों पर चल रहे थे, या एक कमरे के किराए के आवास से चलाए जा रहे थे. कई मामलों में इन नर्सिंग काउंसिल से मान्यता प्राप्त कॉलेजों का अस्पतालों से कोई संबंध नहीं था. साथ ही इन तथाकथित नर्सिंग कॉलेजों को मेडिकल कॉलेजों से संबद्धता मिल गई थी.
मामला हाईकोर्ट पहुंचा और इसी साल जनवरी में परीक्षा की प्रक्रिया पर रोक लगा दी गई. हाईकोर्ट ने मामले को जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया था. सीबीआई द्वारा प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दायर करने के बाद राज्य उच्च न्यायालय की ग्वालियर पीठ ने प्रमुख जांच एजेंसी को सभी 375 नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने और इस साल 26 जुलाई तक एक रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया.
राज्य सरकार, राज्य नर्सिंग काउंसिल और राज्य चिकित्सा विश्वविद्यालय ने लंबित परीक्षाओं को कराने का तर्क दिया था, लेकिन हाईकोर्ट ने घोटाले की तह तक जाने पर जोर दिया. विशाल बघेल, जिन्होंने राज्य नर्सिंग काउंसिल कॉलेज मान्यता प्रक्रिया को चुनौती दी है, उन्होंने इंडिया टुडे से बात करते हुए कहा, 'छात्रों को परेशानी हो सकती है, लेकिन किसी को यह जवाब देना होगा कि अनिवार्य मानदंडों को पूरा नहीं करने वाले कॉलेजों में उन्हें पहले प्रवेश क्यों मिला. किस तरह के छात्र उन कॉलेजों से निकलेंगे जो सिर्फ कागजों पर मौजूद हैं या उन कॉलेजों से जो बिना किसी अस्पताल से जुड़े एक कमरे से चलते हैं.'
2021-22 बैच में एडमिशन पाने वाली नर्सिंग की छात्रा पूजा भालसे ने कहा कि वह पीड़ित हैं, क्योंकि नर्सिंग काउंसिल और राज्य सरकार में कोई घोटाला कर रहा है. उन्होंने बताया, 'जब हमें एडमिशन दिया गया तो हमें बताया गया कि संबद्धता की प्रक्रिया में समय लग रहा है क्योंकि मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ कुछ मुद्दे हैं. लेकिन अब हमें पता चला है कि हमारे सीनियर्स भी फर्स्ट ईयर की परीक्षा में नहीं बैठे हैं. घोटाला भोपाल और जबलपुर में बैठे लोगों ने किया है लेकिन इसका खामियाजा मुझ जैसे आम छात्रों को भुगतना पड़ रहा है.'
हेमेंद्र शर्मा