26 साल लगे रहे, फिर भी नहीं बन पाए MBBS डॉक्टर, KGMU ने अपने चार छात्रों पर लिया एक्शन

दरअसल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में 4 छात्र ऐसे हैं जो 21 साल से लेकर 26 साल तक पढ़ाई करने के बाद भी एमबीबीएस की परीक्षा पास नहीं कर पाए. सबसे पुराना छात्र 1997 बैच का है. इसके बाद 1999, 2001 और 2006 बैच के छात्र हैं.

Advertisement
सांकेतिक तस्वीर सांकेतिक तस्वीर

सत्यम मिश्रा

  • लखनऊ,
  • 01 अगस्त 2023,
  • अपडेटेड 1:36 PM IST

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे 4 छात्रों पर केजीएमयू ने कार्रवाई की है. जानकारी के मुताबिक, जो छात्र एमबीबीएस की परीक्षा पास नहीं कर पाए हैं, उनमें से सबसे पुराना छात्र 1997 बैच का है. इसके बाद 1999, 2001 और 2006 बैच के छात्र हैं. अब जाकर केजेएमयू ने इन सभी छात्रों के दाखिले रद्द कर दिए हैं.

Advertisement

26 साल तक एमबीबीएस पढ़ाई का कारण
दरअसल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में 4 छात्र ऐसे हैं जो 21 साल से लेकर 26 साल तक पढ़ाई करने के बाद भी एमबीबीएस की परीक्षा पास नहीं कर पाए. अभी तक एमबीबीएस परीक्षा पास करने की अधिकतम अवधि निर्धारित नहीं थी शायद इन्हीं कारणों से ये स्टूडेंट्स अपने मन मुताबिक जब भी एमबीबीएस का एग्जाम आता तो एग्जामिनेशन फॉर्म भर कर के परीक्षा में बैठ जाते थे. हालांकि अब इन चारों स्टूडेंट्स का दाखिला केजीएमयू ने रद्द कर दिया है. 

कमजोर छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी उठाए कई कदम
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के प्रवक्ता डॉ सुधीर कुमार ने बताया कि दाखिला रद्द करने से पहले छात्रों को तैयारी से लेकर परीक्षा पास करने का पूरा मौका दिया गया था. कमजोर छात्रों की लिस्ट बनाई गई थी और उन्हें एक साल का रेगुलर क्लास में आकर पढ़ाई करने के आदेश दिए गए थे. ताकि यह पता चल सके कि उनकी क्या कमजोरी है. यूनिवर्सिटी ने दाखिला लेकर कोर्स बीच में छोड़ने वाले छात्रों को मर्सी अपटेंप्ट के लिए भी अलाउ किया था. ऐसे छात्रों की सहूलियत के लिए एक्स्ट्रा क्लासेस और फिर अपनी परीक्षा देने का मौका दिया था. कुछ छात्रों ने परीक्षा दी जबकि कुछ छात्रों ने लापरवाही दिखाई और परीक्षा नहीं दी.

Advertisement

अब नहीं चलेगी छात्रों की मनमर्जी
डॉ सुधीर ने बताया कि ये छात्र मनमर्जी के हिसाब से परीक्षा देने आते थे तो कभी नहीं आते थे. क्योंकि वह सोचते थे कि कोई प्रावधान नहीं है तो जितने साल मन करे उतने साल परीक्षा का फॉर्म भरकर परीक्षा देते रहेंगे, भले ही फेल होते रहे, लेकिन अब छात्र ऐसा नहीं कर पाएंगे. यूनिवर्सिटी ने कहा कि अब जिन स्टूडेंट्स को परीक्षा देनी है उन्हें रेगुलर क्लास लेनी होगी. साथ ही साथ एक्स्ट्रा क्लास में उपस्थित होना होगा ताकि जिन विषयों में कमजोरी है उसे मजबूत करके परीक्षा पास किया जा सके. 

कितने साल तक दे सकते हैं एमबीबीएस एग्जाम?
डॉ सुधीर ने आगे बताया कि जिस तरह पहले एमबीबीएस की परीक्षा पास करने की कोई अवधि नहीं थी कि इतने समय सीमा के अंदर परीक्षा पास करनी ही है, इसमें भी बदलाव किया गया है. नेशनल मेडिकल कमीशन के मानकों के आधार पर कार्य परिषद ने अब यह तय किया है कि अगर कोई छात्र 10 साल मे भी परीक्षा पास नहीं कर पाता है तो उसकी एमबीबीएस की पढ़ाई को निरस्त कर दिया जाएगा और दाखिला भी नहीं किया जाएगा.

 

 

TOPICS:
Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement