दिहाड़ी मजदूर के बेटे की IIT की फीस जमा करेगी योगी सरकार, ये विभाग उठाएगा पूरा खर्च

यूपी सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप दी जाएगी. मंत्री असीम अरुण ने परिवार से बात करने के बाद एडमिशन फीस जमा करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है. आईआईटी धनबाद से भी समाज कल्याण व‍िभाग से बात करके एडमिशन दिलाने में मदद करेगी. 

Advertisement
यूपी के अतुल कुमार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था बड़ा फैसला. यूपी के अतुल कुमार के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया था बड़ा फैसला.

संतोष शर्मा

  • लखनऊ ,
  • 02 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 5:02 PM IST

दिहाड़ी मजदूर के बेटे के IIT धनबाद में सेलेक्शन होने के बाद फीस जमा नहीं हो पाने के मामले में अब योगी सरकार ने उसका जिम्मा उठाया है. उत्तर प्रदेश सरकार अब आईआईटी धनबाद में एडमिशन पाने वाले अतुल कुमार की मदद करेगी. यूपी के समाज कल्याण मंत्री असीम अरुण ने छात्र अतुल और उनके पिता राजेंद्र कुमार से फोन पर बात करके उन्हें पूरी मदद करने का आश्वासन द‍िया. 

Advertisement

अतुल कुमार का आईआईटी का शुरुआती खर्च समाज कल्याण विभाग के द्वारा उठाया जाएगा. छात्रवृत्ति योजना के तहत समाज कल्याण विभाग आईआईटी की पूरी फीस स्कॉलरशिप के जरिए देकर मदद करेगा. यूपी सरकार की तरफ से छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप दी जाएगी. मंत्री असीम अरुण ने परिवार से बात करने के बाद एडमिशन फीस जमा करने की कार्रवाई भी शुरू हो गई है. आईआईटी धनबाद से भी समाज कल्याण व‍िभाग से बात करके एडमिशन दिलाने में मदद करेगी. 

गौरतलब है कि मुजफ्फरनगर के खतौली के टिटोडा गांव के रहने वाले दिहाड़ी मजदूर राजेंद्र कुमार के बेटे अतुल को आईआईटी धनबाद में मिला एडमिशन फीस जमा नहीं होने के कारण अटक गया था. वह इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में आईआईटी धनबाद को निर्देश दिया कि वे उस दलित स्टूडेंट को दाखिला दें, जिसे समय सीमा पर फीस जमा न कर पाने की वजह दाखिला नहीं मिल सका था. 

Advertisement

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के रहने वाले और दिहाड़ी मजदूर के बेटे 18 वर्षीय अतुल कुमार ने, अपनी आखिरी कोशिश में जेईई परीक्षा पास की थी. उन्हें इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग विभाग में सीट अलॉट की गई थी लेकिन 24 जून की समय सीमा तक फीस जमा न करा पाने की वजह से उसे अपनी सीट गंवानी पड़ी थी. 

अतुल के वकील के मुताब‍िक उनके पिता 450 रुपये दिहाड़ी कमाते हैं. उन्होंने बताया, "17,500 रुपये का बंदोबस्त करना उनके लिए बहुत बड़ा काम था. पिता ने यह रकम गांव वालों से जुटाई." आईआईटी धनबाद के वकील ने दावा किया कि राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) ने अतुल कुमार को एसएमएस भेजा और आईआईटी ने उन्हें दो व्हाट्सएप चैट के जरिए पेमेंट करने की जानकारी दी थी. वकील ने कहा, “वह हर दिन लॉगिन करता था.”

'आदेश देते हैं कि दाखिला दिया जाए'

इस पर जस्टिस पारदीवाला ने आईआईटी धनबाद से कहा था कि आप इतना विरोध क्यों कर रहे हैं? रास्ता निकालने की कोशिश क्यों नहीं करते? सीट अलॉटमेंट की पर्ची दिखाते है कि आप चाहते थे कि वह पेमेंट करे? और अगर उसने किया तो कुछ और की जरूरत नहीं था.

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement