बदल रहा ट्रेंड: निजी स्कूलों ने फीस बढ़ाई तो लाखों बच्चों ने ले लिया सरकारी में दाखि‍ला

पूरे देश में प्राइवेट स्कूलों की बढ़ती फीस पेरेंट्स की जेब तंग कर रही है. महंगी फीस से परेशान पेरेंट्स अपने बच्चों का एडमिशन सरकारी स्कूलों में कराने से बचते हैं. वहीं, सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए मैथ्स लैब, साइंस लैब, रोबोटिक लैब, कंप्यूटर लैब, स्मार्ट टीवी से लैस स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे हैं. लेकिन इस राज्य में दोनों के बीच ये कड़ी टूटते दि‍ख रही है.

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Gujarat private school fee hike Gujarat private school fee hike

अतुल तिवारी

  • अहमदाबाद,
  • 23 अगस्त 2024,
  • अपडेटेड 6:30 PM IST

कहते हैं किअति हमेशा खराब होती है. देश के तमाम न‍िजी स्कूलों ने फीस और दूसरी मदों से जिस तरह अभ‍िभावकों को परेशान किया है, वो भी किसी अत‍ि से कम नहीं. लेकिन गुजरात राज्य में शायद अब ये ट्रेंड बदलने वाला है. बड़ी बात नहीं है कि ये ट्रेंड पूरे देश को बदल दे. 

बता दें कि गुजरात के प्राइवेट स्कूलों में बढ़ती फीस से परेशान अभिभावक अपने बच्चों के एडमिशन प्राइवेट स्कूल से अब सरकारी स्कूलों में करा रहे है. गुजरात सरकार द्वारा जारी आंकड़ो में कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2024 - 25 में बालवाटिका से लेकर 12वीं तक 2.30 लाख छात्रों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में एडमिशन लिया है. सरकार की मानें तो इसके पीछे सबसे बड़ी वजह सरकारी स्कूलों में बेहतर हो रही शिक्षा व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया जा रहा है लेकिन अभिभावक, स्कूल एसोसिएशन और विपक्ष का मानना है कि लगातार बढ़ती महंगाई और प्राइवेट स्कूल में हर साल बढ़ती फीस से परेशान होकर लोग प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूल में पढ़ाने के लिए विवश हो रहे है.

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प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे जिनका एडमिशन उनके अभिभावकों ने इस साल सरकारी स्कूल में करवाया है. उनका कहना है कि, प्राइवेट स्कूल में लगातार फीस बेलगाम होकर बढ़ती जा रही है और समय से फ़ीस भरने में देरी हो तो स्कूल बच्चों को परेशान करते हैं. पहले के मुकाबले सरकारी स्कूलों में भी अब बेहतर शिक्षा मिल रही है. वैसे प्राइवेट स्कूल की बराबरी कर पाना तो सरकारी स्कूलों के लिए मुश्किल है लेकिन समय के साथ प्राइवेट स्कूलों में बढ़ती हुई फ़ीस और महंगाई से भी बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा पाना मुश्किल हो रहा है.

गुजरात के सरकारी स्कूलों की हालत सुधरी

गुजरात के सरकारी स्कूलों में अब बच्चों को अच्छी शिक्षा के लिए मैथ्स लैब, साइंस लैब, रोबोटिक लैब, कंप्यूटर लैब, स्मार्ट टीवी से लैस स्मार्ट क्लास बनाए जा रहे हैं लेकिन इसके साथ प्राइवेट स्कूलों में बढ़ रही फ़ीस से भी अभिभावक परेशान हैं. जिसका फ़ायदा बच्चों की संख्या के रूप में सरकारी स्कूलों को हो रहा है.

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अहमदाबाद म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन संचालित स्कूल बोर्ड के एडमिनिस्ट्रेटर लग्धीर देसाई का कहना है कि सरकारी स्कूलों में पहले से बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रेंड शिक्षकों द्वारा अभ्यास करवाया जाता है. प्राइवेट स्कूलों की तरह सरकारी स्कूलों के बच्चों के हाथों में आज क्रोम बुक दिखाई पड़ता है. शिक्षकों का समय पर एनालिसिस किया जाता है और रिपोर्ट भी बनाए जा रहे हैं, जिसकी वजह से सरकारी स्कूलों में प्राइवेट स्कूल छोड़कर बच्चे पढ़ाई करने आ रहे हैं. राज्य में 2.30 लाख बच्चों ने प्राइवेट स्कूल को छोड़कर सरकारी स्कूल में एडमिशन लिया है जिनमें अहमदाबाद के सरकारी स्कूलों में 37,786 बच्चे शामिल हैं. यह हमारे लिए गर्व की बात है.

कांग्रेस प्रवक्ता ने बीजेपी पर साधा निशाना

गुजरात कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता मनीष दोशी ने कहा कि सरकारी शिक्षा पर कभी सवाल था ही नहीं लेकिन प्राइवेट स्कूलों को व्यवसाय की तरह शुरू बीजेपी सरकार ने किया. सरकारी स्कूलों को बंद करके राज्य में खाली शिक्षकों की 40,000 जगह भरी नहीं जा रही हैं. सरकार के दावे से क्या हमें यह मान लेना चाहिए कि प्राइवेट स्कूलों से बेहतर शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सरकारी स्कूलों में मिल रही है? गुजरात के कई सरकारी स्कूलों में क्लास नहीं है, क्लास है तो शिक्षक नहीं हैं, शिक्षक है तो विदेश में पहुंचा हुआ है. क्या ऐसे में हमारे सरकारी स्कूल प्राइवेट के मुकाबले बेहतर हो चुके हैं. अगर यही सच है तो सरकार उन सभी 2.30 लाख अभिभावकों का सर्वे करवाए ताकि हकीकत पता चले. आंकड़े बता रहे हैं कि अभिभावक प्राइवेट स्कूलों की बेलगाम फ़ीस से परेशान हैं और मजबूरी में उन्हें सरकारी स्कूलों में अपने बच्चों को भेजना पड़ रहा है. सरकार इस स्थिति को देखें और खाली 40,000 जगहों को जल्द भरें ताकि बच्चों को सरकारी स्कूलों में अच्छी शिक्षा मिल सके.

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इतने छात्रों ने लिया सरकारी स्कूल में एडमिशन

बात करें तो वर्ष 2024-25 में बालवाटिका से कक्षा-12 तक कुल 2,29,747 विद्यार्थियों ने प्राइवेट से सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है. जिसमें सबसे ज्यादा अहमदाबाद महानगर पालिका में 37,786 छात्र, सूरत महानगर पालिका में 22,892 छात्र, वडोदरा महानगर पालिका में 10,602 छात्र और राजकोट नगर पालिका में 6,204 छात्रों ने निजी से सरकारी स्कूलों में प्रवेश लिया है. इसके अलावा बनासकांठा जिले में सबसे ज्यादा 10,228 छात्र, मेहसाणा में 8,267 छात्र, भावनगर में कुल 8,242 छात्र, जूनागढ़ में 7,892 छात्र, आनंद में 7,269 छात्र, अहमदाबाद ग्रामीण में कुल 6,910 छात्र, राजकोट में कुल 6,910 छात्र, गांधीनगर में 6,881 छात्र, कच्छ में 5,952 छात्र, खेड़ा में 5,910 छात्र और सूरत में 5,777 छात्रों ने प्राइवेट स्कूल छोड़कर सरकारी स्कूलों में एडमिशन लिया है.

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